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Ham bhi diya jalayenge (Literary Criticism of Urdu Literature) -- हम भी दिया जलायेंगे (उर्दू साहित्य से सम्बन्धित आलोचनात्मक लेख)

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Ham bhi diya jalayenge (Literary Criticism of Urdu Literature) -- हम भी दिया जलायेंगे (उर्दू साहित्य से सम्बन्धित आलोचनात्मक लेख)

Author: S.K. Sabira -- एस.के. साबिरा

Brand: Anuugya Books

Edition: Ist

Binding: paperback

Number Of Pages: 136

Release Date: 01-12-2022

Details: उर्दू साहित्य के कई अलग-अलग विषय-प्रसंगों पर लिखे गये लेखों की यह किताब ‘हम भी दिया जलाएँगे’ वास्तव में इस देश के दो समुदायों, दो भाषाओं और दो संस्कृतियों के बीच एक पुल की हैसियत रखती है। ये लेख भले ही ‘उर्दू जगत’ स्तम्भ के लिए लिखे गये हैं और ‘परिकथा’ में सिलसिलेवार प्रकाशित हुए हैं, तथ्यपरक बुनावट और विवेचन-उपक्रम के स्तर पर ये लेख उँचे स्तर के स्वतंत्र और बौद्धिकतापूर्ण एकेडेमिक लेख हैं। लेखिका डॉ. एस.के. साबिरा प्रतिभा सम्पन्न प्रखर बौद्धिकता से लैस विशिष्ट सामर्थ्य की प्राध्यापिका रही हैं। हिन्दी और उर्दू दोनों भाषाओं के साहित्य पर इनकी गहरी अध्ययनशीलता इन्हें न सिर्फ हिन्दी साहित्य की एक योग्य और कुशल प्राध्यापिका ठहराती है, बल्कि इनके समर्थ आलोचनीय व्यक्तित्व का भी साक्ष्य देती है। सामाजिक साझेपन का सवाल न सिर्फ सामान्य जीवन प्रणाली का सवाल है, बल्कि यह भाषाओं के बीच पहले से चली आ रही रवायत के संरक्षण-संवर्धन का भी सवाल है। डॉ. एस.के. साबिरा मुस्लिम परिवेश से आती हैं, उन्होंने हिन्दी साहित्य के साथ-साथ उर्दू साहित्य में भी एम.ए. किया है लेकिन हिन्दी के प्राध्यापन में खुद को संलग्न किया है। उनका यह वृहत्तर दृष्टिकोण उन्हें विशिष्ठ रूप से सम्मान-योग्य व्यक्तित्व ठहराता है। हिन्दी के लेखक-पाठकों को यह किताब उर्दू साहित्य की जानकारी उपलब्द्ध कराती है और उन्हें सामाजिक-भाषिक साझेपन की सहयात्रा की ओर उन्मुख और अग्रसर करती है। शंकर, संपादक, ‘परिकथा’

EAN: 9789391034252

Package Dimensions: 9.0 x 6.0 x 0.5 inches

Languages: Hindi, English

$1.40
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Author: S.K. Sabira -- एस.के. साबिरा

Brand: Anuugya Books

Edition: Ist

Binding: paperback

Number Of Pages: 136

Release Date: 01-12-2022

Details: उर्दू साहित्य के कई अलग-अलग विषय-प्रसंगों पर लिखे गये लेखों की यह किताब ‘हम भी दिया जलाएँगे’ वास्तव में इस देश के दो समुदायों, दो भाषाओं और दो संस्कृतियों के बीच एक पुल की हैसियत रखती है। ये लेख भले ही ‘उर्दू जगत’ स्तम्भ के लिए लिखे गये हैं और ‘परिकथा’ में सिलसिलेवार प्रकाशित हुए हैं, तथ्यपरक बुनावट और विवेचन-उपक्रम के स्तर पर ये लेख उँचे स्तर के स्वतंत्र और बौद्धिकतापूर्ण एकेडेमिक लेख हैं। लेखिका डॉ. एस.के. साबिरा प्रतिभा सम्पन्न प्रखर बौद्धिकता से लैस विशिष्ट सामर्थ्य की प्राध्यापिका रही हैं। हिन्दी और उर्दू दोनों भाषाओं के साहित्य पर इनकी गहरी अध्ययनशीलता इन्हें न सिर्फ हिन्दी साहित्य की एक योग्य और कुशल प्राध्यापिका ठहराती है, बल्कि इनके समर्थ आलोचनीय व्यक्तित्व का भी साक्ष्य देती है। सामाजिक साझेपन का सवाल न सिर्फ सामान्य जीवन प्रणाली का सवाल है, बल्कि यह भाषाओं के बीच पहले से चली आ रही रवायत के संरक्षण-संवर्धन का भी सवाल है। डॉ. एस.के. साबिरा मुस्लिम परिवेश से आती हैं, उन्होंने हिन्दी साहित्य के साथ-साथ उर्दू साहित्य में भी एम.ए. किया है लेकिन हिन्दी के प्राध्यापन में खुद को संलग्न किया है। उनका यह वृहत्तर दृष्टिकोण उन्हें विशिष्ठ रूप से सम्मान-योग्य व्यक्तित्व ठहराता है। हिन्दी के लेखक-पाठकों को यह किताब उर्दू साहित्य की जानकारी उपलब्द्ध कराती है और उन्हें सामाजिक-भाषिक साझेपन की सहयात्रा की ओर उन्मुख और अग्रसर करती है। शंकर, संपादक, ‘परिकथा’

EAN: 9789391034252

Package Dimensions: 9.0 x 6.0 x 0.5 inches

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