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Akbar

Author: Shazi Zaman

Brand: Rajkamal Prakashan

Binding: hardcover

Number Of Pages: 368

Release Date: 26-12-2016

Part Number: Refer to Sapnet.

Details: अकबर' उपन्यास शाज़ी ज़माँ ने कल्पना के बूते नहीं, बाज़ार से दरबार तक के ऐतिहासिक प्रमाण के आधार पर रचा है। बादशाह अकबर और उनके समकालीन के दिल, दिमाग़ और दीन को समझने के लिए और उस दौर के दुनियावी और वैचारिक संघर्ष की तह तक जाने के लिए लेखक ने कोलकाता के इंडियन म्यूज़ियम से लेकर लंदन के विक्टोरिया ऐल्बर्ट तक बेशुमार संग्रहालयों में मौजूद अकबर की या अकबर द्वारा बनवायी गयी तस्वीरों पर ग़ौर किया, बादशाह और उनके क़रीबी लोगों की इमारतों का मुआयना किया और 'अकबरनामा’ से लेकर ‘मुन्तख़बुत्तवारीख़’, 'बाबरनामा’, ‘हुमायूंनामा' और 'तज़्किरातुल वाक़यात' जैसी किताबों का और जैन और वैष्णव संतों और ईसाई पादरियों की लेखनी का अध्ययन किया। इस तरह बनी और बुनी दास्तान में एक विशाल सल्तनत और विराट व्यक्तित्व के मालिक की जद्दोजहद दर्ज है। ये वो शख़्सियत थी जिसमें हर धर्म को अक़्ल की कसौटी पर आँकने के साथ साथ धर्म से लोहा लेने की भी हिम्मत थी। इसीलिए तो इस शक्तिशाली बादशाह की मौत पर आगरा के दरबार में मौजूद एक ईसाई पादरी ने कहा : "ना किसी को पता किस दीन में जिए, ना किसी को पता किस दीन में मरे।“.

EAN: 9788126729524

Package Dimensions: 8.7 x 5.7 x 1.1 inches

Languages: Hindi

$2.03

Original: $5.80

-65%
Akbar

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Description

Author: Shazi Zaman

Brand: Rajkamal Prakashan

Binding: hardcover

Number Of Pages: 368

Release Date: 26-12-2016

Part Number: Refer to Sapnet.

Details: अकबर' उपन्यास शाज़ी ज़माँ ने कल्पना के बूते नहीं, बाज़ार से दरबार तक के ऐतिहासिक प्रमाण के आधार पर रचा है। बादशाह अकबर और उनके समकालीन के दिल, दिमाग़ और दीन को समझने के लिए और उस दौर के दुनियावी और वैचारिक संघर्ष की तह तक जाने के लिए लेखक ने कोलकाता के इंडियन म्यूज़ियम से लेकर लंदन के विक्टोरिया ऐल्बर्ट तक बेशुमार संग्रहालयों में मौजूद अकबर की या अकबर द्वारा बनवायी गयी तस्वीरों पर ग़ौर किया, बादशाह और उनके क़रीबी लोगों की इमारतों का मुआयना किया और 'अकबरनामा’ से लेकर ‘मुन्तख़बुत्तवारीख़’, 'बाबरनामा’, ‘हुमायूंनामा' और 'तज़्किरातुल वाक़यात' जैसी किताबों का और जैन और वैष्णव संतों और ईसाई पादरियों की लेखनी का अध्ययन किया। इस तरह बनी और बुनी दास्तान में एक विशाल सल्तनत और विराट व्यक्तित्व के मालिक की जद्दोजहद दर्ज है। ये वो शख़्सियत थी जिसमें हर धर्म को अक़्ल की कसौटी पर आँकने के साथ साथ धर्म से लोहा लेने की भी हिम्मत थी। इसीलिए तो इस शक्तिशाली बादशाह की मौत पर आगरा के दरबार में मौजूद एक ईसाई पादरी ने कहा : "ना किसी को पता किस दीन में जिए, ना किसी को पता किस दीन में मरे।“.

EAN: 9788126729524

Package Dimensions: 8.7 x 5.7 x 1.1 inches

Languages: Hindi

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