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Aatma Ki Aankhein : Dinkar Granthmala

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Aatma Ki Aankhein : Dinkar Granthmala

Author: Ramdhari Singh Dinkar

Brand: Rajkamal Prakashan

Edition: 3

Binding: hardcover

Number Of Pages: 160

Release Date: 01-12-2019

Part Number: Refer to Sapnet.

Details: आत्मा की आँखें' में संकलित हैं डी. एच. लारेंस की वे कविताएँ जो यूरोप और अमेरिका में बहुत लोकप्रिय नहीं हो सकीं, लेकिन दिनकर जी ने उन्हें चयनित कर अपनी सहज भाषा-शैली में इस तरह अनुवाद किया कि नितान्त मौलिक प्रतीत होती हैं। डी.एच. लारेंस की कविताओं के अनुवाद के पीछे जो मुख्य बातें थीं, उनके बारे में खुद दिनकर जी का कहना है कि, ‘इन सभी कविताओं की भाषा बुनियादी हिन्दी है। लारेंस की जिन कविताओं पर ये कविताएँ तैयार हुई हैं, उनकी भाषा भी मुझे बुनियादी अंग्रेजी के समान दिखाई पड़ी–सरल, मुहावरेदार, चलतू और पुरजोर जिसमें बनावट का नाम भी नहीं है। कविताओं की भाषा गढ़ने के लिए लारेंस छेनी और हथौड़ी का प्रयोग नहीं करते थे। जैसे जिन्दगी वे उसे मानते थे जो हमारी सभ्यतावाली पोशाक के भीतर बहती है। उसी तरह, भाषा उन्हें वह पसन्द थी जो बोलचाल से उछलकर कलम पर आ बैठती है। बुद्धि को वे बराबर शंका से देखते रहे और कला में पच्चीकारी का काम उन्हें नापसन्द था। मैंने खासकर उन्हीं कविताओं को चुना है जो भारतीय चेतना के काफी आस-पास चक्कर काटती हैं।’ इस तरह देखें तो ‘आत्मा की आँखें’ नए आस्वाद और सहज सम्प्रेष्य कविताओं का एक अनूठा संकलन है।

EAN: 9789389243901

Package Dimensions: 8.1 x 5.4 x 0.7 inches

Languages: Hindi

$1.45

Original: $4.14

-65%
Aatma Ki Aankhein : Dinkar Granthmala

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Description

Author: Ramdhari Singh Dinkar

Brand: Rajkamal Prakashan

Edition: 3

Binding: hardcover

Number Of Pages: 160

Release Date: 01-12-2019

Part Number: Refer to Sapnet.

Details: आत्मा की आँखें' में संकलित हैं डी. एच. लारेंस की वे कविताएँ जो यूरोप और अमेरिका में बहुत लोकप्रिय नहीं हो सकीं, लेकिन दिनकर जी ने उन्हें चयनित कर अपनी सहज भाषा-शैली में इस तरह अनुवाद किया कि नितान्त मौलिक प्रतीत होती हैं। डी.एच. लारेंस की कविताओं के अनुवाद के पीछे जो मुख्य बातें थीं, उनके बारे में खुद दिनकर जी का कहना है कि, ‘इन सभी कविताओं की भाषा बुनियादी हिन्दी है। लारेंस की जिन कविताओं पर ये कविताएँ तैयार हुई हैं, उनकी भाषा भी मुझे बुनियादी अंग्रेजी के समान दिखाई पड़ी–सरल, मुहावरेदार, चलतू और पुरजोर जिसमें बनावट का नाम भी नहीं है। कविताओं की भाषा गढ़ने के लिए लारेंस छेनी और हथौड़ी का प्रयोग नहीं करते थे। जैसे जिन्दगी वे उसे मानते थे जो हमारी सभ्यतावाली पोशाक के भीतर बहती है। उसी तरह, भाषा उन्हें वह पसन्द थी जो बोलचाल से उछलकर कलम पर आ बैठती है। बुद्धि को वे बराबर शंका से देखते रहे और कला में पच्चीकारी का काम उन्हें नापसन्द था। मैंने खासकर उन्हीं कविताओं को चुना है जो भारतीय चेतना के काफी आस-पास चक्कर काटती हैं।’ इस तरह देखें तो ‘आत्मा की आँखें’ नए आस्वाद और सहज सम्प्रेष्य कविताओं का एक अनूठा संकलन है।

EAN: 9789389243901

Package Dimensions: 8.1 x 5.4 x 0.7 inches

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