
Khoyi Cheezon Ka Shok
Author: Savita Singh
Brand: RADHA KRISHNA PRAKASAN PVT LTD
Edition: First Edition
Binding: paperback
Number Of Pages: 116
Release Date: 01-12-2021
Details: खोई चीज़ों का शोक' सघन भावनात्मक आवेश से युक्त कविताओं की एक शृंखला है जो अत्यन्त निजी होते हुए भी अपने सौन्दर्यबोध में सार्वभौमिक हैं। ये कविताएँ जीवन, प्रेम, मृत्यु और प्रकृति के अनन्त मौसमों से उनके सम्बन्ध पर भी सोचती हैं, इसलिए इनका एक पहलू दार्शनिक भी है। कुछ खोने के शोक के साथ, किसी और लोक में उसे पुनः पाने की उम्मीद भी इन कविताओं में है। कवि के हृदय से सीधे पाठक के हृदय को छूने वाली ये कविताएँ सहानुभूति से ज़्यादा हमसे हमारी नश्वरता पर विचार करने की माँग करती हैं। संग्रह में शामिल शीर्षक कविता किसी अपने के बिछोह पर एक अभूतपूर्व और कभी भुलाई न जा सकने वाली श्रद्धांजलि है। —के. सच्चिदानंदन 'खोई चीज़ों का शोक' की अधिकतर कविताएँ मृत्यु के साथ एक अन्तरंग संवाद हैं। यह संवाद एक नहीं अनेक दिशाओं में खुलता है। प्रिय साथी की मृत्यु चहुँओर प्रवाहित हो रही मृत्यु की अनगिनत धारों के करीब होने का बहाना मुहैया करती है। अपने भीतर की मृत्यु, सामाजिक जीवन की मृत्यु, आततायी राजनीति की सहचर मृत्यु, पृथ्वी और उसकी आकाश की मृत्यु। सब मृत्युएँ जीवन की वासना के साथ घुल-मिलकर रहती-सहती हैं, बोलती-बतियाती हैं। यह देखना बहुत उत्तेजक है कि पिछले संग्रहों में पुरुष साथी को हमेशा अन्य पुरुष की तरह सम्बोधित करने वाली कवयित्री इस संग्रह में उसी के भीतर परकाया प्रवेश करती है। वह उसकी मृत्यु को अपने भीतर और अपनी मृत्यु को उसके भीतर खोजते हुए मृत्यु के स्त्री-आशय का उन्मेष करती है। जिस मृत्यु को पितृसत्ता ने हमेशा जीवन के समापन के रूप में तिरस्कृत किया, उसी को सविता जी की कविता ने इस संग्रह में जीवन के अन्तहीन संघर्ष के रूप में पुनराविष्कृत किया है। यह मृत्यु की भी मुक्ति है। —आशुतोष कुमार
EAN: 9788195308576
Package Dimensions: 7.8 x 5.0 x 0.4 inches
Languages: Hindi
Product Information
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Shipping & Returns
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Description
Author: Savita Singh
Brand: RADHA KRISHNA PRAKASAN PVT LTD
Edition: First Edition
Binding: paperback
Number Of Pages: 116
Release Date: 01-12-2021
Details: खोई चीज़ों का शोक' सघन भावनात्मक आवेश से युक्त कविताओं की एक शृंखला है जो अत्यन्त निजी होते हुए भी अपने सौन्दर्यबोध में सार्वभौमिक हैं। ये कविताएँ जीवन, प्रेम, मृत्यु और प्रकृति के अनन्त मौसमों से उनके सम्बन्ध पर भी सोचती हैं, इसलिए इनका एक पहलू दार्शनिक भी है। कुछ खोने के शोक के साथ, किसी और लोक में उसे पुनः पाने की उम्मीद भी इन कविताओं में है। कवि के हृदय से सीधे पाठक के हृदय को छूने वाली ये कविताएँ सहानुभूति से ज़्यादा हमसे हमारी नश्वरता पर विचार करने की माँग करती हैं। संग्रह में शामिल शीर्षक कविता किसी अपने के बिछोह पर एक अभूतपूर्व और कभी भुलाई न जा सकने वाली श्रद्धांजलि है। —के. सच्चिदानंदन 'खोई चीज़ों का शोक' की अधिकतर कविताएँ मृत्यु के साथ एक अन्तरंग संवाद हैं। यह संवाद एक नहीं अनेक दिशाओं में खुलता है। प्रिय साथी की मृत्यु चहुँओर प्रवाहित हो रही मृत्यु की अनगिनत धारों के करीब होने का बहाना मुहैया करती है। अपने भीतर की मृत्यु, सामाजिक जीवन की मृत्यु, आततायी राजनीति की सहचर मृत्यु, पृथ्वी और उसकी आकाश की मृत्यु। सब मृत्युएँ जीवन की वासना के साथ घुल-मिलकर रहती-सहती हैं, बोलती-बतियाती हैं। यह देखना बहुत उत्तेजक है कि पिछले संग्रहों में पुरुष साथी को हमेशा अन्य पुरुष की तरह सम्बोधित करने वाली कवयित्री इस संग्रह में उसी के भीतर परकाया प्रवेश करती है। वह उसकी मृत्यु को अपने भीतर और अपनी मृत्यु को उसके भीतर खोजते हुए मृत्यु के स्त्री-आशय का उन्मेष करती है। जिस मृत्यु को पितृसत्ता ने हमेशा जीवन के समापन के रूप में तिरस्कृत किया, उसी को सविता जी की कविता ने इस संग्रह में जीवन के अन्तहीन संघर्ष के रूप में पुनराविष्कृत किया है। यह मृत्यु की भी मुक्ति है। —आशुतोष कुमार
EAN: 9788195308576
Package Dimensions: 7.8 x 5.0 x 0.4 inches
Languages: Hindi


















