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Guru Nanak Dev Ji : Vyaktitatva aur Vichardhara -- गुरु नानक देव जी :व्यक्तित्व और विचारधारा

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Guru Nanak Dev Ji : Vyaktitatva aur Vichardhara -- गुरु नानक देव जी :व्यक्तित्व और विचारधारा

Author: Ravindra Gasso -- रविन्द्र गासो

Edition: Ist

Binding: perfect

Number Of Pages: 190

Release Date: 01-12-2022

Details: ... बहन नानकी के ससुराल में नवाब के मोदीखाने के कारदार रहे। पत्‍नी का नाम बीबी सुलखनी जी था। बहन का नाम नानकी (गुरु जी की सबसे प्रिय) और जीजा भाई जय राम जी थे। दो पुत्र श्रीचन्द (जन्म 1494 ई.), लखमी चन्द (जन्म 1496 ई.) थे। बड़े पुत्र श्री चन्द उदासीन सम्प्रदाय के संस्थापक हुए लेकिन नानक जी ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी बनाने के योग्य नहीं पाया। गुरु जी ने 25 वर्ष बड़ी यात्राओं (उदासियों) द्वारा बगदाद (ईरान) से लेकर ढाका (बाँग्ला देश) तक काश्मीर से लेकर श्रीलंका तक का भ्रमण किया। सभी धर्मों-मतों के विद्वानों के साथ संवाद किया। अन्तिम 18 वर्ष करतारपुर, रावी नदी के तट पर स्वयं बसाये गाँव में रहे। यहीं पर ‘किरत करो (श्रम करो)– वंड छको (बाँट कर खाओ)– नाम जपो’ के सिद्धान्त पर आधारित सिक्ख-पन्थ का प्रवर्तन किया। लंगर-प्रथा का महान संकल्प संगत और पंगत (पंक्ति में सब बराबर) के सिद्धान्त पर स्थापित किया। करतारपुर में ही अपनी समस्त वाणी को मौखिक से लिखित रूप दिया। 15 अन्य सन्तों की चुनिन्दा रचनाओं को मिलाकर गुरु जी ने अपनी वाणी की ‘पोथी’ बनायी जो द्वितीय गुरु अंगद देव जी को सौंपकर अपनी सोच और विचारधारा को मानवता के कल्याण हेतु सुरक्षित, संरक्षित और सम्पादित करने का ऐतिहासिक कार्य किया। यही वाणी पाँचवें गुरु श्री गुरु अर्जुन देव जी द्वारा ‘श्री गुरु ग्रन्थ साहिब’ में संकलित की गयी अन्य चार गुरुओं व भक्तों की वाणी सहित। फिर दसवें गुरु श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी ने ‘श्री गुरु ग्रन्थ साहिब’ को पुन: सम्पादित कर उसमें गुरु तेग बहादुर जी की वाणी को शामिल किया... ...इसी पुस्तक से...

Package Dimensions: 9.0 x 6.0 x 0.5 inches

Languages: Hindi

$0.68

Original: $1.93

-65%
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Description

Author: Ravindra Gasso -- रविन्द्र गासो

Edition: Ist

Binding: perfect

Number Of Pages: 190

Release Date: 01-12-2022

Details: ... बहन नानकी के ससुराल में नवाब के मोदीखाने के कारदार रहे। पत्‍नी का नाम बीबी सुलखनी जी था। बहन का नाम नानकी (गुरु जी की सबसे प्रिय) और जीजा भाई जय राम जी थे। दो पुत्र श्रीचन्द (जन्म 1494 ई.), लखमी चन्द (जन्म 1496 ई.) थे। बड़े पुत्र श्री चन्द उदासीन सम्प्रदाय के संस्थापक हुए लेकिन नानक जी ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी बनाने के योग्य नहीं पाया। गुरु जी ने 25 वर्ष बड़ी यात्राओं (उदासियों) द्वारा बगदाद (ईरान) से लेकर ढाका (बाँग्ला देश) तक काश्मीर से लेकर श्रीलंका तक का भ्रमण किया। सभी धर्मों-मतों के विद्वानों के साथ संवाद किया। अन्तिम 18 वर्ष करतारपुर, रावी नदी के तट पर स्वयं बसाये गाँव में रहे। यहीं पर ‘किरत करो (श्रम करो)– वंड छको (बाँट कर खाओ)– नाम जपो’ के सिद्धान्त पर आधारित सिक्ख-पन्थ का प्रवर्तन किया। लंगर-प्रथा का महान संकल्प संगत और पंगत (पंक्ति में सब बराबर) के सिद्धान्त पर स्थापित किया। करतारपुर में ही अपनी समस्त वाणी को मौखिक से लिखित रूप दिया। 15 अन्य सन्तों की चुनिन्दा रचनाओं को मिलाकर गुरु जी ने अपनी वाणी की ‘पोथी’ बनायी जो द्वितीय गुरु अंगद देव जी को सौंपकर अपनी सोच और विचारधारा को मानवता के कल्याण हेतु सुरक्षित, संरक्षित और सम्पादित करने का ऐतिहासिक कार्य किया। यही वाणी पाँचवें गुरु श्री गुरु अर्जुन देव जी द्वारा ‘श्री गुरु ग्रन्थ साहिब’ में संकलित की गयी अन्य चार गुरुओं व भक्तों की वाणी सहित। फिर दसवें गुरु श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी ने ‘श्री गुरु ग्रन्थ साहिब’ को पुन: सम्पादित कर उसमें गुरु तेग बहादुर जी की वाणी को शामिल किया... ...इसी पुस्तक से...

Package Dimensions: 9.0 x 6.0 x 0.5 inches

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