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CHHATRON SHOOR AUR DHARYASHEEL BANO! | Speech in Marathi by Baba Shaheb Ambedkar | छात्रों शूर और धैर्यशील बनो! - बाबा साहब अम्बेडकर का मराठी में भाषण

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CHHATRON SHOOR AUR DHARYASHEEL BANO! | Speech in Marathi by Baba Shaheb Ambedkar | छात्रों शूर और धैर्यशील बनो! - बाबा साहब अम्बेडकर का मराठी में भाषण

Author: Babashaheb Ambedkar

Brand: Anuugya Books

Edition: Ist

Binding: hardcover

Number Of Pages: 80

Release Date: 01-12-2019

Details: मैं किसी समय युवा था। उस समय के अपने अनुभव है मैं आपको बताना चाहता हूँ। युवकों को चाहिए कि वे सदा अपने सामने उदात्त ध्येय का विचार करें। युवकों ने एक बात ध्यान में रखनी चाहिए कि किसी भी अच्छी वस्तु को सम्पादित करने के लिए तपस्या करनी चाहिए। इसलिए हम लोगों में एक कहावत रूढ़ है 'तपस्या से फल मिलता।Ó कार्य आत्मोन्नति का हो, राष्ट्रोन्नति का, चाहे कोई हो– उसके लिए अखंड प्रयत्न करने चाहिए। मनुष्य को चाहिए कि उस काम के लिए अपने को समर्पित कर दे। मैंने अनेक अर्वाचीन युवक देखे हैं जो पन्द्रह मिनट भी मेज पर लगातार बैठे नहीं रह सकते हैं। उन्हें समय-समय बीड़ी पीनी पड़ती है, चाय पीनी होती है। उसके बिना वे काम नहीं कर सकते। यह उचित नहीं है। कोई व्यक्ति अपनी जन्मजात बुद्धि के आधार पर पराक्रम नहीं कर सकता। दुनिया में निर्बुद्ध लोग बहुत थोड़े निपजते हैं। उसी प्रकार बुद्धि का विकास करना हर एक के बस की बात है। चौबीस घंटों में से लगातार बीस घंटे तक मेज पर बैठकर काम करते आना चाहिए। मैंने अपनी विद्यार्थी दशा में यहाँ और विदेश में भी लगातार बीस घंटे बैठकर काम किया है। जो कोई बुद्धि का प्रभाव बढ़ाना चाहता है, उन्हें श्रम करना चाहिए, तपस्या करनी चाहिए। — डॉ. बाबा साहेब अम्बेडकर

Package Dimensions: 9.0 x 6.0 x 0.5 inches

Languages: Hindi

$1.53
CHHATRON SHOOR AUR DHARYASHEEL BANO! | Speech in Marathi by Baba Shaheb Ambedkar | छात्रों शूर और धैर्यशील बनो! - बाबा साहब अम्बेडकर का मराठी में भाषण
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Description

Author: Babashaheb Ambedkar

Brand: Anuugya Books

Edition: Ist

Binding: hardcover

Number Of Pages: 80

Release Date: 01-12-2019

Details: मैं किसी समय युवा था। उस समय के अपने अनुभव है मैं आपको बताना चाहता हूँ। युवकों को चाहिए कि वे सदा अपने सामने उदात्त ध्येय का विचार करें। युवकों ने एक बात ध्यान में रखनी चाहिए कि किसी भी अच्छी वस्तु को सम्पादित करने के लिए तपस्या करनी चाहिए। इसलिए हम लोगों में एक कहावत रूढ़ है 'तपस्या से फल मिलता।Ó कार्य आत्मोन्नति का हो, राष्ट्रोन्नति का, चाहे कोई हो– उसके लिए अखंड प्रयत्न करने चाहिए। मनुष्य को चाहिए कि उस काम के लिए अपने को समर्पित कर दे। मैंने अनेक अर्वाचीन युवक देखे हैं जो पन्द्रह मिनट भी मेज पर लगातार बैठे नहीं रह सकते हैं। उन्हें समय-समय बीड़ी पीनी पड़ती है, चाय पीनी होती है। उसके बिना वे काम नहीं कर सकते। यह उचित नहीं है। कोई व्यक्ति अपनी जन्मजात बुद्धि के आधार पर पराक्रम नहीं कर सकता। दुनिया में निर्बुद्ध लोग बहुत थोड़े निपजते हैं। उसी प्रकार बुद्धि का विकास करना हर एक के बस की बात है। चौबीस घंटों में से लगातार बीस घंटे तक मेज पर बैठकर काम करते आना चाहिए। मैंने अपनी विद्यार्थी दशा में यहाँ और विदेश में भी लगातार बीस घंटे बैठकर काम किया है। जो कोई बुद्धि का प्रभाव बढ़ाना चाहता है, उन्हें श्रम करना चाहिए, तपस्या करनी चाहिए। — डॉ. बाबा साहेब अम्बेडकर

Package Dimensions: 9.0 x 6.0 x 0.5 inches

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