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Bundelkhand : Sanskritik Vaibhav

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Bundelkhand : Sanskritik Vaibhav

Author: RANJNA MISHRA

Brand: Anuugya

Edition: First Edition

Features:

  • बुन्देलखण्ड का स्वर्णिम इतिहास
  • बुन्देलखण्ड की भाषा और साहित्य
  • बुन्देलखण्ड की व्यक्तिगत एवं सामाजिक जीवनचर्या
  • बुन्देलखण्ड की कृषि, औद्योगिक उन्मेषकृषि की प्रधानता
  • बुन्देलखण्ड के सामूहिक उत्सव, संस्कार और त्यौहार व सांस्कृतिक जीवन

Binding: hardcover

Number Of Pages: 223

Release Date: 01-12-2016

Details: प्राचीन बुन्देलखण्ड में साहित्य और कला दोनों ही उन्नत अवस्था में थे। उस समय की प्रचलित भाषा में ब्रज, बुन्देली और कन्नौजी के साथ ही अवधी और बघेली के शब्दों का बाहुल्य था। बुन्देलखण्ड का प्रसिद्ध नगर ओरछा मध्यकाल में साहित्यिक गतिविधियों का प्रसिद्ध केन्द्र रहा है। हिन्दी साहित्य के प्रसिद्ध कवि तुलसी, केशव, लाल, बिहारी, मतिराम, ठाकुर, पद्माकर आदि हिन्दी साहित्य को बुन्देलखण्ड की ही देन हैं। बुन्देली साहित्य में प्रमुख रूप से भक्ति, वीर और शृंगार रसप्रधान रचनायें मिलती हैं। बुन्देलखण्ड में जहाँ एक ओर बखतबली, लाल छत्रसाल जैसे राष्ट्रीय चेतना को जगाने वाले कवि हुए हैं, वहाँ दूसरी ओर अक्षर-अनन्य जैसे कवि भी हैं, जो निर्गुण काव्य के माध्यम से समाज के रूढ़ और आडम्बरपूर्ण स्वरूप को झकझोरते हैं। बुन्देलखण्ड का साहित्यिक परिवेश भी विभिन्न कालों में बदलता रहा है, किन्तु फिर भी बुन्देली साहित्य को देखकर नि:सन्देह कहा जा सकता है कि बुन्देलखण्ड की साहित्यिक, कलात्मक और सांस्कृतिक परम्परायें भारत के अन्य क्षेत्रों से कहीं अधिक समृद्ध और गौरवपूर्ण हैं। – इसी पुस्तक से

EAN: 9789383962402

Package Dimensions: 9.0 x 6.0 x 0.7 inches

Languages: Hindi

$1.10

Original: $3.13

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Bundelkhand : Sanskritik Vaibhav

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Description

Author: RANJNA MISHRA

Brand: Anuugya

Edition: First Edition

Features:

  • बुन्देलखण्ड का स्वर्णिम इतिहास
  • बुन्देलखण्ड की भाषा और साहित्य
  • बुन्देलखण्ड की व्यक्तिगत एवं सामाजिक जीवनचर्या
  • बुन्देलखण्ड की कृषि, औद्योगिक उन्मेषकृषि की प्रधानता
  • बुन्देलखण्ड के सामूहिक उत्सव, संस्कार और त्यौहार व सांस्कृतिक जीवन

Binding: hardcover

Number Of Pages: 223

Release Date: 01-12-2016

Details: प्राचीन बुन्देलखण्ड में साहित्य और कला दोनों ही उन्नत अवस्था में थे। उस समय की प्रचलित भाषा में ब्रज, बुन्देली और कन्नौजी के साथ ही अवधी और बघेली के शब्दों का बाहुल्य था। बुन्देलखण्ड का प्रसिद्ध नगर ओरछा मध्यकाल में साहित्यिक गतिविधियों का प्रसिद्ध केन्द्र रहा है। हिन्दी साहित्य के प्रसिद्ध कवि तुलसी, केशव, लाल, बिहारी, मतिराम, ठाकुर, पद्माकर आदि हिन्दी साहित्य को बुन्देलखण्ड की ही देन हैं। बुन्देली साहित्य में प्रमुख रूप से भक्ति, वीर और शृंगार रसप्रधान रचनायें मिलती हैं। बुन्देलखण्ड में जहाँ एक ओर बखतबली, लाल छत्रसाल जैसे राष्ट्रीय चेतना को जगाने वाले कवि हुए हैं, वहाँ दूसरी ओर अक्षर-अनन्य जैसे कवि भी हैं, जो निर्गुण काव्य के माध्यम से समाज के रूढ़ और आडम्बरपूर्ण स्वरूप को झकझोरते हैं। बुन्देलखण्ड का साहित्यिक परिवेश भी विभिन्न कालों में बदलता रहा है, किन्तु फिर भी बुन्देली साहित्य को देखकर नि:सन्देह कहा जा सकता है कि बुन्देलखण्ड की साहित्यिक, कलात्मक और सांस्कृतिक परम्परायें भारत के अन्य क्षेत्रों से कहीं अधिक समृद्ध और गौरवपूर्ण हैं। – इसी पुस्तक से

EAN: 9789383962402

Package Dimensions: 9.0 x 6.0 x 0.7 inches

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