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Gandhi Ek Asambhav Sambhavna

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Gandhi Ek Asambhav Sambhavna

Author: Sudhir Chandra

Brand: Rajkamal Prakashan

Edition: First Edition

Features:

  • Book: gandhi ek asambhav sambhavna
  • Language: hindi
  • Binding: paperback

Binding: paperback

Number Of Pages: 184

Release Date: 01-12-2016

Part Number: 8126729554

Details: À¤—ांधी: एक असम्à¤à¤µ सम्à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ साल-दर-साल दो बार गांधी को रस्मन याद कर बाक़ी वक़्त उन्हें à¤à¥à¤²à¤¾à¤¯à¥‡ रखने के ऐसे आदी हो गए हैं हम कि उनके साथ हमारा विच्छेद कितना गहरा और पुराना है, इसकी सुध तक हमें नहीं है। एक छोà¤ÿी-सी, पर बड़े मार्के की, बात à¤à¥€ हम à¤à¥‚ले ही रहे हैं। वह यह कि पूरे 32 साल तक गांधी अँगरेज़ी राज के ख़िलाफ़ लड़ते रहे, पर अपने ही आज़ाद देश में वह केवल साढ़े पाँच महीने - 169 दिन - ज़िंदा रह पाए। इतना ही नहीं कि वह ज़िंदा रह न सके, हमने ऐसा कुछ किया कि 125 साल तक ज़िंदा रहने की इच्छा रखने वाले गांधी अपने आख़िरी दिनों में मड़त की कामना करने लगे। अपनी एक ही वर्षगाँठदेखी उन्होंने आज़ाद हिंदुस्तान में। उस दिन शाम को प्रार्थना-सà¤à¤¾ में बोलते हुए उन्होंने कहा: मेरे लिए तो आज मातम मनाने का दिन है। मैं आज तक जिन्दा पड़ा हूं। इस पर मुझको खुद आश्चर्य होता है, शर्म लगती है, मैं वही शख्स हूं कि जिसकी जुबान से एक चीज निकलती थी कि ऐसा करो तो करोड़ों उसको मानते थे। पर आज तो मेरी कोई सुनता ही नहीं है। मैं कहूं कि तुम ऐसा करो, नहीं, ऐसा नहीं करेंगे ऐसा कहते हैं।...À¤à¤¸à¥€ हालत में हिन्दुस्तान में मेरे लिए जगह कहां है और मैं उसमें जिन्दा रहकर क्या करूंगा? À¤†à¤œ मेरे से 125 वर्ष की बात छूà¤ÿ गई है। 100 वर्ष की à¤à¥€ छूà¤ÿ गई है और 90 वर्ष की à¤à¥€à¥¤ आज मैं 79 वर्ष में तो पहुंच जाता हूं, लेकिन वह à¤à¥€ मुझको चुà¤à¤¤à¤¾ है। क्या हुआ कि गांधी चपर उठा लिये जाने की प्रार्थना करने लगे दिन-रात? À¤•ड़न-सी बेचारगी ने घेर लिया उन्हें? À¤•्यों 32 साल के अपने किये-धरे पर उन्हें पानी फिरता नज़र आने लगा? À¤¨à¤¿à¤ªà¤ÿ अकेले पड़ गये वह। गांधी के आख़िरी दिनों को देखने-समझने की कोशिश करती है यह किताब। इस यक़ीन के साथ कि यह देखना-समझना दरअसल अपने आपको और अपने समय को à¤à¥€ देखना-समझना है।

EAN: 9788126729555

Package Dimensions: 8.4 x 5.5 x 0.4 inches

Languages: Hindi

$0.83

Original: $2.36

-65%
Gandhi Ek Asambhav Sambhavna

$2.36

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Description

Author: Sudhir Chandra

Brand: Rajkamal Prakashan

Edition: First Edition

Features:

  • Book: gandhi ek asambhav sambhavna
  • Language: hindi
  • Binding: paperback

Binding: paperback

Number Of Pages: 184

Release Date: 01-12-2016

Part Number: 8126729554

Details: À¤—ांधी: एक असम्à¤à¤µ सम्à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ साल-दर-साल दो बार गांधी को रस्मन याद कर बाक़ी वक़्त उन्हें à¤à¥à¤²à¤¾à¤¯à¥‡ रखने के ऐसे आदी हो गए हैं हम कि उनके साथ हमारा विच्छेद कितना गहरा और पुराना है, इसकी सुध तक हमें नहीं है। एक छोà¤ÿी-सी, पर बड़े मार्के की, बात à¤à¥€ हम à¤à¥‚ले ही रहे हैं। वह यह कि पूरे 32 साल तक गांधी अँगरेज़ी राज के ख़िलाफ़ लड़ते रहे, पर अपने ही आज़ाद देश में वह केवल साढ़े पाँच महीने - 169 दिन - ज़िंदा रह पाए। इतना ही नहीं कि वह ज़िंदा रह न सके, हमने ऐसा कुछ किया कि 125 साल तक ज़िंदा रहने की इच्छा रखने वाले गांधी अपने आख़िरी दिनों में मड़त की कामना करने लगे। अपनी एक ही वर्षगाँठदेखी उन्होंने आज़ाद हिंदुस्तान में। उस दिन शाम को प्रार्थना-सà¤à¤¾ में बोलते हुए उन्होंने कहा: मेरे लिए तो आज मातम मनाने का दिन है। मैं आज तक जिन्दा पड़ा हूं। इस पर मुझको खुद आश्चर्य होता है, शर्म लगती है, मैं वही शख्स हूं कि जिसकी जुबान से एक चीज निकलती थी कि ऐसा करो तो करोड़ों उसको मानते थे। पर आज तो मेरी कोई सुनता ही नहीं है। मैं कहूं कि तुम ऐसा करो, नहीं, ऐसा नहीं करेंगे ऐसा कहते हैं।...À¤à¤¸à¥€ हालत में हिन्दुस्तान में मेरे लिए जगह कहां है और मैं उसमें जिन्दा रहकर क्या करूंगा? À¤†à¤œ मेरे से 125 वर्ष की बात छूà¤ÿ गई है। 100 वर्ष की à¤à¥€ छूà¤ÿ गई है और 90 वर्ष की à¤à¥€à¥¤ आज मैं 79 वर्ष में तो पहुंच जाता हूं, लेकिन वह à¤à¥€ मुझको चुà¤à¤¤à¤¾ है। क्या हुआ कि गांधी चपर उठा लिये जाने की प्रार्थना करने लगे दिन-रात? À¤•ड़न-सी बेचारगी ने घेर लिया उन्हें? À¤•्यों 32 साल के अपने किये-धरे पर उन्हें पानी फिरता नज़र आने लगा? À¤¨à¤¿à¤ªà¤ÿ अकेले पड़ गये वह। गांधी के आख़िरी दिनों को देखने-समझने की कोशिश करती है यह किताब। इस यक़ीन के साथ कि यह देखना-समझना दरअसल अपने आपको और अपने समय को à¤à¥€ देखना-समझना है।

EAN: 9788126729555

Package Dimensions: 8.4 x 5.5 x 0.4 inches

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