✨ New Arrivals Just Dropped!Explore
HomeStore

Katha Shakuntala Ki

Product image 1

Katha Shakuntala Ki

Author: Radhavallabh Tripathi

Brand: RADHA KRISHNA PRAKASAN PVT LTD

Binding: hardcover

Number Of Pages: 152

Release Date: 01-01-2020

Details: शकुंतला-दुष्षंत की कथा की इस नाट्य-प्रस्तुति को जो चीज विशिष्ट बनाती है, वह है इसका काल-बोध और तत्कालीन परिवेश का तथ्यपरक निरूपण। ‘महाभारत’ में किंचित् परिष्कृत रूप में सबसे पहले आनेवाली यह कथा वास्तव में वैदिक काल की है। इसके पात्र वेदों के समय से संबंध रखते हैं। दुष्यंत के पुत्र भरत का जिक्र भी वेदों में मिलता है। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए ‘महाभारत’ में यह कथा जिस रूप में आई, उसके बजाय यह नाटक इस कथा के उस रूप को आधार बनाता है जो वैदिक काल में रहा होगा। महाभारत में, और उसके बाद हम जिस भी रूप में इस कथा को देखते हैं, उसकी जड़ें सामंती मूल्य-संरचना में हैं। वैदिक संस्करण निश्चय ही कुछ भिन्न रहा होगा और उसका परिप्रेक्ष्य आदिम मूल्यबोध से रहा होगा। इस नाटक में कथा के उसी रूप को पकड़ने का प्रयास किया गया है। इसीलिए यहाँ ‘दुष्यंत’ को ‘दुष्षंत’ कहा गया है जो महाभारत तथा वैदिक साहित्य में आता है। यह प्रचलित कथा मूलत: मातृसत्तात्मक समाज से ताल्लुक रखती है जहाँ लड़कियों को अपना जीवन साथी चुनने की पूरी छूट है, जैसा कि शकुंतला भी करती है। नाटक में भूख और अकाल की भी चर्चा है जिन्हें वेदों के ही कुछ प्रसंगों के आधार पर पुन:सृजित किया गया है। भाषा, संवाद-रचना और प्रसंगानुकूल दृश्य-रचना के चलते यह नाटक शकुंतला की जानी-पहचानी कथा को हमारे सामने नए और भावप्रवण रूप में प्रस्तुत करता है; जो मंच के लिए जितना अनुकूल है, साधारण पाठ के लिए भी उतना ही रुचिकर है।

EAN: 9788183619394

Package Dimensions: 8.8 x 5.7 x 0.7 inches

Languages: Hindi

$3.56
Katha Shakuntala Ki
$3.56

Product Information

Shipping & Returns

Description

Author: Radhavallabh Tripathi

Brand: RADHA KRISHNA PRAKASAN PVT LTD

Binding: hardcover

Number Of Pages: 152

Release Date: 01-01-2020

Details: शकुंतला-दुष्षंत की कथा की इस नाट्य-प्रस्तुति को जो चीज विशिष्ट बनाती है, वह है इसका काल-बोध और तत्कालीन परिवेश का तथ्यपरक निरूपण। ‘महाभारत’ में किंचित् परिष्कृत रूप में सबसे पहले आनेवाली यह कथा वास्तव में वैदिक काल की है। इसके पात्र वेदों के समय से संबंध रखते हैं। दुष्यंत के पुत्र भरत का जिक्र भी वेदों में मिलता है। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए ‘महाभारत’ में यह कथा जिस रूप में आई, उसके बजाय यह नाटक इस कथा के उस रूप को आधार बनाता है जो वैदिक काल में रहा होगा। महाभारत में, और उसके बाद हम जिस भी रूप में इस कथा को देखते हैं, उसकी जड़ें सामंती मूल्य-संरचना में हैं। वैदिक संस्करण निश्चय ही कुछ भिन्न रहा होगा और उसका परिप्रेक्ष्य आदिम मूल्यबोध से रहा होगा। इस नाटक में कथा के उसी रूप को पकड़ने का प्रयास किया गया है। इसीलिए यहाँ ‘दुष्यंत’ को ‘दुष्षंत’ कहा गया है जो महाभारत तथा वैदिक साहित्य में आता है। यह प्रचलित कथा मूलत: मातृसत्तात्मक समाज से ताल्लुक रखती है जहाँ लड़कियों को अपना जीवन साथी चुनने की पूरी छूट है, जैसा कि शकुंतला भी करती है। नाटक में भूख और अकाल की भी चर्चा है जिन्हें वेदों के ही कुछ प्रसंगों के आधार पर पुन:सृजित किया गया है। भाषा, संवाद-रचना और प्रसंगानुकूल दृश्य-रचना के चलते यह नाटक शकुंतला की जानी-पहचानी कथा को हमारे सामने नए और भावप्रवण रूप में प्रस्तुत करता है; जो मंच के लिए जितना अनुकूल है, साधारण पाठ के लिए भी उतना ही रुचिकर है।

EAN: 9788183619394

Package Dimensions: 8.8 x 5.7 x 0.7 inches

Languages: Hindi

Katha Shakuntala Ki | Explore Millions of Books