Aaj Ki Kavita
Author: Vinay Vishwas
Brand: Rajkamal Prakashan
Edition: First Edition
Binding: hardcover
Number Of Pages: 472
Release Date: 01-07-2019
Part Number: 8126716711
Details: विनय विश्वास कवि-आलोचकों की उस परम्परा को आगे ले जाने का महत्त्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं, जो मुक्तिबोध से लेकर विष्णु खरे, राजेश जोशी, अरुण कमल से होती हुई मदन कश्यप तक आती है।...एक तरह का वैश्वीकरण वह है जिसे बाज़ार निर्मित करता है...और दूसरी तरह का वह, जिसे कविता बनाती है। विनय इस दूसरी तरह के वैश्वीकरण के कायल हैं।...विनय के अनुसार ‘संवेदना’ और ‘मनुष्यता’ का प्रसार करना भी एक तरह का ‘विकास’ है जिसे कविता करती है। यह वास्तव में उस विकास से उलट है जिसका नारा ‘भूमंडलीकरण’ दे रहा है और जिससे दुनिया छोटी हुई है, ‘छोटी सिर्फ दुनिया नहीं हुई। संवेदनशीलता और मनुष्यता भी हुई है।’ इस संकीर्णता के विरुद्ध है ‘आज की कविता’।...विनय ने आज की कविता की कलागत सकारात्मकता को भी रेखांकित किया है।...गद्य में ऐसे वाक्य लिखे हैं, जो कविता की पंक्तियों का सानी रखते हैं। ‘आज की कविता’ एक लम्बा आलोचनात्मक प्रगीत है। —बली सिंह, अनभै साँचा; अप्रैल-जून, 2009 यह पुस्तक समकालीन कविता के समूचे परिदृश्य को ठीक से उद्घाटित और आलोकित करनेवाली रचना कही जा सकती है। यह अकादमिक आलोचना की लीक पीटनेवाली उबाऊ पोथी नहीं है। इसमें प्रयुक्त भाषा का प्रवाह कविता जैसा है, विश्लेषण गहरा है, दृष्टि सा$फ है और समझ व्यापक।...इसका प्र सामान्य आलोचना पुस्तकों से काफी भिन्न है। समकालीन कविता के भव्य चेहरे के अनेक कोणों, रंगों और भाव-मुद्राओं को उद्घाटित करनेवाली इस पुस्तक को एक लंबी समकालीन कविता की तरह पढ़ा जा सकता है।...‘आज की कविता’ डूबकर पढऩे लायक किताब है। कविता में रुचि रखनेवालों के लिए भी और कविता में रुचि न रखनेवालों के लिए भी। —हरजेन्द्र चौधरी, कथन; अक्तूबर-दिसम्बर, 2009 यह किताब ’80 के बाद की कविता की सैद्धांतिकी बनाने की पहल करती है। विनय की आलोचना-शैली संवेदनशील बौद्धिक विमर्श का उदाहरण है। इसमें एक स्पष्ट निर्णय-पद्धति और विवेकसम्मत विश्लेषण मिलता है। इसलिए यह हमारे सामने हमारे समय की बेहतरीन कविता को प्रत्यक्ष उपस्थित कर देती है। इस प्रकार यह आलोचना-पद्धति भी अपने समय और समाज का क्रिटीक है। कविता के पक्ष में खड़ी यह किताब हमें बताती है कि रचनाकार जीवन का सर्जन करता है और (अच्छी) आलोचना रचना की पुनर्रचना करती है। यह ऐसी आलोचना है, जो रचना होने की ता$कत रखती है। —हेमंत कुकरेती, इंडिया टुडे; 23 दिसंबर, 2009.
EAN: 9788126716715
Package Dimensions: 8.4 x 5.6 x 1.6 inches
Languages: Hindi
Product Information
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Description
Author: Vinay Vishwas
Brand: Rajkamal Prakashan
Edition: First Edition
Binding: hardcover
Number Of Pages: 472
Release Date: 01-07-2019
Part Number: 8126716711
Details: विनय विश्वास कवि-आलोचकों की उस परम्परा को आगे ले जाने का महत्त्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं, जो मुक्तिबोध से लेकर विष्णु खरे, राजेश जोशी, अरुण कमल से होती हुई मदन कश्यप तक आती है।...एक तरह का वैश्वीकरण वह है जिसे बाज़ार निर्मित करता है...और दूसरी तरह का वह, जिसे कविता बनाती है। विनय इस दूसरी तरह के वैश्वीकरण के कायल हैं।...विनय के अनुसार ‘संवेदना’ और ‘मनुष्यता’ का प्रसार करना भी एक तरह का ‘विकास’ है जिसे कविता करती है। यह वास्तव में उस विकास से उलट है जिसका नारा ‘भूमंडलीकरण’ दे रहा है और जिससे दुनिया छोटी हुई है, ‘छोटी सिर्फ दुनिया नहीं हुई। संवेदनशीलता और मनुष्यता भी हुई है।’ इस संकीर्णता के विरुद्ध है ‘आज की कविता’।...विनय ने आज की कविता की कलागत सकारात्मकता को भी रेखांकित किया है।...गद्य में ऐसे वाक्य लिखे हैं, जो कविता की पंक्तियों का सानी रखते हैं। ‘आज की कविता’ एक लम्बा आलोचनात्मक प्रगीत है। —बली सिंह, अनभै साँचा; अप्रैल-जून, 2009 यह पुस्तक समकालीन कविता के समूचे परिदृश्य को ठीक से उद्घाटित और आलोकित करनेवाली रचना कही जा सकती है। यह अकादमिक आलोचना की लीक पीटनेवाली उबाऊ पोथी नहीं है। इसमें प्रयुक्त भाषा का प्रवाह कविता जैसा है, विश्लेषण गहरा है, दृष्टि सा$फ है और समझ व्यापक।...इसका प्र सामान्य आलोचना पुस्तकों से काफी भिन्न है। समकालीन कविता के भव्य चेहरे के अनेक कोणों, रंगों और भाव-मुद्राओं को उद्घाटित करनेवाली इस पुस्तक को एक लंबी समकालीन कविता की तरह पढ़ा जा सकता है।...‘आज की कविता’ डूबकर पढऩे लायक किताब है। कविता में रुचि रखनेवालों के लिए भी और कविता में रुचि न रखनेवालों के लिए भी। —हरजेन्द्र चौधरी, कथन; अक्तूबर-दिसम्बर, 2009 यह किताब ’80 के बाद की कविता की सैद्धांतिकी बनाने की पहल करती है। विनय की आलोचना-शैली संवेदनशील बौद्धिक विमर्श का उदाहरण है। इसमें एक स्पष्ट निर्णय-पद्धति और विवेकसम्मत विश्लेषण मिलता है। इसलिए यह हमारे सामने हमारे समय की बेहतरीन कविता को प्रत्यक्ष उपस्थित कर देती है। इस प्रकार यह आलोचना-पद्धति भी अपने समय और समाज का क्रिटीक है। कविता के पक्ष में खड़ी यह किताब हमें बताती है कि रचनाकार जीवन का सर्जन करता है और (अच्छी) आलोचना रचना की पुनर्रचना करती है। यह ऐसी आलोचना है, जो रचना होने की ता$कत रखती है। —हेमंत कुकरेती, इंडिया टुडे; 23 दिसंबर, 2009.
EAN: 9788126716715
Package Dimensions: 8.4 x 5.6 x 1.6 inches
Languages: Hindi


















