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Farishte Nikale

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Farishte Nikale

Author: Maitreyi Pushpa

Brand: Rajkamal Prakashan

Binding: paperback

Number Of Pages: 252

Release Date: 27-07-2016

Part Number: 8126729023

Details: À¤¹à¤¾à¤¶à¤¿à¤¯à¥‡ का यथार्थ और संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है। इसे जानने पहचानने और शब्द देने के लिए सरोकार सम्पन्न रचनाशीलता की ज़रूरत होती है। कहना न होगा कि मैत्रेयी पुष्पा ऐसी रचनाशीलता का पर्याय बन चुकी हैं। अपने कथा-साहित्य और विमर्श आदि के द्वारा उन्होंने किसान, मजदूर, स्त्री और दलित जीवन की प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष सच्चाइयों को मुखर किया है। 'फरिश्ते निकले' मैत्रेयी पुष्पा का नया उपन्यास है, जिसमें उन्होंने 'बेला बहू' का वृत्तान्त रचा है। यह वृत्तान्त जà¤ÿिल किन्तु कई परतों में बदलते 'ग्रामीण à¤à¤¾à¤°à¤¤' का दस्तावेज बन गया है। बेला बहू के जीवन में जो घà¤ÿनाएँ घà¤ÿती हैं और जिन व्यक्तियों के साथ उसका वाद-विवाद-संवाद होता है उनका मन में उतर जाने वाला वर्णन मैत्रेयी ने किया है। जि़न्दा रहने और आज़ाद रहने के अर्थ को व्यापक अर्थ में समझाती बेला बहू हिन्दी उपन्यास साहित्य के कुछ अविस्मरणीय चरित्रों में गिनी जाएगी, ऐसा विश्वास है। सरल और व्यंजक à¤à¤¾à¤·à¤¾ में रचा गया यह उपन्यास लेखिका की रचनाशीलता का आगे बढ़ा हुआ कदम तो है ही, हिन्दी उपन्यास की नवीनतम उपलब्धि à¤à¥€ है।

EAN: 9788126729029

Package Dimensions: 8.7 x 5.7 x 0.8 inches

Languages: Hindi

$1.06

Original: $3.04

-65%
Farishte Nikale

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Description

Author: Maitreyi Pushpa

Brand: Rajkamal Prakashan

Binding: paperback

Number Of Pages: 252

Release Date: 27-07-2016

Part Number: 8126729023

Details: À¤¹à¤¾à¤¶à¤¿à¤¯à¥‡ का यथार्थ और संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है। इसे जानने पहचानने और शब्द देने के लिए सरोकार सम्पन्न रचनाशीलता की ज़रूरत होती है। कहना न होगा कि मैत्रेयी पुष्पा ऐसी रचनाशीलता का पर्याय बन चुकी हैं। अपने कथा-साहित्य और विमर्श आदि के द्वारा उन्होंने किसान, मजदूर, स्त्री और दलित जीवन की प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष सच्चाइयों को मुखर किया है। 'फरिश्ते निकले' मैत्रेयी पुष्पा का नया उपन्यास है, जिसमें उन्होंने 'बेला बहू' का वृत्तान्त रचा है। यह वृत्तान्त जà¤ÿिल किन्तु कई परतों में बदलते 'ग्रामीण à¤à¤¾à¤°à¤¤' का दस्तावेज बन गया है। बेला बहू के जीवन में जो घà¤ÿनाएँ घà¤ÿती हैं और जिन व्यक्तियों के साथ उसका वाद-विवाद-संवाद होता है उनका मन में उतर जाने वाला वर्णन मैत्रेयी ने किया है। जि़न्दा रहने और आज़ाद रहने के अर्थ को व्यापक अर्थ में समझाती बेला बहू हिन्दी उपन्यास साहित्य के कुछ अविस्मरणीय चरित्रों में गिनी जाएगी, ऐसा विश्वास है। सरल और व्यंजक à¤à¤¾à¤·à¤¾ में रचा गया यह उपन्यास लेखिका की रचनाशीलता का आगे बढ़ा हुआ कदम तो है ही, हिन्दी उपन्यास की नवीनतम उपलब्धि à¤à¥€ है।

EAN: 9788126729029

Package Dimensions: 8.7 x 5.7 x 0.8 inches

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