
BHAKTIKAVYA : PUNARPAATH | ?????????? : ???????? by ??????? [Paperback] Prof. DAYASHANKAR
Author: Prof. DAYASHANKAR
Brand: Anuugya
Edition: Ist
Features:
- हिन्दी की पहली आवाज़ : अमीर खुसरो, विद्यापति की राधा : एक पुनर्विचार, डॉ. पीताम्बरदत्त बड़थ्वाल का निर्गुण मत और कबीर
- कबीर-काव्य के मर्मी आलोचक : पं. हजारीप्रसाद द्विवेदी, 'अकथ कहानी प्रेम की' : कथ-अकथ, कबीर-काव्य की आलोचना का धर्मवीरी दर्पण
- साँवरिया की मीरा और मीरा के साँवरिया, सूरसागर : गृहस्थ जीवन और बालविकास, तुलसी के पात्र : कुछ उधेड़बुन
- हिन्दी में रामकथा : विशेष सन्दर्भ – तुलसीदास, भक्तिसाहित्य और उपेक्षित समाज
- डॉ. शिवकुमार मिश्र का भक्ति आन्दोलन और भक्तिकाव्य सम्बन्धी मूल्यांकन, हिन्दी साहित्य को गुजरात की देन का प्रश्न
Binding: paperback
Number Of Pages: 272
Release Date: 01-12-2016
Details: 'भक्तिकाव्य : पुनर्पाठ' पुस्तक का आलेखन किसी एक सुनिश्चित आयोजन का हिस्सा नहीं है। इसी प्रकार 'तुलसी के पात्र : कुछ उधेड़बुन', 'सूरसागर : गृहस्थजीवन और बालविकास' आलेखों की निर्मिति एम.ए. हिन्दी के विद्यार्थियों को पढ़ाने के सिलसिले में हुई। अमीर खुसरो, पुरुषोत्तम अग्रवाल और धर्मवीर की कबीर-काव्य सम्बन्धी आलोचना वाले आलेखों को तैयार करने में दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय और गोवा विश्वविद्यालय की पुनर्बोधन पाठ्यचर्या की मुख्य भूमिका रही है। पुस्तक के छह आलेख– हजारीप्रसाद द्विवेदी की कबीर-आलोचना, सँवरिया की मीरा..., हिन्दी में रामकथा..., भक्ति साहित्य और उपेक्षित समाज, डॉ. शिवकुमार मिश्र का भक्ति आन्दोलन और भक्तिकाव्य सम्बन्धी मूल्यांकन और हिन्दी साहित्य को गुजरात की देन का प्रश्न? गुजरात के विभिन्न सरकारी महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, गैर-सरकारी संस्थाओं की राज्य स्तरीय, राष्ट्रीय संगोष्ठियों में पढऩे के लिए तैयार किये गये थे जो अब इस पुस्तक में शामिल कर लिये गये हैं। इक्कीसवीं शताब्दी में कबीर काव्य की आलोचना की बाढ़ में, नाम-अनाम के साथ उपयोग किये जाने के बावजूद, निर्गुण सम्प्रदाय और कबीर पर पीताम्बरदत्त बड़थ्वाल के अवदान को उचित स्थान नहीं मिला। अत: मैंने बड़थ्वाल जी के इस अवदान पर लिखना बहुत आवश्यक समझा। 'भक्तिकाव्य : पुनर्पाठ' के कई आलेख कबीर से सम्बन्धित हैं, कारण कि हाल के वर्षों में भक्तिकाव्य की आलोचना के केन्द्र में कबीर-काव्य का विमर्श रहा है। इसलिए कबीर काव्य की आलोचना के नये मौसम का साफ-साफ असर इस पुस्तक पर है। इस पुस्तक में भक्तिकाव्य के अग्रज आलोचकों की आवाज तो है ही, लेकिन उनकी आवाजों के बीच, बिना किसी आतंक के, मेरी अपनी आवाज बहुत स्पष्ट है।
EAN: 9789383962488
Package Dimensions: 8.5 x 5.6 x 0.7 inches
Languages: Hindi, English
Original: $2.31
-65%$2.31
$0.81Product Information
