
Aakash Champa
Author: Sanjeev
Brand: RADHA KRISHNA PRAKASAN PVT LTD
Binding: paperback
Number Of Pages: 240
Release Date: 21-01-2023
Details: क्या जीवन आकाश चम्पा है? दो-दो बार वसन्त आता है इसमें, दो-दो बार खिलती हैं आकाश चम्पा की कलियाँ–जिन्दगी की तरह। एक बार जो जीवन जिया उसमें कितना कुछ जीने से रह गया, जिस-जिस मोड़ पर मुड़ना था, नहीं मुड़े, जहाँ पलटकर पीछे देखना था नहीं देखे, जहाँ ठहरना था, नहीं ठहरे। सो, आकाश चम्पा उन भूलों को सुधारती है, पहली बार जिन डालों में फूल नहीं आये होते, दूसरी बार उन डालों पर भी फूल खिलते हैं। गहन अनुभूतियों की बारीक बुनावट से रचा गया संजीव का यह नवीनतम उपन्यास मनुष्य की इस आदिम आकांक्षा का ऐसा मार्मिक आख्यान है, जिसमें व्यक्ति-जीवन के कोण से इतिहास, नियति, रिश्ते और संघर्ष के उन तमाम सवालों की पड़ताल की गई है, जो हमारे समय के विमर्श के केन्द्र में हैं। इन अर्थों में यह उपन्यास महज आख्यान नहीं रह जाता, बल्कि अपने समय से एक दुर्धर्ष टकराहट के रूप में पृष्ठ-दर-पृष्ठ ध्वनित होता है। संजीव ने इस उपन्यास में अपने दिक्काल का ऐसा निर्मम विवर्तन किया है, जिसे अन्यत्र देख पाना कठिन है। विवर्तन की प्रक्रिया में लेखक की नजर निरन्तर इतिहास के अन्दर विलम्बित और निलम्बित पड़े सवालों और इतिहास के बाहर छूटे हुए लोगों तक जाती है। सामाजिक अवक्षय ने भले ही मनुष्य को हताश कर दिया हो, पर इस स्थिति में भी उसके हृदय के कोने में यह आकांक्षा अपनी पंखुड़ियाँ खोलने से नहीं चूकती कि क्या भूलों का फिर से संशोधन हो सकता है? इस तरह संजीव नियति नहीं नियन्ता की कथा कहते हैं, उस नियन्ता मनुष्य की जिसने अपनी जिजीविषा को आत्मसंघर्ष की ताकत से मूर्त किया है और अपने मुक्तिस्वप्न को एक ही जीवन में दो बार सम्भव किया है। उपन्यास की आनुषंगिक उपलब्धि है एक वर्जित पर मार्मिक प्रेम प्रसंग, जिसकी स्निग्धता और सुरभि उपन्यास में एक नया आयाम जोड़ती है।
EAN: 9788189914783
Package Dimensions: 11.0 x 8.7 x 2.0 inches
Languages: Hindi
Original: $3.07
-65%$3.07
$1.07Product Information
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Shipping & Returns
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Description
Author: Sanjeev
Brand: RADHA KRISHNA PRAKASAN PVT LTD
Binding: paperback
Number Of Pages: 240
Release Date: 21-01-2023
Details: क्या जीवन आकाश चम्पा है? दो-दो बार वसन्त आता है इसमें, दो-दो बार खिलती हैं आकाश चम्पा की कलियाँ–जिन्दगी की तरह। एक बार जो जीवन जिया उसमें कितना कुछ जीने से रह गया, जिस-जिस मोड़ पर मुड़ना था, नहीं मुड़े, जहाँ पलटकर पीछे देखना था नहीं देखे, जहाँ ठहरना था, नहीं ठहरे। सो, आकाश चम्पा उन भूलों को सुधारती है, पहली बार जिन डालों में फूल नहीं आये होते, दूसरी बार उन डालों पर भी फूल खिलते हैं। गहन अनुभूतियों की बारीक बुनावट से रचा गया संजीव का यह नवीनतम उपन्यास मनुष्य की इस आदिम आकांक्षा का ऐसा मार्मिक आख्यान है, जिसमें व्यक्ति-जीवन के कोण से इतिहास, नियति, रिश्ते और संघर्ष के उन तमाम सवालों की पड़ताल की गई है, जो हमारे समय के विमर्श के केन्द्र में हैं। इन अर्थों में यह उपन्यास महज आख्यान नहीं रह जाता, बल्कि अपने समय से एक दुर्धर्ष टकराहट के रूप में पृष्ठ-दर-पृष्ठ ध्वनित होता है। संजीव ने इस उपन्यास में अपने दिक्काल का ऐसा निर्मम विवर्तन किया है, जिसे अन्यत्र देख पाना कठिन है। विवर्तन की प्रक्रिया में लेखक की नजर निरन्तर इतिहास के अन्दर विलम्बित और निलम्बित पड़े सवालों और इतिहास के बाहर छूटे हुए लोगों तक जाती है। सामाजिक अवक्षय ने भले ही मनुष्य को हताश कर दिया हो, पर इस स्थिति में भी उसके हृदय के कोने में यह आकांक्षा अपनी पंखुड़ियाँ खोलने से नहीं चूकती कि क्या भूलों का फिर से संशोधन हो सकता है? इस तरह संजीव नियति नहीं नियन्ता की कथा कहते हैं, उस नियन्ता मनुष्य की जिसने अपनी जिजीविषा को आत्मसंघर्ष की ताकत से मूर्त किया है और अपने मुक्तिस्वप्न को एक ही जीवन में दो बार सम्भव किया है। उपन्यास की आनुषंगिक उपलब्धि है एक वर्जित पर मार्मिक प्रेम प्रसंग, जिसकी स्निग्धता और सुरभि उपन्यास में एक नया आयाम जोड़ती है।
EAN: 9788189914783
Package Dimensions: 11.0 x 8.7 x 2.0 inches
Languages: Hindi


















