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Dhruvdev Mishra " Pashan" ki Kavitaon Me Rajnaitik Chetna

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Dhruvdev Mishra " Pashan" ki Kavitaon Me Rajnaitik Chetna

Author: Niraj Kumar Singh

Brand: Anuugya

Edition: Ist

Features:

  • Criticism Analysis of Poetry of Dhruvdev Mishra Pashan

Binding: paperback

Number Of Pages: 238

Release Date: 01-12-2016

Part Number: 9383962739

Details: ध्रुवदेव मिश्र 'पाषाण' के लम्बे रचनाकाल में हिन्दी कविता ने कई आन्दोलन देखे, झेले। कवि 'पाषाण' के रचनाकाल में आरम्भ में 'नयी कविताÓ का आन्दोलन फल-फूल चुका था, कविता के और भी कुछ छोटे-बड़े आन्दोलन उगने आरम्भ हो गये थे। कुछ ने बहुत लम्बी आयु भी पायी, पर 'पाषाण' जी के यहाँ कविता आन्दोलन की तर्ज पर नहीं चलती। वहाँ प्रमुख है प्रतिबद्धता। प्रतिबद्धता ही उनकी कविता का मूल मन्त्र है। प्रतिबद्धता जनता के प्रति, प्रतिबद्धता जन आन्दोलनों के प्रति, प्रतिबद्धता कविता के उचित कारणों के प्रति। जहाँ तक राजनैतिक विचारधारा का प्रश्न है वह हर कवि की होती है। जो कवि किसी भी प्रकार की राजनीति से स्वयं को अलग घोषित करते हैं, पाया गया है कि वह सबसे बड़े राजनीतिक पैंतरेबाज होते हैं। यूँ भी कविता के आँगन में भावनाएँ ही प्रमुख हैं, हाँ, इन भावनाओं की दिशा ही कविता के कालजयी या आजकल जयी होने का निर्धारण करती है। किसी राजनैतिक आन्दोलन की सफलता या असफलता से किसी कवि की उस राजनैतिक विचारधारा से जुड़ी कविताओं की सफलता या असफलता तय नहीं की जानी चाहिए। कवि की प्रतिश्रुति इस भारत भूखंड की अपराजेय जनता के प्रति है। अपने कवि-कर्म के आरम्भिक दिनों से लेकर आज तक उनकी इस जनसम्बद्धता में कोई अन्तर नहीं आया है। वह अव्याहत है। जनता से कवि की सम्बद्धता अत्यन्त सघन रूप में ही होती है या फिर होती ही नहीं। कवि ध्रुवदेव मिश्र जनता से अत्यन्त सघन एवं सम्बद्ध कवि हैं। चारों ओर फैली विसंगतियों में जन इतिहास जब केवल ग्रन्थों में शोभता हो, ठहर गया हो, 'पाषाण' स्वयं को खोजते हैं। पाषाण के लिए कवि-कर्म कोई व्यापार नहीं है, उसका नाता आदमी से आरम्भ होता है उससे ही जुड़ा रहता है। उनके लिए कविता इसी आदमी को पहचानने का प्रयास है। – प्रो. रूपा गुप्ता, वर्धमान विवि

EAN: 9789383962730

Package Dimensions: 9.0 x 6.0 x 0.5 inches

Languages: Hindi

$0.61

Original: $1.73

-65%
Dhruvdev Mishra " Pashan" ki Kavitaon Me Rajnaitik Chetna

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Description

Author: Niraj Kumar Singh

Brand: Anuugya

Edition: Ist

Features:

  • Criticism Analysis of Poetry of Dhruvdev Mishra Pashan

Binding: paperback

Number Of Pages: 238

Release Date: 01-12-2016

Part Number: 9383962739

Details: ध्रुवदेव मिश्र 'पाषाण' के लम्बे रचनाकाल में हिन्दी कविता ने कई आन्दोलन देखे, झेले। कवि 'पाषाण' के रचनाकाल में आरम्भ में 'नयी कविताÓ का आन्दोलन फल-फूल चुका था, कविता के और भी कुछ छोटे-बड़े आन्दोलन उगने आरम्भ हो गये थे। कुछ ने बहुत लम्बी आयु भी पायी, पर 'पाषाण' जी के यहाँ कविता आन्दोलन की तर्ज पर नहीं चलती। वहाँ प्रमुख है प्रतिबद्धता। प्रतिबद्धता ही उनकी कविता का मूल मन्त्र है। प्रतिबद्धता जनता के प्रति, प्रतिबद्धता जन आन्दोलनों के प्रति, प्रतिबद्धता कविता के उचित कारणों के प्रति। जहाँ तक राजनैतिक विचारधारा का प्रश्न है वह हर कवि की होती है। जो कवि किसी भी प्रकार की राजनीति से स्वयं को अलग घोषित करते हैं, पाया गया है कि वह सबसे बड़े राजनीतिक पैंतरेबाज होते हैं। यूँ भी कविता के आँगन में भावनाएँ ही प्रमुख हैं, हाँ, इन भावनाओं की दिशा ही कविता के कालजयी या आजकल जयी होने का निर्धारण करती है। किसी राजनैतिक आन्दोलन की सफलता या असफलता से किसी कवि की उस राजनैतिक विचारधारा से जुड़ी कविताओं की सफलता या असफलता तय नहीं की जानी चाहिए। कवि की प्रतिश्रुति इस भारत भूखंड की अपराजेय जनता के प्रति है। अपने कवि-कर्म के आरम्भिक दिनों से लेकर आज तक उनकी इस जनसम्बद्धता में कोई अन्तर नहीं आया है। वह अव्याहत है। जनता से कवि की सम्बद्धता अत्यन्त सघन रूप में ही होती है या फिर होती ही नहीं। कवि ध्रुवदेव मिश्र जनता से अत्यन्त सघन एवं सम्बद्ध कवि हैं। चारों ओर फैली विसंगतियों में जन इतिहास जब केवल ग्रन्थों में शोभता हो, ठहर गया हो, 'पाषाण' स्वयं को खोजते हैं। पाषाण के लिए कवि-कर्म कोई व्यापार नहीं है, उसका नाता आदमी से आरम्भ होता है उससे ही जुड़ा रहता है। उनके लिए कविता इसी आदमी को पहचानने का प्रयास है। – प्रो. रूपा गुप्ता, वर्धमान विवि

EAN: 9789383962730

Package Dimensions: 9.0 x 6.0 x 0.5 inches

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