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Shipping & Returns
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Description
Author: Prof. DAYASHANKAR
Brand: Anuugya
Edition: Ist
Features:
- हिन्दी की पहली आवाज़ : अमीर खुसरो, विद्यापति की राधा : एक पुनर्विचार, डॉ. पीताम्बरदत्त बड़थ्वाल का निर्गुण मत और कबीर
- कबीर-काव्य के मर्मी आलोचक : पं. हजारीप्रसाद द्विवेदी, 'अकथ कहानी प्रेम की' : कथ-अकथ, कबीर-काव्य की आलोचना का धर्मवीरी दर्पण
- साँवरिया की मीरा और मीरा के साँवरिया, सूरसागर : गृहस्थ जीवन और बालविकास, तुलसी के पात्र : कुछ उधेड़बुन
- हिन्दी में रामकथा : विशेष सन्दर्भ – तुलसीदास, भक्तिसाहित्य और उपेक्षित समाज
- डॉ. शिवकुमार मिश्र का भक्ति आन्दोलन और भक्तिकाव्य सम्बन्धी मूल्यांकन, हिन्दी साहित्य को गुजरात की देन का प्रश्न
Binding: paperback
Number Of Pages: 272
Release Date: 01-12-2016
Details: 'भक्तिकाव्य : पुनर्पाठ' पुस्तक का आलेखन किसी एक सुनिश्चित आयोजन का हिस्सा नहीं है। इसी प्रकार 'तुलसी के पात्र : कुछ उधेड़बुन', 'सूरसागर : गृहस्थजीवन और बालविकास' आलेखों की निर्मिति एम.ए. हिन्दी के विद्यार्थियों को पढ़ाने के सिलसिले में हुई। अमीर खुसरो, पुरुषोत्तम अग्रवाल और धर्मवीर की कबीर-काव्य सम्बन्धी आलोचना वाले आलेखों को तैयार करने में दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय और गोवा विश्वविद्यालय की पुनर्बोधन पाठ्यचर्या की मुख्य भूमिका रही है। पुस्तक के छह आलेख– हजारीप्रसाद द्विवेदी की कबीर-आलोचना, सँवरिया की मीरा..., हिन्दी में रामकथा..., भक्ति साहित्य और उपेक्षित समाज, डॉ. शिवकुमार मिश्र का भक्ति आन्दोलन और भक्तिकाव्य सम्बन्धी मूल्यांकन और हिन्दी साहित्य को गुजरात की देन का प्रश्न? गुजरात के विभिन्न सरकारी महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, गैर-सरकारी संस्थाओं की राज्य स्तरीय, राष्ट्रीय संगोष्ठियों में पढऩे के लिए तैयार किये गये थे जो अब इस पुस्तक में शामिल कर लिये गये हैं। इक्कीसवीं शताब्दी में कबीर काव्य की आलोचना की बाढ़ में, नाम-अनाम के साथ उपयोग किये जाने के बावजूद, निर्गुण सम्प्रदाय और कबीर पर पीताम्बरदत्त बड़थ्वाल के अवदान को उचित स्थान नहीं मिला। अत: मैंने बड़थ्वाल जी के इस अवदान पर लिखना बहुत आवश्यक समझा। 'भक्तिकाव्य : पुनर्पाठ' के कई आलेख कबीर से सम्बन्धित हैं, कारण कि हाल के वर्षों में भक्तिकाव्य की आलोचना के केन्द्र में कबीर-काव्य का विमर्श रहा है। इसलिए कबीर काव्य की आलोचना के नये मौसम का साफ-साफ असर इस पुस्तक पर है। इस पुस्तक में भक्तिकाव्य के अग्रज आलोचकों की आवाज तो है ही, लेकिन उनकी आवाजों के बीच, बिना किसी आतंक के, मेरी अपनी आवाज बहुत स्पष्ट है।
EAN: 9789383962488
Package Dimensions: 8.5 x 5.6 x 0.7 inches
Languages: Hindi, English


















