✨ New Arrivals Just Dropped!Explore
HomeStore

Dwandgeet

Product image 1

Dwandgeet

Author: Ramdhari Singh Dinkar

Brand: Rajkamal Prakashan

Binding: hardcover

Number Of Pages: 127

Release Date: 01-01-2009

Details: उनकी राष्ट्रीय चेतना और व्यापक सांस्कृतिक दृष्टि, उनकी वाणी का ओज और काव्यभाषा के तत्वों पर बल, उनका सात्विक मूल्यों का आग्रह उन्हें पारम्परिक रीति से जोड़े रखता है । - अज्ञेय वे अहिन्दीभाषी जनता में भी बहुत लोकप्रिय थे क्योंकि उनका हिन्दी प्रेम दूसरों की अपनी मातृभाषा के प्रति श्रद्धा और प्रेम का विरोधी नहीं, बल्कि प्रेरक था । - हजारीप्रसाद द्विवेदी दिनकर जी ने श्रमसाध्य जीवन जिया । उनकी साहित्य साधना अपूर्व थी । कुछ समय पहले मुझे एक सज्जन ने कलकत्ता से पत्र लिखा कि दिनकर को ज्ञानपीठ पुरस्कार मिलना कितना उपयुक्त है? मैंने उन्हें उत्तर में लिखा था कि- यदि चार ज्ञानपीठ पुरस्कार उन्हें मिलते, तो उनका उचित सम्मान होता गद्य, पद्य, भाषणों और हिन्दी प्रचार के लिए । - हरिवंश राय|

EAN: 9788180313554

Package Dimensions: 8.3 x 5.4 x 0.6 inches

Languages: Hindi

$1.51

Original: $4.31

-65%
Dwandgeet

$4.31

$1.51

Product Information

Shipping & Returns

Description

Author: Ramdhari Singh Dinkar

Brand: Rajkamal Prakashan

Binding: hardcover

Number Of Pages: 127

Release Date: 01-01-2009

Details: उनकी राष्ट्रीय चेतना और व्यापक सांस्कृतिक दृष्टि, उनकी वाणी का ओज और काव्यभाषा के तत्वों पर बल, उनका सात्विक मूल्यों का आग्रह उन्हें पारम्परिक रीति से जोड़े रखता है । - अज्ञेय वे अहिन्दीभाषी जनता में भी बहुत लोकप्रिय थे क्योंकि उनका हिन्दी प्रेम दूसरों की अपनी मातृभाषा के प्रति श्रद्धा और प्रेम का विरोधी नहीं, बल्कि प्रेरक था । - हजारीप्रसाद द्विवेदी दिनकर जी ने श्रमसाध्य जीवन जिया । उनकी साहित्य साधना अपूर्व थी । कुछ समय पहले मुझे एक सज्जन ने कलकत्ता से पत्र लिखा कि दिनकर को ज्ञानपीठ पुरस्कार मिलना कितना उपयुक्त है? मैंने उन्हें उत्तर में लिखा था कि- यदि चार ज्ञानपीठ पुरस्कार उन्हें मिलते, तो उनका उचित सम्मान होता गद्य, पद्य, भाषणों और हिन्दी प्रचार के लिए । - हरिवंश राय|

EAN: 9788180313554

Package Dimensions: 8.3 x 5.4 x 0.6 inches

Languages: Hindi

Dwandgeet | Explore Millions of Books