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Kannad Ki Charchit Bees Kahaniyaan | ????? ?? ?????? ??? ???????? by ??.?? ??????? [Paperback] D.N. Shrinath

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Kannad Ki Charchit Bees Kahaniyaan | ????? ?? ?????? ??? ???????? by ??.?? ??????? [Paperback] D.N. Shrinath

Author: D.N. Shrinath

Brand: Anuugya Books

Edition: 1

Features:

  • Kannad ki Charchit Kahaniyon ka hindi Anuvaad, DN Prasad, Anuugya Books

Binding: paperback

Number Of Pages: 168

Release Date: 01-12-2018

Details: घर–बेलूरू राममूर्ति; सिर–माविनकेरे रंगनाथन; नृशंसता–एस. दिवाकर; आसरा–लक्ष्मण कोडसे; दो पागल–के.वी. तिरुमलेश; चम्पक वृक्ष–सुमतीन्द्र नाडिग; वैकम जी का मीठा आम का पेड़–शान्ताराम सोमयाजी; हम दोनों के बीच–डॉ. श्रीकंठ कूडिगे; आखिरी रास्ता–वीणा शान्तेश्वर; भला आदमी–अशोक हेगड़े; इन्सान और हैवान–एम.एच. नायकबाड़ा; दो भूतपूर्व–ना. डिसोजा; फैसला और वह...–केशव रेड्डी हन्द्राला; [1] बिल्ली चाहिए, बिल्ली?–डी.एन. श्रीनाथ; [2]भूतपूर्व मन्त्री से...–डी.एन. श्रीनाथ; रोटी–अब्बास मेलिनमनि; दुर्वह भार–सुधाकर; एक जामुन की कथा–बाला साहेब लोकापुरा; अमर साहित्य, वजनदार साहित्य–प्रभुशंकर; कूर्मावतार–के.टी. गट्टी; हासिल–रामचन्द्र भावे अनुवाद एक भाषा से दूसरी भाषा में संप्रेषण करने की एक अहम युक्ति है। अनुवाद एक भाषा से दूसरी भाषा में अर्थ के अंतरण की प्रक्रिया है। अत्यन्त प्राचीन काल से अनुवाद के माध्यम से विभिन्न भाषा-भाषी समाजों के बीच संवाद स्थापित होता रहा है। प्राचीनकाल की संस्कृतियों के विकास में अनुवाद का बड़ा योगदान रहा है। विश्व सभ्यताओं के विकास में भी अनुवाद का अमूल्य योगदान रहा है। विभिन्न भाषाओं के साहित्य का परस्पर अनुवाद मानव-समाज की एकता को समृद्ध करने की ओर सार्थक सफर है। बहुभाषा-भाषी विश्वजनता के बीच अनुवाद एक सुदृढ़ सांस्कृतिक सेतु का कार्य करता है। आज समकालीन साहित्य को पढऩे का चाव विश्वजनता में बढ़ता जा रहा है। इस कारण से आज विश्व भर में साहित्यिक अनुवाद की बड़ी मांग है। भारत जैसे बहुभाषा-भाषी देश में तो अनुवाद की उपादेयता स्वयंसिद्ध है। कहानियाँ– ये रूप ही प्रमुख है, ऐसा कहा जा सकता है। कन्नड़ कहानी सफर के चार पड़ाव हैं– नवोदय धारा, प्रगतिशील धारा, नव्य धारा और नव्योत्तर धारा।

Package Dimensions: 9.0 x 6.0 x 0.5 inches

Languages: Hindi

$0.55

Original: $1.57

-65%
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Author: D.N. Shrinath

Brand: Anuugya Books

Edition: 1

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  • Kannad ki Charchit Kahaniyon ka hindi Anuvaad, DN Prasad, Anuugya Books

Binding: paperback

Number Of Pages: 168

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Details: घर–बेलूरू राममूर्ति; सिर–माविनकेरे रंगनाथन; नृशंसता–एस. दिवाकर; आसरा–लक्ष्मण कोडसे; दो पागल–के.वी. तिरुमलेश; चम्पक वृक्ष–सुमतीन्द्र नाडिग; वैकम जी का मीठा आम का पेड़–शान्ताराम सोमयाजी; हम दोनों के बीच–डॉ. श्रीकंठ कूडिगे; आखिरी रास्ता–वीणा शान्तेश्वर; भला आदमी–अशोक हेगड़े; इन्सान और हैवान–एम.एच. नायकबाड़ा; दो भूतपूर्व–ना. डिसोजा; फैसला और वह...–केशव रेड्डी हन्द्राला; [1] बिल्ली चाहिए, बिल्ली?–डी.एन. श्रीनाथ; [2]भूतपूर्व मन्त्री से...–डी.एन. श्रीनाथ; रोटी–अब्बास मेलिनमनि; दुर्वह भार–सुधाकर; एक जामुन की कथा–बाला साहेब लोकापुरा; अमर साहित्य, वजनदार साहित्य–प्रभुशंकर; कूर्मावतार–के.टी. गट्टी; हासिल–रामचन्द्र भावे अनुवाद एक भाषा से दूसरी भाषा में संप्रेषण करने की एक अहम युक्ति है। अनुवाद एक भाषा से दूसरी भाषा में अर्थ के अंतरण की प्रक्रिया है। अत्यन्त प्राचीन काल से अनुवाद के माध्यम से विभिन्न भाषा-भाषी समाजों के बीच संवाद स्थापित होता रहा है। प्राचीनकाल की संस्कृतियों के विकास में अनुवाद का बड़ा योगदान रहा है। विश्व सभ्यताओं के विकास में भी अनुवाद का अमूल्य योगदान रहा है। विभिन्न भाषाओं के साहित्य का परस्पर अनुवाद मानव-समाज की एकता को समृद्ध करने की ओर सार्थक सफर है। बहुभाषा-भाषी विश्वजनता के बीच अनुवाद एक सुदृढ़ सांस्कृतिक सेतु का कार्य करता है। आज समकालीन साहित्य को पढऩे का चाव विश्वजनता में बढ़ता जा रहा है। इस कारण से आज विश्व भर में साहित्यिक अनुवाद की बड़ी मांग है। भारत जैसे बहुभाषा-भाषी देश में तो अनुवाद की उपादेयता स्वयंसिद्ध है। कहानियाँ– ये रूप ही प्रमुख है, ऐसा कहा जा सकता है। कन्नड़ कहानी सफर के चार पड़ाव हैं– नवोदय धारा, प्रगतिशील धारा, नव्य धारा और नव्योत्तर धारा।

Package Dimensions: 9.0 x 6.0 x 0.5 inches

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