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Jangle Pahad ke path [Paperback] Mahadev Toppo

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Jangle Pahad ke path [Paperback] Mahadev Toppo

Author: Mahadev Toppo

Brand: Anuugya Books

Edition: 1

Features:

  • Mahadev Toppo, Aadavasi Literature, Aadivasi Poetry

Binding: paperback

Number Of Pages: 96

Release Date: 01-12-2017

Details: एक कुँड़ुख (उराँव) लोकगीत परेता ओललन राजियर एरनर भीतरेन्ता जिया ओलनन ने दुरू इरी पईरी बारी परेता ओलनन राजियर एरनर भीतरेन्ता जिया ओलनन ने दुरू इरी पुतबारिन्ता परेता ओलनन राजियर एरनर भीतरेन्ता जिया ओलनन ने दुरू इरी हिन्दी अनुवाद पहाड़ पर लगी आग को देखती है दुनिया सारी ह्रदय के भीतर लगी आग को कोई नहीं देखता सुबह को पहाड़ पर लगी आग को देखती है दुनिया सारी ह्रदय के भीतर लगी आग को कोई नहीं देखता शाम को पहाड़ पर लगी आग को देखती है दुनिया सारी ह्रदय के भीतर लगी आग को कोई नहीं देखता जंगल पहाड़ के पाठ संग्रह की अधिकांश कविताएँ आदिवासियों के अंदर लगी आग को, महसूसने और देखने का एक छोटा, लेकिन साहसिक प्रयास है।

Package Dimensions: 9.0 x 6.0 x 0.5 inches

Languages: Hindi

$0.52

Original: $1.50

-65%
Jangle Pahad ke path [Paperback] Mahadev Toppo

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Description

Author: Mahadev Toppo

Brand: Anuugya Books

Edition: 1

Features:

  • Mahadev Toppo, Aadavasi Literature, Aadivasi Poetry

Binding: paperback

Number Of Pages: 96

Release Date: 01-12-2017

Details: एक कुँड़ुख (उराँव) लोकगीत परेता ओललन राजियर एरनर भीतरेन्ता जिया ओलनन ने दुरू इरी पईरी बारी परेता ओलनन राजियर एरनर भीतरेन्ता जिया ओलनन ने दुरू इरी पुतबारिन्ता परेता ओलनन राजियर एरनर भीतरेन्ता जिया ओलनन ने दुरू इरी हिन्दी अनुवाद पहाड़ पर लगी आग को देखती है दुनिया सारी ह्रदय के भीतर लगी आग को कोई नहीं देखता सुबह को पहाड़ पर लगी आग को देखती है दुनिया सारी ह्रदय के भीतर लगी आग को कोई नहीं देखता शाम को पहाड़ पर लगी आग को देखती है दुनिया सारी ह्रदय के भीतर लगी आग को कोई नहीं देखता जंगल पहाड़ के पाठ संग्रह की अधिकांश कविताएँ आदिवासियों के अंदर लगी आग को, महसूसने और देखने का एक छोटा, लेकिन साहसिक प्रयास है।

Package Dimensions: 9.0 x 6.0 x 0.5 inches

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