Chand Se Pani (Kavita Sangrah ) [Paperback] Shiromani Mahto [Paperback] Shiromani Mahto
Author: Shiromani Mahto
Brand: Anuugya Books
Edition: 1
Features:
-
Dalit Poetry, Poetry from Jharkhand -
Language Published:Hindi
Binding: paperback
Number Of Pages: 96
Release Date: 01-12-2018
Part Number: B07DCQX6BL
Details: आम तौर पर कवि इसे कविता का विषय नहीं बनाते– ''कहीं किसी शब्द को/खरोंच न लग जाए/या किसी अनुच्छेद का /रस न निचुड़ जाए/ इतना सतर्क और सचेत/रहता है हरदम-अनुवादक।ÓÓ एक अन्य कविता धरती के इन्द्रधनुष में कवि ने चित्रकार हुसैन के निर्वासन की पीड़ा के जरिए समाज में इन दिनों पसर चुकी असहिष्णुता पर चोट की है। कविता की अन्तिम पंक्तियाँ अपनी मिट्टी से जुदा होने के दंश को मार्मिकता से अभिव्यक्त करती है–''सात रंगों से लबरेज/तुम धरती के हो इन्द्रधनुष/ सात साल भी टिक न सके/भला पूरब को छोडकर/कहीं उगता है इन्द्रधनुष।ÓÓ नानी कविता में एक उम्रदराज पीढ़ी की स्मृतियों और वेदना को उकेरा गया है– झूलने लगी है चमड़ी/जिसमें जीवन झूल रहा झूला जैसे अनूठे बिम्बों से कवि वृद्धावस्था की जीर्णता को कविता में साक्षात् कर देता है। हिजड़े कविता हालाँकि एक डायरेक्ट कविता है लेकिन कवि ने समाज के एक उपेक्षित तबके की वेदना-व्यथा को व्यक्त किया है। हाशिए पर पटक दिये गये इस वर्ग को भले ही नैरेशन के जरिये ही सही, कवि ने मुख्यधारा में लाने की पेशकश की है। बंदरिया कविता का आलोक उसके लोक में है। लोकभाषा के जरिए मदारी और बंदरिया का समूचा खेल कविता में रचा गया है जो अंत में एक स्त्री विमर्श में धटित होता है– ''औरतें तो ज्यादा खुश/वे खिलखिलाकर हँसती है/ देखकर अपने ही दु:ख का स्वांग।ÓÓ पिता की मँूछें में कवि ने परिवार के उस मुखिया की तस्वीर गढी है जो तमाम दायित्वों को ओढ़ता है लेकिन फिर भी कहीं-न-कहीं एकांकी है।
Package Dimensions: 9.0 x 6.0 x 0.5 inches
Languages: Hindi
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Description
Author: Shiromani Mahto
Brand: Anuugya Books
Edition: 1
Features:
-
Dalit Poetry, Poetry from Jharkhand -
Language Published:Hindi
Binding: paperback
Number Of Pages: 96
Release Date: 01-12-2018
Part Number: B07DCQX6BL
Details: आम तौर पर कवि इसे कविता का विषय नहीं बनाते– ''कहीं किसी शब्द को/खरोंच न लग जाए/या किसी अनुच्छेद का /रस न निचुड़ जाए/ इतना सतर्क और सचेत/रहता है हरदम-अनुवादक।ÓÓ एक अन्य कविता धरती के इन्द्रधनुष में कवि ने चित्रकार हुसैन के निर्वासन की पीड़ा के जरिए समाज में इन दिनों पसर चुकी असहिष्णुता पर चोट की है। कविता की अन्तिम पंक्तियाँ अपनी मिट्टी से जुदा होने के दंश को मार्मिकता से अभिव्यक्त करती है–''सात रंगों से लबरेज/तुम धरती के हो इन्द्रधनुष/ सात साल भी टिक न सके/भला पूरब को छोडकर/कहीं उगता है इन्द्रधनुष।ÓÓ नानी कविता में एक उम्रदराज पीढ़ी की स्मृतियों और वेदना को उकेरा गया है– झूलने लगी है चमड़ी/जिसमें जीवन झूल रहा झूला जैसे अनूठे बिम्बों से कवि वृद्धावस्था की जीर्णता को कविता में साक्षात् कर देता है। हिजड़े कविता हालाँकि एक डायरेक्ट कविता है लेकिन कवि ने समाज के एक उपेक्षित तबके की वेदना-व्यथा को व्यक्त किया है। हाशिए पर पटक दिये गये इस वर्ग को भले ही नैरेशन के जरिये ही सही, कवि ने मुख्यधारा में लाने की पेशकश की है। बंदरिया कविता का आलोक उसके लोक में है। लोकभाषा के जरिए मदारी और बंदरिया का समूचा खेल कविता में रचा गया है जो अंत में एक स्त्री विमर्श में धटित होता है– ''औरतें तो ज्यादा खुश/वे खिलखिलाकर हँसती है/ देखकर अपने ही दु:ख का स्वांग।ÓÓ पिता की मँूछें में कवि ने परिवार के उस मुखिया की तस्वीर गढी है जो तमाम दायित्वों को ओढ़ता है लेकिन फिर भी कहीं-न-कहीं एकांकी है।
Package Dimensions: 9.0 x 6.0 x 0.5 inches
Languages: Hindi


















