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ATH --- SAHITYA : PATH AUR PRASANG | ?????????? : ??? ?? ?????? by Rajiv Ranjan Giri [Paperback] RAJIV RANJAN GIRI [Paperback] RAJIV RANJAN GIRI

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ATH --- SAHITYA : PATH AUR PRASANG | ?????????? : ??? ?? ?????? by Rajiv Ranjan Giri [Paperback] RAJIV RANJAN GIRI [Paperback] RAJIV RANJAN GIRI

Author: RAJIV RANJAN GIRI

Brand: Anuugya

Edition: First Edition

Features:


  • Bhikari Thakur

  • Language Published: Hindi

Binding: paperback

Number Of Pages: 391

Release Date: 01-12-2016

Details: इस पुस्तक से लेखक की आलोचना की व्यापकता का पता चलता है— अनीश अंकुर, पाखी विचार-विमर्श, शोध, समीक्षा, टिप्पणी और पिछले एक दशक में सर्जनात्मकता के स्तर पर हुयी पहल की विद्वतापूर्ण बौद्धिक पड़ताल— रणजीत यादव, हंस विषय की विविधता, व्यापकता, भाषा और शैली के आधार पर महत्वपूर्ण संकलन— ब्रजकिशोर झा, राष्ट्रीय सहारा भक्ति आंदोलन से लेकर समकालीन हिंदी साहित्य पर विश्लेषणपरक नजर— हिंदुस्तान सुंदर विचारों के लिए श्रम— आउटलुक एक आलोचक के निर्माण का मुकम्मल साक्ष्य। उनकी आलोचकीय प्रतिश्रुति— पुस्तक वार्ता विविध आयामी अर्थवत्ता के कारण एक सृजनात्मक परखधर्मी साहित्यिक हस्तक्षेप— समालोचन नए विमर्शों का वस्तुपरक मूल्यांकन— हमरंग.कॉम पठनीय और संग्रहणीय। साहित्य को बहुआयामी कोण से देखने, समझने और सोचने हेतु सहायक— आजकल लेखक ने गम्भीर चिंतन-मनन की क्षमता अर्जित की है— प्रो. रेवती रमण, किताब अपने वैविध्य विस्तार में लेखक ने ऐसेे कई पक्षों की ओर ध्यान आकृष्ट किया है— प्रो. कर्मेन्दु शिशिर, सबलोग लेखक संगठनों और साहित्यिक विमर्शों को प्रत्यक्ष सामाजिक परिप्रेक्ष्य में रखकर देखने की कोशिश— धर्मेन्द्र सुशांत, पुस्तक संस्कृति लेखक के अध्ययन की गहराई, वैचारिक प्रौढ़ता; समय, समाज और संस्कृति की समझ का पता चलता है— सुनील कुमार पाठक, जनसत्ता समाज और संस्कृति की पुरानी-नयी धारणाओं तथा प्रवृतियों का लेखा-जोखा— डॉ. नामदेव, प्रगतिशील वसुधा वैविध्यपूर्ण सामग्री, विविध विषयों पर, विचारपूर्ण लेखों की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण, पठनीय एवं संग्रहणीय पुस्तक — अनुपमा शर्मा, परिकथा हिंदी साहित्य को समग्र रूप से एक नए आलोचनात्मक एवं समीक्षात्मक दृष्टिकोण से देखने के लिए एक जरूरी किताब। — अमलेश प्रसाद, युद्धरत आम आदमी

EAN: 9789383962747

Package Dimensions: 8.5 x 5.6 x 1.0 inches

Languages: Hindi

$2.60
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Description

Author: RAJIV RANJAN GIRI

Brand: Anuugya

Edition: First Edition

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  • Bhikari Thakur

  • Language Published: Hindi

Binding: paperback

Number Of Pages: 391

Release Date: 01-12-2016

Details: इस पुस्तक से लेखक की आलोचना की व्यापकता का पता चलता है— अनीश अंकुर, पाखी विचार-विमर्श, शोध, समीक्षा, टिप्पणी और पिछले एक दशक में सर्जनात्मकता के स्तर पर हुयी पहल की विद्वतापूर्ण बौद्धिक पड़ताल— रणजीत यादव, हंस विषय की विविधता, व्यापकता, भाषा और शैली के आधार पर महत्वपूर्ण संकलन— ब्रजकिशोर झा, राष्ट्रीय सहारा भक्ति आंदोलन से लेकर समकालीन हिंदी साहित्य पर विश्लेषणपरक नजर— हिंदुस्तान सुंदर विचारों के लिए श्रम— आउटलुक एक आलोचक के निर्माण का मुकम्मल साक्ष्य। उनकी आलोचकीय प्रतिश्रुति— पुस्तक वार्ता विविध आयामी अर्थवत्ता के कारण एक सृजनात्मक परखधर्मी साहित्यिक हस्तक्षेप— समालोचन नए विमर्शों का वस्तुपरक मूल्यांकन— हमरंग.कॉम पठनीय और संग्रहणीय। साहित्य को बहुआयामी कोण से देखने, समझने और सोचने हेतु सहायक— आजकल लेखक ने गम्भीर चिंतन-मनन की क्षमता अर्जित की है— प्रो. रेवती रमण, किताब अपने वैविध्य विस्तार में लेखक ने ऐसेे कई पक्षों की ओर ध्यान आकृष्ट किया है— प्रो. कर्मेन्दु शिशिर, सबलोग लेखक संगठनों और साहित्यिक विमर्शों को प्रत्यक्ष सामाजिक परिप्रेक्ष्य में रखकर देखने की कोशिश— धर्मेन्द्र सुशांत, पुस्तक संस्कृति लेखक के अध्ययन की गहराई, वैचारिक प्रौढ़ता; समय, समाज और संस्कृति की समझ का पता चलता है— सुनील कुमार पाठक, जनसत्ता समाज और संस्कृति की पुरानी-नयी धारणाओं तथा प्रवृतियों का लेखा-जोखा— डॉ. नामदेव, प्रगतिशील वसुधा वैविध्यपूर्ण सामग्री, विविध विषयों पर, विचारपूर्ण लेखों की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण, पठनीय एवं संग्रहणीय पुस्तक — अनुपमा शर्मा, परिकथा हिंदी साहित्य को समग्र रूप से एक नए आलोचनात्मक एवं समीक्षात्मक दृष्टिकोण से देखने के लिए एक जरूरी किताब। — अमलेश प्रसाद, युद्धरत आम आदमी

EAN: 9789383962747

Package Dimensions: 8.5 x 5.6 x 1.0 inches

Languages: Hindi

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