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Kasap

Author: Manohar Shyam Joshi

Brand: Rajkamal Prakashan

Edition: First Edition

Features:

  • Kasap [hardcover] Manohar Shyam Joshi [Jan 01, 2010]

Binding: hardcover

Number Of Pages: 312

Release Date: 01-01-2010

Part Number: 8171788858

Details: कसप मनोहरश्याम जोशी वस्तुतः एक प्रेम-कथा है ‘कसप’। भाषा की दृष्टि से कुछ नवीनता लिए हुए। कुमाऊँनी के शब्दों से सजी ‘कसप’ की हिन्दी चमत्कृत करती है। इसी कुमाऊँनी मिश्रित हिन्दी में मनोहरश्याम जोशी ने कुमाऊँनी जीवन का चित्ताकर्षक चित्र उकेरा है - ‘कसप’ में। समीक्षकों ने ‘कसप’ को प्रेमाख्यानों में अज्ञेय के उपन्यास ‘नदी के द्वीप’ के बाद की सबसे बड़ी उपलब्धि कहा है। ‘कसप’ मूलतः एक ऐसा उपन्यास है जिसमें मध्यवर्गीय मानसिकता, कुलांचे भरती है। इसका दार्शनिक ढाँचा भी मध्यमवर्गीय यथार्थ पर टिका है। यही वह बिन्दु है जहाँ ‘कसप’ अपने तेवर में ‘नदी के द्वीप’ से अलग ठहरता है। ‘नदी के द्वीप’ का तेवर बौद्धिक और उच्चवर्गीय है, जबकि ‘कसप’ एक ऐसा प्रेमाख्यान है जिसमें ‘दलिद्दर’ से लेकर ‘दिव्य’ तक का स्वर ‘मध्य’ पर ही ठहरता है और इस उपन्यास को सरसता, भावुकता और ग़ज़ब की पठनीयता से लवरेज करता है। इस उपन्यास में मध्यवर्गीय जीवन की टीस को अपने पंडिताऊ परिहास में ढालकर एक प्राध्यापक ने मानवीय प्रेम को स्वप्न और स्मृत्याभास के बीचोबीच ‘फ्रीज’ कर दिया है। 1910 के काशी से लेकर 1980 के हॉलीवुड तक की अनुगूँजों से भरा, गँवई, अनाथ, भावुक साहित्य-सिनेमा अनुरागी लड़के और काशी के समृद्ध शास्त्रियों की सिरचढ़ी, खिलन्दड़, दबंग लड़की के संक्षिप्त प्रेम की विस्तृत कहानी सुनानेवाला यह उपन्यास एक विचित्र-सा उदास-उदास, मीठा-मीठा-सा प्रभाव मन पर छोड़ता है। ऐसा प्रभाव जो ठीक कैसा है, यह पूछे जाने पर एक ही उत्तर सूझता है - ‘कसप! और कुमाऊँनी में ‘कसप’ का मतलब होता है - ‘पता नहीं!’

EAN: 9788171788859

Package Dimensions: 8.7 x 5.7 x 0.9 inches

Languages: Hindi

$2.83

Original: $8.09

-65%
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Description

Author: Manohar Shyam Joshi

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Edition: First Edition

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  • Kasap [hardcover] Manohar Shyam Joshi [Jan 01, 2010]

Binding: hardcover

Number Of Pages: 312

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Details: कसप मनोहरश्याम जोशी वस्तुतः एक प्रेम-कथा है ‘कसप’। भाषा की दृष्टि से कुछ नवीनता लिए हुए। कुमाऊँनी के शब्दों से सजी ‘कसप’ की हिन्दी चमत्कृत करती है। इसी कुमाऊँनी मिश्रित हिन्दी में मनोहरश्याम जोशी ने कुमाऊँनी जीवन का चित्ताकर्षक चित्र उकेरा है - ‘कसप’ में। समीक्षकों ने ‘कसप’ को प्रेमाख्यानों में अज्ञेय के उपन्यास ‘नदी के द्वीप’ के बाद की सबसे बड़ी उपलब्धि कहा है। ‘कसप’ मूलतः एक ऐसा उपन्यास है जिसमें मध्यवर्गीय मानसिकता, कुलांचे भरती है। इसका दार्शनिक ढाँचा भी मध्यमवर्गीय यथार्थ पर टिका है। यही वह बिन्दु है जहाँ ‘कसप’ अपने तेवर में ‘नदी के द्वीप’ से अलग ठहरता है। ‘नदी के द्वीप’ का तेवर बौद्धिक और उच्चवर्गीय है, जबकि ‘कसप’ एक ऐसा प्रेमाख्यान है जिसमें ‘दलिद्दर’ से लेकर ‘दिव्य’ तक का स्वर ‘मध्य’ पर ही ठहरता है और इस उपन्यास को सरसता, भावुकता और ग़ज़ब की पठनीयता से लवरेज करता है। इस उपन्यास में मध्यवर्गीय जीवन की टीस को अपने पंडिताऊ परिहास में ढालकर एक प्राध्यापक ने मानवीय प्रेम को स्वप्न और स्मृत्याभास के बीचोबीच ‘फ्रीज’ कर दिया है। 1910 के काशी से लेकर 1980 के हॉलीवुड तक की अनुगूँजों से भरा, गँवई, अनाथ, भावुक साहित्य-सिनेमा अनुरागी लड़के और काशी के समृद्ध शास्त्रियों की सिरचढ़ी, खिलन्दड़, दबंग लड़की के संक्षिप्त प्रेम की विस्तृत कहानी सुनानेवाला यह उपन्यास एक विचित्र-सा उदास-उदास, मीठा-मीठा-सा प्रभाव मन पर छोड़ता है। ऐसा प्रभाव जो ठीक कैसा है, यह पूछे जाने पर एक ही उत्तर सूझता है - ‘कसप! और कुमाऊँनी में ‘कसप’ का मतलब होता है - ‘पता नहीं!’

EAN: 9788171788859

Package Dimensions: 8.7 x 5.7 x 0.9 inches

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