Kissa Besir-pair
Author: Prabhat Tripathi
Brand: Rajkamal Prakashan
Edition: First Edition
Binding: hardcover
Number Of Pages: 367
Release Date: 02-08-2017
Part Number: 8126730439
Details: यह उपन्यास स्मृतियों की किस्सागोई है जिसके केन्द्र में इतिहास प्रवर्तक घटनाएँ और व्यक्तित्व नहीं हैं। हो भी नहीं सकते; क्योंकि वे हमारे दैनिक जीवन से दूर कहीं, वाकई इतिहास नाम की उस जगह में रहते होंगे, जहाँ तनखैये इतिहासकार बगल में कागज-कलम-कूची लेकर बैठते होंगे। हमारे इस जीवन में जिनकी मौजूदगी, बस कुछ डरावनी छायाओं की तरह दर्ज होती चलती है। हम यानी लोग, जिनके ऊपर जीवन को बदलने की नहीं, सिर्फ उसे जीने की जिम्मेदारी होती है।यह उन्हीं हममें से एक के मानसिक भूगोल की यात्रा है, जिसमें हम दिन-दिन बनते इतिहास को जैसे एक सूक्ष्मदर्शी की मदद से, उसकी सबसे पतली शिराओं में गति करते देखते हैं। जो नंगी आँखों दिखाई नहीं देती। वह गति, जिसका दायित्व एक व्यक्ति के ऊपर है, वही जिसका भोक्ता है, वही द्रष्टा। वह गति जो उसकी भौतिक-सामाजिक-राजनीतिक उपस्थिति के इहलोक से उधर एक इतने ही विराट संसार की उपस्थिति के प्रति हमें सचेत करती है।लेखक यहाँ हमारे इहलोक के अन्तिम सिरे पर एक चहारदीवारी के दरवाजे-सा खड़ा मिलता है, जो इस वृत्तान्त में खुलता है; और हमें उस चहारदीवारी के भीतर बसी अत्यन्त जटिल और समानान्तर जारी दुनिया में ले जाता है, जो हम सबकी दुनिया है, अलग-अलग जगहों पर खड़े हम उसके अलग-अलग दरवाजे हैं।उन्हीं में से एक दरवाजा यहाँ इन पन्नों में खुल रहा है।अद्भुत है यहाँ से समय को बहते देखना।यह उपन्यास सोदाहरण बताता है कि न तो जीना ही, केवल शारीरिक प्रक्रिया है, और न लिखना ही।
EAN: 9788126730438
Package Dimensions: 8.3 x 5.5 x 1.2 inches
Languages: Hindi
Original: $5.37
-65%$5.37
$1.88Product Information
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Description
Author: Prabhat Tripathi
Brand: Rajkamal Prakashan
Edition: First Edition
Binding: hardcover
Number Of Pages: 367
Release Date: 02-08-2017
Part Number: 8126730439
Details: यह उपन्यास स्मृतियों की किस्सागोई है जिसके केन्द्र में इतिहास प्रवर्तक घटनाएँ और व्यक्तित्व नहीं हैं। हो भी नहीं सकते; क्योंकि वे हमारे दैनिक जीवन से दूर कहीं, वाकई इतिहास नाम की उस जगह में रहते होंगे, जहाँ तनखैये इतिहासकार बगल में कागज-कलम-कूची लेकर बैठते होंगे। हमारे इस जीवन में जिनकी मौजूदगी, बस कुछ डरावनी छायाओं की तरह दर्ज होती चलती है। हम यानी लोग, जिनके ऊपर जीवन को बदलने की नहीं, सिर्फ उसे जीने की जिम्मेदारी होती है।यह उन्हीं हममें से एक के मानसिक भूगोल की यात्रा है, जिसमें हम दिन-दिन बनते इतिहास को जैसे एक सूक्ष्मदर्शी की मदद से, उसकी सबसे पतली शिराओं में गति करते देखते हैं। जो नंगी आँखों दिखाई नहीं देती। वह गति, जिसका दायित्व एक व्यक्ति के ऊपर है, वही जिसका भोक्ता है, वही द्रष्टा। वह गति जो उसकी भौतिक-सामाजिक-राजनीतिक उपस्थिति के इहलोक से उधर एक इतने ही विराट संसार की उपस्थिति के प्रति हमें सचेत करती है।लेखक यहाँ हमारे इहलोक के अन्तिम सिरे पर एक चहारदीवारी के दरवाजे-सा खड़ा मिलता है, जो इस वृत्तान्त में खुलता है; और हमें उस चहारदीवारी के भीतर बसी अत्यन्त जटिल और समानान्तर जारी दुनिया में ले जाता है, जो हम सबकी दुनिया है, अलग-अलग जगहों पर खड़े हम उसके अलग-अलग दरवाजे हैं।उन्हीं में से एक दरवाजा यहाँ इन पन्नों में खुल रहा है।अद्भुत है यहाँ से समय को बहते देखना।यह उपन्यास सोदाहरण बताता है कि न तो जीना ही, केवल शारीरिक प्रक्रिया है, और न लिखना ही।
EAN: 9788126730438
Package Dimensions: 8.3 x 5.5 x 1.2 inches
Languages: Hindi


















