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Hindi Bhasha Sanrachna aur Bhasha Vigyan -- हिन्दी भाषा संरचना और भाषा विज्ञान

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Hindi Bhasha Sanrachna aur Bhasha Vigyan -- हिन्दी भाषा संरचना और भाषा विज्ञान

Author: Ram Prakash, Shyambabu Sharma, Saralata -- राम प्रकाश, श्यामबाबू शर्मा, सरलता

Brand: Anuugya Books

Edition: Ist

Binding: paperback

Number Of Pages: 192

Release Date: 01-12-2022

Details: देश के पहले उप-प्रधानमन्त्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने 23 अक्तूबर, 1949 के अपने सन्देश में लिखा था : 'विधान परिषद् ने राष्‍ट्रभाषा के विषय में निर्णय कर लिया है। इसमें कोई सन्देह नहीं है कि कुछ व्यक्तियों को इस फैसले से दु:ख हुआ। कुछ संस्थानों ने भी इसका विरोध किया है। परन्तु जिस प्रकार और बातों में मतभेद हो सकता है, उसी प्रकार इस विषय में यदि मतभेद है और रहे तो उसमें कोई आश्‍चर्य की बात नहीं है। विधान में कई ऐसी बातें हैं जिनसे सबका सन्तोष होना असम्भव है। परन्तु एक बार यदि विधान में कोई चीज़ शामिल हो जाये तो उसको स्वीकार कर लेना सबका कर्तव्य है, कम-से-कम जब तक कि ऐसी स्थिति पैदा न हो जाये जिसमें सर्वसम्मति से या बहुमत से फिर कोई तब्दीली हो सके। अब जबकि हिन्दी को राष्‍ट्रभाषा की पदवी मिल गयी है (यद्यपि कुछ वर्षों के लिए एक विदेशी भाषा के साथ-साथ उसको यह गौरव प्राप्त हुआ है), हर व्यक्ति का कर्तव्य है कि राष्‍ट्रभाषा की उन्‍नति करे और उसकी सेवा करे जिससे कि सारे भारत में वह बिना किसी संकोच या सन्देह के स्वीकृत हो। हिन्दी का पट महासागर की तरह विस्तृत होना चाहिए जिसमें मिलकर और भाषाएँ अपना बहुमूल्य भाग ले सकें। राष्‍ट्रभाषा न तो किसी प्रान्त की है न किसी जाति की है, वह सारे भारत की भाषा है और उसके लिए यह आवश्यक है कि सारे भारत के लोग उसको समझ सकें और अपनाने का गौरव हासिल कर सकें।’ ...इसी पुस्तक से...

EAN: 9789393580696

Package Dimensions: 9.0 x 6.0 x 0.5 inches

Languages: Hindi, English

$1.62
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Description

Author: Ram Prakash, Shyambabu Sharma, Saralata -- राम प्रकाश, श्यामबाबू शर्मा, सरलता

Brand: Anuugya Books

Edition: Ist

Binding: paperback

Number Of Pages: 192

Release Date: 01-12-2022

Details: देश के पहले उप-प्रधानमन्त्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने 23 अक्तूबर, 1949 के अपने सन्देश में लिखा था : 'विधान परिषद् ने राष्‍ट्रभाषा के विषय में निर्णय कर लिया है। इसमें कोई सन्देह नहीं है कि कुछ व्यक्तियों को इस फैसले से दु:ख हुआ। कुछ संस्थानों ने भी इसका विरोध किया है। परन्तु जिस प्रकार और बातों में मतभेद हो सकता है, उसी प्रकार इस विषय में यदि मतभेद है और रहे तो उसमें कोई आश्‍चर्य की बात नहीं है। विधान में कई ऐसी बातें हैं जिनसे सबका सन्तोष होना असम्भव है। परन्तु एक बार यदि विधान में कोई चीज़ शामिल हो जाये तो उसको स्वीकार कर लेना सबका कर्तव्य है, कम-से-कम जब तक कि ऐसी स्थिति पैदा न हो जाये जिसमें सर्वसम्मति से या बहुमत से फिर कोई तब्दीली हो सके। अब जबकि हिन्दी को राष्‍ट्रभाषा की पदवी मिल गयी है (यद्यपि कुछ वर्षों के लिए एक विदेशी भाषा के साथ-साथ उसको यह गौरव प्राप्त हुआ है), हर व्यक्ति का कर्तव्य है कि राष्‍ट्रभाषा की उन्‍नति करे और उसकी सेवा करे जिससे कि सारे भारत में वह बिना किसी संकोच या सन्देह के स्वीकृत हो। हिन्दी का पट महासागर की तरह विस्तृत होना चाहिए जिसमें मिलकर और भाषाएँ अपना बहुमूल्य भाग ले सकें। राष्‍ट्रभाषा न तो किसी प्रान्त की है न किसी जाति की है, वह सारे भारत की भाषा है और उसके लिए यह आवश्यक है कि सारे भारत के लोग उसको समझ सकें और अपनाने का गौरव हासिल कर सकें।’ ...इसी पुस्तक से...

EAN: 9789393580696

Package Dimensions: 9.0 x 6.0 x 0.5 inches

Languages: Hindi, English

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