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Devdaar kai Tung Shikher Sai

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Devdaar kai Tung Shikher Sai

Author: Dr Vijay Sharma

Brand: Anuugya

Edition: Ist

Features:

  • Film Reviews, Criticism of International Films, Reviews of Centenary Films
  • Books by Vijay Sharma, Books of the Reviews of International Movies

Binding: paperback

Number Of Pages: 240

Release Date: 01-12-2017

Part Number: 8193340094

Details: साहिर लुधियानवी, सरदार ाा$फरी तथा राही मासूम राा की तरह कै$फी का जन्म भी एक जमींदार परिवार में हुआ था। पर जिंदगी भर ये सब जमींदारी के कुसंस्कारों से लड़ते रहे। गरीबों, शोषितों, दमितों के पक्ष में खड़े रहे। सांप्रदायिकता के खिला$फ लड़ते रहे, सद्भावना, भाईचारे, कौमी एकता की आवाज उठाते रहे। अपने रचनाकर्म, अपनी निजी जिंदगी, अपने क्रिया-कलापों से ये सदा धर्म निर्पेक्षता की, मानवता की पक्षधरता करते रहे। सत्ता के घिनौने चेहरे को अपनी कृतियों में उघाड़ते रहे। राजनीति के दलालों के मुखौटे हटाकर जनता के सामने उन्हें नंगा करते रहे। जुल्म चाहे देश में हो रहा हो चाहे विदेश में ये चुप न बैठे। लोगों को एकजुट होकर अत्याचार के विरुद्ध लडऩे का इन्होंने आह्वान किया। ये लोग चाहते तो बड़े आराम से अपनी जिंदगी गुजार सकते थे पर भौतिक सुख-साधनों को छोड़कर इन्होंने स्वयं कठिन डगर चुनी। दूसरों के दु:ख से दु:खी ये आाादी के दीवाने 'आवारा सादेÓ करते रहे। चेखव के पितामह एक जमींदार के बँधुआ थे और उन्होंने अपनी और अपने परिवार की स्वतंत्रता 700 रूबल प्रति व्यक्ति के हिसाब से खरीदी थी। हाँ, उनका मालिक जरा दयालु किस्म का था क्योंकि उसने उनके परिवार के छठे सदस्य को घलुए में मुक्त कर दिया था। चेखव के पिता गुलाम के रूप में जन्मे थे पर उन्हें गीत-संगीत का शौक था। उनके बच्चे कलाकार प्रवृति के थे। छ: बच्चों के परिवार में पाँच लड़के थे और चेखव का स्थान तीसरा था। सब भाइयों में कोई-न-कोई गुण था। एक भाई इलैक्ट्रिक बैटरी बना सकता था, एक रेखांकन में कुशल था, एक और भाई जिल्दसाजी में निपुण था। चेखव की रूचि लेखन में थी। पिता का स्वभाव उन दिनों के पिता जैसा कठोर था।

EAN: 9788193340097

Package Dimensions: 9.0 x 6.0 x 0.5 inches

Languages: Hindi

$0.62

Original: $1.77

-65%
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Description

Author: Dr Vijay Sharma

Brand: Anuugya

Edition: Ist

Features:

  • Film Reviews, Criticism of International Films, Reviews of Centenary Films
  • Books by Vijay Sharma, Books of the Reviews of International Movies

Binding: paperback

Number Of Pages: 240

Release Date: 01-12-2017

Part Number: 8193340094

Details: साहिर लुधियानवी, सरदार ाा$फरी तथा राही मासूम राा की तरह कै$फी का जन्म भी एक जमींदार परिवार में हुआ था। पर जिंदगी भर ये सब जमींदारी के कुसंस्कारों से लड़ते रहे। गरीबों, शोषितों, दमितों के पक्ष में खड़े रहे। सांप्रदायिकता के खिला$फ लड़ते रहे, सद्भावना, भाईचारे, कौमी एकता की आवाज उठाते रहे। अपने रचनाकर्म, अपनी निजी जिंदगी, अपने क्रिया-कलापों से ये सदा धर्म निर्पेक्षता की, मानवता की पक्षधरता करते रहे। सत्ता के घिनौने चेहरे को अपनी कृतियों में उघाड़ते रहे। राजनीति के दलालों के मुखौटे हटाकर जनता के सामने उन्हें नंगा करते रहे। जुल्म चाहे देश में हो रहा हो चाहे विदेश में ये चुप न बैठे। लोगों को एकजुट होकर अत्याचार के विरुद्ध लडऩे का इन्होंने आह्वान किया। ये लोग चाहते तो बड़े आराम से अपनी जिंदगी गुजार सकते थे पर भौतिक सुख-साधनों को छोड़कर इन्होंने स्वयं कठिन डगर चुनी। दूसरों के दु:ख से दु:खी ये आाादी के दीवाने 'आवारा सादेÓ करते रहे। चेखव के पितामह एक जमींदार के बँधुआ थे और उन्होंने अपनी और अपने परिवार की स्वतंत्रता 700 रूबल प्रति व्यक्ति के हिसाब से खरीदी थी। हाँ, उनका मालिक जरा दयालु किस्म का था क्योंकि उसने उनके परिवार के छठे सदस्य को घलुए में मुक्त कर दिया था। चेखव के पिता गुलाम के रूप में जन्मे थे पर उन्हें गीत-संगीत का शौक था। उनके बच्चे कलाकार प्रवृति के थे। छ: बच्चों के परिवार में पाँच लड़के थे और चेखव का स्थान तीसरा था। सब भाइयों में कोई-न-कोई गुण था। एक भाई इलैक्ट्रिक बैटरी बना सकता था, एक रेखांकन में कुशल था, एक और भाई जिल्दसाजी में निपुण था। चेखव की रूचि लेखन में थी। पिता का स्वभाव उन दिनों के पिता जैसा कठोर था।

EAN: 9788193340097

Package Dimensions: 9.0 x 6.0 x 0.5 inches

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