
Hindi Kahani Ki Ikkisavin Sadi
Author: Sanjeev Kumar
Brand: Rajkamal Prakashan
Binding: hardcover
Number Of Pages: 232
Release Date: 01-02-2019
Part Number: 9388753518
Details: लम्बे-लम्बे अन्तराल पर तीन-चार कहानियां ही मैं लिख पाया, पर लिखने की ललक बनी रही जिसने यह गौर करनेवाली निगाह दी कि अच्छी कहानी में अच्छा क्या होता है, कहानियां कितने तरीकों से लिखी जाती हैं, वे कौन-कौन-सी युक्तियाँ हैं जिनसे विशिष्ट प्रभाव पैदा होते हैं, कोई सम्भावनाशाली कथा-विचार कैसे एक खराब कहानी में विकसित होता है और एक अति-साधारण कथा-विचार कैसे एक प्रभावशाली कहानी में ढल जाता है इत्यादि | लेकिन जब आप एक कहानीकार पर या किसी कथा-आन्दोलन पर समग्र रूप में टिप्पणी कर रहे होते हैं, तब ‘ज़ूम-आउट मोड’ में होने के कारण रचना-विशेष में इस्तेमाल की गई हिकमतों, आख्यान-तकनीकों, रचना के प्रभावशाली होने के अन्यान्य रहस्यों और इन सबके साथ जिनका परिपाक हुआ है, उन समय-समाज-सम्बन्धी सरोकारों के बारे में उस तरह से चर्चा नहीं हो पाती। कहीं समग्रता के आग्रह से विशिष्ट की विशिष्टता का उल्लेख टल जाता है तो कहीं साहित्यालोचन को प्रवृत्ति-निरूपक साहित्येतिहास का अनुषंगी बनना पड़ता है। जब 'हंस' कथा क की और से एक स्तम्भ शुरू करने का प्रस्ताव आया तो मैंने छूटते ही इस सदी की चुनिन्दा कहानियों पर लिखने की इच्छा जताई | मुझे लगा कि मैं जिन चीजों पर गौर करता रहा हूँ, उनका सही इस्तेमाल करने का समय आ गया है | यह इस्तेमाल सर्वोत्तम न सही, द्वितियोत्तम यानी सेकंड बेस्ट तो कहा ही जा सकता है ! आगे जो लेख आप पढने जा रहे हैं, वे 'खरामा-खरामा' स्तम्भ की ही कड़ियाँ हैं | इन्हें इनके प्रकाशन-क्रम में ही इस संग्रह में भी रखा गया है | कई कड़ियाँ ऐसी हैं जो अपनी स्वतंत्र श्रृंखला बनाती हैं | —भूमिका से.
EAN: 9789388753517
Package Dimensions: 8.7 x 5.7 x 0.7 inches
Languages: Hindi
Original: $6.80
-65%$6.80
$2.38Product Information
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Description
Author: Sanjeev Kumar
Brand: Rajkamal Prakashan
Binding: hardcover
Number Of Pages: 232
Release Date: 01-02-2019
Part Number: 9388753518
Details: लम्बे-लम्बे अन्तराल पर तीन-चार कहानियां ही मैं लिख पाया, पर लिखने की ललक बनी रही जिसने यह गौर करनेवाली निगाह दी कि अच्छी कहानी में अच्छा क्या होता है, कहानियां कितने तरीकों से लिखी जाती हैं, वे कौन-कौन-सी युक्तियाँ हैं जिनसे विशिष्ट प्रभाव पैदा होते हैं, कोई सम्भावनाशाली कथा-विचार कैसे एक खराब कहानी में विकसित होता है और एक अति-साधारण कथा-विचार कैसे एक प्रभावशाली कहानी में ढल जाता है इत्यादि | लेकिन जब आप एक कहानीकार पर या किसी कथा-आन्दोलन पर समग्र रूप में टिप्पणी कर रहे होते हैं, तब ‘ज़ूम-आउट मोड’ में होने के कारण रचना-विशेष में इस्तेमाल की गई हिकमतों, आख्यान-तकनीकों, रचना के प्रभावशाली होने के अन्यान्य रहस्यों और इन सबके साथ जिनका परिपाक हुआ है, उन समय-समाज-सम्बन्धी सरोकारों के बारे में उस तरह से चर्चा नहीं हो पाती। कहीं समग्रता के आग्रह से विशिष्ट की विशिष्टता का उल्लेख टल जाता है तो कहीं साहित्यालोचन को प्रवृत्ति-निरूपक साहित्येतिहास का अनुषंगी बनना पड़ता है। जब 'हंस' कथा क की और से एक स्तम्भ शुरू करने का प्रस्ताव आया तो मैंने छूटते ही इस सदी की चुनिन्दा कहानियों पर लिखने की इच्छा जताई | मुझे लगा कि मैं जिन चीजों पर गौर करता रहा हूँ, उनका सही इस्तेमाल करने का समय आ गया है | यह इस्तेमाल सर्वोत्तम न सही, द्वितियोत्तम यानी सेकंड बेस्ट तो कहा ही जा सकता है ! आगे जो लेख आप पढने जा रहे हैं, वे 'खरामा-खरामा' स्तम्भ की ही कड़ियाँ हैं | इन्हें इनके प्रकाशन-क्रम में ही इस संग्रह में भी रखा गया है | कई कड़ियाँ ऐसी हैं जो अपनी स्वतंत्र श्रृंखला बनाती हैं | —भूमिका से.
EAN: 9789388753517
Package Dimensions: 8.7 x 5.7 x 0.7 inches
Languages: Hindi


















