
Gautam Buddh Aur Unke Updesh
Author: Anand Shrikrishna
Brand: Rajkamal Prakashan
Edition: First Edition
Binding: paperback
Number Of Pages: 228
Release Date: 01-07-2019
Part Number: 8126714239
Details: इस पुस्तक में न सिर्फ भगवान बुद्ध के जीवन की झलकियाँ, उनके विचार व जीवमात्र के प्रति उनकी करुणा का वर्णन है, बल्कि लेखक ने भगवान बुद्ध के बारे में गहन अध्ययन के पश्चात अपने मौलिक विचारों और कई तथ्यों से भी पाठकों को अवगत कराया है। पुस्तक में इन तथ्यों के कई प्रमाण हैं कि दुःख, हिंसा और गरीबी से तड़पते लोगों की समस्याओं के हल के लिए भगवान बुद्ध ने आखिर त्याग पर बल क्यों दिया ! उनका मानना था कि एक प्रसन्न व्यक्ति ही इस जगत को सुखमय बना सकता है। बुद्ध युद्ध के विरोधी थे और उनका मानना था कि युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। पुस्तक में अंगुलिमाल का एक लुटेरे से संत बन जाना, सम्राट बिम्बिसार, सम्राट प्रसेनजित सहित अनेकों राजपुरुषों की ध्वनिधूप दीक्षा और चिंचाया द्वारा बुद्ध के खिलाफ किए गए षड्यंत्र पर भी प्रकाश डाला गया है। वर्तमान युग में बुद्ध के उपदेशों की प्रासंगिकता की विस्तृत विवेचना की गई है। बुद्ध के जीवन, उनके अनुयायियों, उनके विरोधियों, उनकी शिक्षा, उनके उपदेश देने का ढंग, प्रतीत्यसमुत्पाद, विपस्सना, विपस्सना केन्द्रों की जानकारी, बौद्ध साहित्य और बुद्ध से सम्बन्धित तीर्थस्थलों की विस्तृत जानकारी सात अध्यायों में दी गई है। ध्वनिधूप के अनुयायियों के लिए यह पुस्तक पथ- प्रदर्शक का काम करेगी।.
EAN: 9788126714230
Package Dimensions: 8.4 x 5.4 x 0.6 inches
Languages: Hindi, English
Original: $2.63
-65%$2.63
$0.92Product Information
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Shipping & Returns
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Description
Author: Anand Shrikrishna
Brand: Rajkamal Prakashan
Edition: First Edition
Binding: paperback
Number Of Pages: 228
Release Date: 01-07-2019
Part Number: 8126714239
Details: इस पुस्तक में न सिर्फ भगवान बुद्ध के जीवन की झलकियाँ, उनके विचार व जीवमात्र के प्रति उनकी करुणा का वर्णन है, बल्कि लेखक ने भगवान बुद्ध के बारे में गहन अध्ययन के पश्चात अपने मौलिक विचारों और कई तथ्यों से भी पाठकों को अवगत कराया है। पुस्तक में इन तथ्यों के कई प्रमाण हैं कि दुःख, हिंसा और गरीबी से तड़पते लोगों की समस्याओं के हल के लिए भगवान बुद्ध ने आखिर त्याग पर बल क्यों दिया ! उनका मानना था कि एक प्रसन्न व्यक्ति ही इस जगत को सुखमय बना सकता है। बुद्ध युद्ध के विरोधी थे और उनका मानना था कि युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। पुस्तक में अंगुलिमाल का एक लुटेरे से संत बन जाना, सम्राट बिम्बिसार, सम्राट प्रसेनजित सहित अनेकों राजपुरुषों की ध्वनिधूप दीक्षा और चिंचाया द्वारा बुद्ध के खिलाफ किए गए षड्यंत्र पर भी प्रकाश डाला गया है। वर्तमान युग में बुद्ध के उपदेशों की प्रासंगिकता की विस्तृत विवेचना की गई है। बुद्ध के जीवन, उनके अनुयायियों, उनके विरोधियों, उनकी शिक्षा, उनके उपदेश देने का ढंग, प्रतीत्यसमुत्पाद, विपस्सना, विपस्सना केन्द्रों की जानकारी, बौद्ध साहित्य और बुद्ध से सम्बन्धित तीर्थस्थलों की विस्तृत जानकारी सात अध्यायों में दी गई है। ध्वनिधूप के अनुयायियों के लिए यह पुस्तक पथ- प्रदर्शक का काम करेगी।.
EAN: 9788126714230
Package Dimensions: 8.4 x 5.4 x 0.6 inches
Languages: Hindi, English


















