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Andolan Kai Geet [Paperback] Abhay Pratap

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Andolan Kai Geet [Paperback] Abhay Pratap

Author: Abhay Pratap

Edition: Ist

Features:

  • Abhay Pratab अभय प्रताप Aandolan kai Geet आंदोलन के गीत Anuugya Books, Anugya Books, अनुज्ञा बूुक्स

Binding: paperback

Number Of Pages: 152

Release Date: 01-12-2019

Part Number: B07QLRWWN4

Details: गत सदी के अंतिम दशक में बाजारवादी आक्रमण, डंकल प्रस्ताव, विश्व बैंक व मुद्रा कोष, अमरीका आदि के नव औपनिवेशिक दबावों के कारण देश के कोने-कोने से छोटे-छोटे स्तर पर आवाजें उठनी शुरू हुईं। भले ही ये आवाजें नक्कारखाने में तूती की तरह लगती थीं लेकिन इनमें अंतर्निहित चिंता या छटपटाहट इतनी जायज थी और उसका आधार इतना ठोस था कि साहित्य का उस रंग में रंगना स्वाभाविक था। हमेशा से राष्ट्रीय मूल्यों व आदर्शों की चिंता रखने वाला रचनाकारों का वर्ग धीरे-धीरे नए तेवर ग्रहण करने लगा। जीवट अपना संस्कार, जो मरा नहीं लाफानी है, अभी हिन्द के मेरुदण्ड में, ताकत शेष जवानी है, गढ़ना है इतिहास अभी तो, लिखनी नई कहानी है, अहंकार के शब्द नहीं ये, स्वाभिमान की बानी है, कतरा-कतरा लहू का देकर, हमने इसे सँवारा है। आखिर हिन्द हमारा है... –प्रेम प्रकाश ‘गुलशन’

Package Dimensions: 9.0 x 6.0 x 0.5 inches

Languages: Hindi

$1.18
Andolan Kai Geet [Paperback] Abhay Pratap
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Description

Author: Abhay Pratap

Edition: Ist

Features:

  • Abhay Pratab अभय प्रताप Aandolan kai Geet आंदोलन के गीत Anuugya Books, Anugya Books, अनुज्ञा बूुक्स

Binding: paperback

Number Of Pages: 152

Release Date: 01-12-2019

Part Number: B07QLRWWN4

Details: गत सदी के अंतिम दशक में बाजारवादी आक्रमण, डंकल प्रस्ताव, विश्व बैंक व मुद्रा कोष, अमरीका आदि के नव औपनिवेशिक दबावों के कारण देश के कोने-कोने से छोटे-छोटे स्तर पर आवाजें उठनी शुरू हुईं। भले ही ये आवाजें नक्कारखाने में तूती की तरह लगती थीं लेकिन इनमें अंतर्निहित चिंता या छटपटाहट इतनी जायज थी और उसका आधार इतना ठोस था कि साहित्य का उस रंग में रंगना स्वाभाविक था। हमेशा से राष्ट्रीय मूल्यों व आदर्शों की चिंता रखने वाला रचनाकारों का वर्ग धीरे-धीरे नए तेवर ग्रहण करने लगा। जीवट अपना संस्कार, जो मरा नहीं लाफानी है, अभी हिन्द के मेरुदण्ड में, ताकत शेष जवानी है, गढ़ना है इतिहास अभी तो, लिखनी नई कहानी है, अहंकार के शब्द नहीं ये, स्वाभिमान की बानी है, कतरा-कतरा लहू का देकर, हमने इसे सँवारा है। आखिर हिन्द हमारा है... –प्रेम प्रकाश ‘गुलशन’

Package Dimensions: 9.0 x 6.0 x 0.5 inches

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