
Ek Thi Ramrati
Author: Shivani
Brand: RADHA KRISHNA PRAKASAN PVT LTD
Features:
- Book - ek thi ramrati
- Language: hindi
- Binding: paperback
Binding: paperback
Number Of Pages: 128
Release Date: 01-01-2007
Details: कथाकार और उपन्यासकार के रूप में शिवानी की लेखनी ने स्तरीयता और लोकप्रियता की खाई को पाटते हुए एक नई जमीन बनाई थी जहाँ हर वर्ग और हर रुचि के पाठक सहज भाव से विचरण कर सकते थे । उन्होंने मानवीय संवेदनाओं और सम्बन्धगत भावनाओं की इतने बारीक और महीन ढंग से पुनर्रचना की कि वे अपने समय में सबसे ज्यादा पड़े जाने वाले लेखकों में एक होकर रहीं । कहानी, उपन्यास के अलावा शिवानी ने संस्मरण और रेखाचित्र आदि विधाओं में भी बराबर लेखन किया । अपने संपर्क में आए व्यक्तियों को उन्होंने करीब से देखा, कभी लेखक की निगाह से तो कभी मनुष्य की निगाह से, और इस तरह उनके भरे-पूरे चित्रों को शब्दों में उकेरा और कलाकृति बना दिया । इस पुस्तक में वाग्देवी का अदूभुत वरदान हे विदेशिनी! हम तुम्हें पहचानते हैं, '.मुरलिया तू कौन गुमान भरी? : जो मिले सुर स्वर-लय नटिनी, के रहीम अब बिरछ करूं, माताहारी? नदी जो मरुस्थल में खो गई, स्वरलय नटिनी, ननिया ने हाय राम. एक थी रामरती, चिरस्थायी शेर वन्दन, दाना मियाँ? मत तोड़ो चटकाय परमतृप्ति जन्मदिन आदि संस्मरण और रेखाचित्र शामिल हैं । आशा है, शिवानी के कथा-साहित्य के पाठकों को उनकी ये रचनाएँ भी पसंद आएँगी ।
EAN: 9788183611572
Package Dimensions: 8.3 x 5.4 x 0.4 inches
Languages: Hindi
Product Information
Product Information
Shipping & Returns
Shipping & Returns
Description
Author: Shivani
Brand: RADHA KRISHNA PRAKASAN PVT LTD
Features:
- Book - ek thi ramrati
- Language: hindi
- Binding: paperback
Binding: paperback
Number Of Pages: 128
Release Date: 01-01-2007
Details: कथाकार और उपन्यासकार के रूप में शिवानी की लेखनी ने स्तरीयता और लोकप्रियता की खाई को पाटते हुए एक नई जमीन बनाई थी जहाँ हर वर्ग और हर रुचि के पाठक सहज भाव से विचरण कर सकते थे । उन्होंने मानवीय संवेदनाओं और सम्बन्धगत भावनाओं की इतने बारीक और महीन ढंग से पुनर्रचना की कि वे अपने समय में सबसे ज्यादा पड़े जाने वाले लेखकों में एक होकर रहीं । कहानी, उपन्यास के अलावा शिवानी ने संस्मरण और रेखाचित्र आदि विधाओं में भी बराबर लेखन किया । अपने संपर्क में आए व्यक्तियों को उन्होंने करीब से देखा, कभी लेखक की निगाह से तो कभी मनुष्य की निगाह से, और इस तरह उनके भरे-पूरे चित्रों को शब्दों में उकेरा और कलाकृति बना दिया । इस पुस्तक में वाग्देवी का अदूभुत वरदान हे विदेशिनी! हम तुम्हें पहचानते हैं, '.मुरलिया तू कौन गुमान भरी? : जो मिले सुर स्वर-लय नटिनी, के रहीम अब बिरछ करूं, माताहारी? नदी जो मरुस्थल में खो गई, स्वरलय नटिनी, ननिया ने हाय राम. एक थी रामरती, चिरस्थायी शेर वन्दन, दाना मियाँ? मत तोड़ो चटकाय परमतृप्ति जन्मदिन आदि संस्मरण और रेखाचित्र शामिल हैं । आशा है, शिवानी के कथा-साहित्य के पाठकों को उनकी ये रचनाएँ भी पसंद आएँगी ।
EAN: 9788183611572
Package Dimensions: 8.3 x 5.4 x 0.4 inches
Languages: Hindi


















