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Hindi Cinema ka Samkal -- हिन्दी सिनेमा का समकाल

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Hindi Cinema ka Samkal -- हिन्दी सिनेमा का समकाल

Author: C. Bhaskar Rao -- सी. भास्कर राव

Edition: Ist

Binding: perfect

Number Of Pages: 182

Release Date: 01-12-2022

Details: ...शुक्ला उनमें से सबसे उम्रदार और समझदार है, जो मि. मेहता के यहाँ ड्राइवर है और आये दिन मिसेज मेहता के बददिमाग का शिकार बनता रहता है और इसे लेकर वह भीतर-ही-भीतर कुढ़ता रहता है, लेकिन कुछ कर नहीं पाता है, क्योंकि ड्राइवरी ही उसकी रोजी-रोटी है। यादव एक मल्टी स्टोरी बिल्डिंग का दरबान है और थोड़ा तुनक मिजाजी है। उसका परिवार गाँव में रहता है और उसका बेटा बीमार पड़ जाता है, जिसके इलाज के लिए उसे पाँच हजार रुपयों का प्रबन्ध करना है। वह अपनी बिल्डिंग के सभी वाशिन्दों का दरवाजा खटखटाता है, लेकिन कहीं से भी उसे अपेक्षित मदद नहीं मिलती है। वह निराशा और हताशा की स्थिति में एक दिन सड़क के किनारे किसी टी स्टाल के पास बैठा रहता है कि तीन गुंडे किस्म के लोग उसे छेड़ते हैं। उससे झल्लाकर वह एक को जोरदार झापड़ मार देता है, जिससे वह बेहोश हो जाता है और उसके शेष दोनों साथी उसे छोड़कर भाग जाते हैं। कुछ समझ में न आने की स्थिति में उस बेहोश व्यक्ति को वह अपनी खोली में घसीट लाता है और तीनों दोस्त उसके होश में आने का इन्तजार करते हैं। उनका तीसरा साथी अमन है, जो एक रेस्त्रां में बेयरा है और वह वहाँ अक्सर आने वाली एक विदेशी लड़की से प्रेम करने लगता है। अमन युवा है। तीनों में सबसे कम उम्र का। यादव बीच की उम्र का है। तीनों मिलकर यह तय करते हैं कि उस अनजान बेहोश व्यक्ति को किसी सड़क के किनारे छोड़ देंगे। यही वे करते भी हैं, लेकिन इसी बीच यादव उस व्यक्ति के पिता से फ़ोन पर सम्पर्क करता है और तीस हजार फिरौती की माँग कर बैठता है। यह रकम उसके पिता आकर यादव को सौंप देते हैं और यादव उसके तीन हिस्से करता है। वह अपने घर पाँच हजार रुपए भेज देता है। अमन को वह दस हजार देता है। ...इसी पुस्तक से...

Package Dimensions: 9.0 x 6.0 x 0.5 inches

Languages: Hindi

$1.65
Hindi Cinema ka Samkal -- हिन्दी सिनेमा का समकाल
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Description

Author: C. Bhaskar Rao -- सी. भास्कर राव

Edition: Ist

Binding: perfect

Number Of Pages: 182

Release Date: 01-12-2022

Details: ...शुक्ला उनमें से सबसे उम्रदार और समझदार है, जो मि. मेहता के यहाँ ड्राइवर है और आये दिन मिसेज मेहता के बददिमाग का शिकार बनता रहता है और इसे लेकर वह भीतर-ही-भीतर कुढ़ता रहता है, लेकिन कुछ कर नहीं पाता है, क्योंकि ड्राइवरी ही उसकी रोजी-रोटी है। यादव एक मल्टी स्टोरी बिल्डिंग का दरबान है और थोड़ा तुनक मिजाजी है। उसका परिवार गाँव में रहता है और उसका बेटा बीमार पड़ जाता है, जिसके इलाज के लिए उसे पाँच हजार रुपयों का प्रबन्ध करना है। वह अपनी बिल्डिंग के सभी वाशिन्दों का दरवाजा खटखटाता है, लेकिन कहीं से भी उसे अपेक्षित मदद नहीं मिलती है। वह निराशा और हताशा की स्थिति में एक दिन सड़क के किनारे किसी टी स्टाल के पास बैठा रहता है कि तीन गुंडे किस्म के लोग उसे छेड़ते हैं। उससे झल्लाकर वह एक को जोरदार झापड़ मार देता है, जिससे वह बेहोश हो जाता है और उसके शेष दोनों साथी उसे छोड़कर भाग जाते हैं। कुछ समझ में न आने की स्थिति में उस बेहोश व्यक्ति को वह अपनी खोली में घसीट लाता है और तीनों दोस्त उसके होश में आने का इन्तजार करते हैं। उनका तीसरा साथी अमन है, जो एक रेस्त्रां में बेयरा है और वह वहाँ अक्सर आने वाली एक विदेशी लड़की से प्रेम करने लगता है। अमन युवा है। तीनों में सबसे कम उम्र का। यादव बीच की उम्र का है। तीनों मिलकर यह तय करते हैं कि उस अनजान बेहोश व्यक्ति को किसी सड़क के किनारे छोड़ देंगे। यही वे करते भी हैं, लेकिन इसी बीच यादव उस व्यक्ति के पिता से फ़ोन पर सम्पर्क करता है और तीस हजार फिरौती की माँग कर बैठता है। यह रकम उसके पिता आकर यादव को सौंप देते हैं और यादव उसके तीन हिस्से करता है। वह अपने घर पाँच हजार रुपए भेज देता है। अमन को वह दस हजार देता है। ...इसी पुस्तक से...

Package Dimensions: 9.0 x 6.0 x 0.5 inches

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