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Hindi Dalit Sahitya Ki Dastak | ?????? ???? ??????? ?? ????? by ???? ?????? ????? [Paperback] Gautam Bhaidas Kunwar [Paperback] Gautam Bhaidas Kunwar

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Hindi Dalit Sahitya Ki Dastak | ?????? ???? ??????? ?? ????? by ???? ?????? ????? [Paperback] Gautam Bhaidas Kunwar [Paperback] Gautam Bhaidas Kunwar

Author: Gautam Bhaidas Kunwar

Brand: Anuugya Books

Edition: 1

Features:

  • हिन्दी दलित-साहित्य : चिन्तन की दिशा; बौद्धदर्शी, कबीर; मानवतावादी समाज सुधारक : सन्त रैदास; प्रेमचन्द की कहानियों में गाँधीवादी दलित-चिन्तन; सूरजपाल चौहान की कहानियों में मानवतावाद; डॉ. सुशीला टाकभौरे के काव्य में समाज और संवेदना

Binding: paperback

Number Of Pages: 122

Release Date: 01-12-2018

Details: हिन्दी साहित्य का अभिजात साहित्य में आम आदमी, नारी, दलित, आदिवासी तथा पूरे बहुजन समाज की अभिव्यक्ति है? इस प्रश्न का उत्तर नहीं है। अभिजात साहित्य में वास्तविकता, सत्य नहीं बल्कि कल्पना ही अधिक है। उन्होंने प्रतीक, मिथक और बिम्बों का प्रयोग केवल सौन्दर्य-चित्रण के लिए किया। यही कारण है कि वे सूरज को तेज सौन्दर्य, चाँद को शीतलता का प्रतीक मानते हैं। यही प्रतीक दलित-साहित्य में अलग है। सूरज प्रकाश प्रतीक है तो चाँद रोटी का प्रतीक है। अभिजात साहित्य में नारी का सौन्दर्य-वर्णन केवल भोग-विलास के लिए किया गया है, वहीं दलित-साहित्य में उसकी मुक्ति का, आजादी, सम्मान और प्रतिष्ठा का चित्रण है। यही कारण है कि अभिजात साहित्य के साहित्यिक मानदंड अलग हैं तो दलित-साहित्य के मानदंड अलग हैं। अभिजात साहित्य कला के लिए,मनोरंजन, धन प्राप्ति, सौन्दर्य-चित्रण, आनन्द, यश-प्राप्ति के लिए लिखा गया तो वहीं दलित-साहित्य दु:ख की अभिव्यक्ति के लिए लिखा जा रहा है। अन्याय, अत्याचार के प्रति आक्रोश, विद्रोह के लिए लिखा जा रहा है। स्वानुभूति के लिए लिखा जा रहा है। समता, मानवता, बन्धुता, एकता के लिए लिखा जा रहा है। अत: अभिजात साहित्य के मानदंड तथा दलित-साहित्य के मानदंड अलग हैं। दोनों में कलात्मक तथा तात्त्विक अन्तर है। इसलिए अभिजात साहित्य के मानदंडों के आधार पर दलित-साहित्य का मूल्यांकन करना उचित नहीं है। दोनों का उद्देश्य अलग-अलग है। दलित-साहित्य की नींव बुद्ध, फुले, शाहू, आम्बेडकरी विचारधारा पर है। उनके तत्त्वों तथा विचारों को मुख्य केन्द्रबिन्दु मानकर उसका लेखन किया जाता है। अत: दलित-साहित्य की प्रेरणा भी वही है। मनुवादी व्यवस्था के कारण एक बहुजन दलित समुदाय गुलामी में जीवन जी रहा था।

Package Dimensions: 9.0 x 6.0 x 0.4 inches

Languages: Hindi

$1.18
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Description

Author: Gautam Bhaidas Kunwar

Brand: Anuugya Books

Edition: 1

Features:

  • हिन्दी दलित-साहित्य : चिन्तन की दिशा; बौद्धदर्शी, कबीर; मानवतावादी समाज सुधारक : सन्त रैदास; प्रेमचन्द की कहानियों में गाँधीवादी दलित-चिन्तन; सूरजपाल चौहान की कहानियों में मानवतावाद; डॉ. सुशीला टाकभौरे के काव्य में समाज और संवेदना

Binding: paperback

Number Of Pages: 122

Release Date: 01-12-2018

Details: हिन्दी साहित्य का अभिजात साहित्य में आम आदमी, नारी, दलित, आदिवासी तथा पूरे बहुजन समाज की अभिव्यक्ति है? इस प्रश्न का उत्तर नहीं है। अभिजात साहित्य में वास्तविकता, सत्य नहीं बल्कि कल्पना ही अधिक है। उन्होंने प्रतीक, मिथक और बिम्बों का प्रयोग केवल सौन्दर्य-चित्रण के लिए किया। यही कारण है कि वे सूरज को तेज सौन्दर्य, चाँद को शीतलता का प्रतीक मानते हैं। यही प्रतीक दलित-साहित्य में अलग है। सूरज प्रकाश प्रतीक है तो चाँद रोटी का प्रतीक है। अभिजात साहित्य में नारी का सौन्दर्य-वर्णन केवल भोग-विलास के लिए किया गया है, वहीं दलित-साहित्य में उसकी मुक्ति का, आजादी, सम्मान और प्रतिष्ठा का चित्रण है। यही कारण है कि अभिजात साहित्य के साहित्यिक मानदंड अलग हैं तो दलित-साहित्य के मानदंड अलग हैं। अभिजात साहित्य कला के लिए,मनोरंजन, धन प्राप्ति, सौन्दर्य-चित्रण, आनन्द, यश-प्राप्ति के लिए लिखा गया तो वहीं दलित-साहित्य दु:ख की अभिव्यक्ति के लिए लिखा जा रहा है। अन्याय, अत्याचार के प्रति आक्रोश, विद्रोह के लिए लिखा जा रहा है। स्वानुभूति के लिए लिखा जा रहा है। समता, मानवता, बन्धुता, एकता के लिए लिखा जा रहा है। अत: अभिजात साहित्य के मानदंड तथा दलित-साहित्य के मानदंड अलग हैं। दोनों में कलात्मक तथा तात्त्विक अन्तर है। इसलिए अभिजात साहित्य के मानदंडों के आधार पर दलित-साहित्य का मूल्यांकन करना उचित नहीं है। दोनों का उद्देश्य अलग-अलग है। दलित-साहित्य की नींव बुद्ध, फुले, शाहू, आम्बेडकरी विचारधारा पर है। उनके तत्त्वों तथा विचारों को मुख्य केन्द्रबिन्दु मानकर उसका लेखन किया जाता है। अत: दलित-साहित्य की प्रेरणा भी वही है। मनुवादी व्यवस्था के कारण एक बहुजन दलित समुदाय गुलामी में जीवन जी रहा था।

Package Dimensions: 9.0 x 6.0 x 0.4 inches

Languages: Hindi

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