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चिदविलास (Chidvilas)

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चिदविलास (Chidvilas)

Book Details

  • Publisher: Sultan Chand & Sons
  • ISBN: 9788189091118
  • Edition: 1st Edition
  • Language: Hindi
  • Weight: 0.00g
  • Title Code: NBC

About the Book
यह पुस्तक ‘चिदविलास’ आध्यात्मिक काव्य का एक सुंदर संकलन है, जिसमें जीवन, भक्ति और आत्मबोध के गहन तत्वों को सरल एवं भावपूर्ण शैली में प्रस्तुत किया गया है। इस काव्य-माला में सात प्रमुख शतक शामिल हैं, जो भारतीय आध्यात्मिक परंपरा, सिद्धपीठों की महिमा और गुरु-तत्त्व की महत्ता को उजागर करते हैं।

पहले तीन शतक—विन्ध्यवासिनी, उग्रतारा और नवयोगिवन-सिद्धविद्यापीठ—भारत के महान सिद्धपीठों की दिव्य ऊर्जा और आध्यात्मिक उत्कर्ष का परिचय कराते हैं। ये स्थल तपस्वियों और योगियों की साधना से निर्मित ऐसे ऊर्जा-स्रोत हैं, जो आज भी साधकों को अंतःकरण की शुद्धि और पराभक्ति की ओर प्रेरित करते हैं।

चतुर्थ शतक में ‘श्रीगुरुतत्त्व’ की अद्वैत महिमा का वर्णन है, जो उपनिषदों के “एकमेवाद्वितीयम्” सिद्धांत को स्पष्ट करता है। पंचम शतक में भक्तशिरोमणि ‘महामना हनुमान’ के आदर्श जीवन का प्रेरणादायक चित्रण है। षष्ठम ‘विचार-शत’ जीवनोपयोगी विचारों का संग्रह है, जो पाठक को जीवन यात्रा में मार्गदर्शन प्रदान करता है। सप्तम शतक ‘परम् आश्रय आत्मा’ आत्मज्ञान और आंतरिक शांति की अनुभूति का संदेश देता है।

$3.30
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Description

Book Details

  • Publisher: Sultan Chand & Sons
  • ISBN: 9788189091118
  • Edition: 1st Edition
  • Language: Hindi
  • Weight: 0.00g
  • Title Code: NBC

About the Book
यह पुस्तक ‘चिदविलास’ आध्यात्मिक काव्य का एक सुंदर संकलन है, जिसमें जीवन, भक्ति और आत्मबोध के गहन तत्वों को सरल एवं भावपूर्ण शैली में प्रस्तुत किया गया है। इस काव्य-माला में सात प्रमुख शतक शामिल हैं, जो भारतीय आध्यात्मिक परंपरा, सिद्धपीठों की महिमा और गुरु-तत्त्व की महत्ता को उजागर करते हैं।

पहले तीन शतक—विन्ध्यवासिनी, उग्रतारा और नवयोगिवन-सिद्धविद्यापीठ—भारत के महान सिद्धपीठों की दिव्य ऊर्जा और आध्यात्मिक उत्कर्ष का परिचय कराते हैं। ये स्थल तपस्वियों और योगियों की साधना से निर्मित ऐसे ऊर्जा-स्रोत हैं, जो आज भी साधकों को अंतःकरण की शुद्धि और पराभक्ति की ओर प्रेरित करते हैं।

चतुर्थ शतक में ‘श्रीगुरुतत्त्व’ की अद्वैत महिमा का वर्णन है, जो उपनिषदों के “एकमेवाद्वितीयम्” सिद्धांत को स्पष्ट करता है। पंचम शतक में भक्तशिरोमणि ‘महामना हनुमान’ के आदर्श जीवन का प्रेरणादायक चित्रण है। षष्ठम ‘विचार-शत’ जीवनोपयोगी विचारों का संग्रह है, जो पाठक को जीवन यात्रा में मार्गदर्शन प्रदान करता है। सप्तम शतक ‘परम् आश्रय आत्मा’ आत्मज्ञान और आंतरिक शांति की अनुभूति का संदेश देता है।

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