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Krishnavtar : Vol. 3 : Paanch Pandav

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Krishnavtar : Vol. 3 : Paanch Pandav

Author: Kanhaiyalal Maneklal Munshi

Brand: Rajkamal Prakashan

Edition: Eighth

Binding: hardcover

Number Of Pages: 390

Release Date: 01-01-2010

Part Number: 8171786839

Details: पाँच पाण्डव पौराणिक चरित्रों को आधार बनाकर अनेक श्रेष्ठतर आधुनिक उपन्यासों की रचना करनेवाले सुप्रसिद्ध गुजराती कथाकार कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी का भारतीय कथा-साहित्य में अपना एक विशिष्ट स्थान है। अपनी कृतियों में उन्होंने सुदूर अतीत का जो विस्तृत जीवन-फलक प्रस्तुत किया है, वह जितना विराट् है उतना ही आकर्षक, साथ ही वह वैज्ञानिकता की कसौटी पर भी खरा उतरता है। मुंशीजी का कृष्णावतार एक वृहत् उपन्यास है- सात खंडों में विभक्त। पाँच पाण्डव तीसरे खंड का हिन्दी रूपान्तर है। अन्य खंडों की ही तरह अगर यह परस्पर संबद्ध है तो अपने-आपमें एक पूरी कथा भी है। पाँचों पाण्डवों के जन्म, विकास और संघर्षों-उपलब्धियों की इस रोचक-रोमांचक गाथा में आर्यावर्त के महान नायक श्रीकृष्ण की विलक्षण ऐतिहासिक भूमिका बड़ी कलात्मकता से रेखांकित हुई है। पुराकालीन आर्यों की संघर्षशील गतिविधियों, नागों की अरण्य-संस्कृति और ‘राक्षस’ नाम से पुकारे जानेवाले प्रस्तरयुगीन मानवों की आदिम जीवनचर्या के जीवन्त चित्र इसमें पूरी तरह से मुखर हैं।.

EAN: 9788171786831

Package Dimensions: 8.7 x 5.7 x 1.3 inches

Languages: Hindi

$8.51
Krishnavtar : Vol. 3 : Paanch Pandav
$8.51

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Description

Author: Kanhaiyalal Maneklal Munshi

Brand: Rajkamal Prakashan

Edition: Eighth

Binding: hardcover

Number Of Pages: 390

Release Date: 01-01-2010

Part Number: 8171786839

Details: पाँच पाण्डव पौराणिक चरित्रों को आधार बनाकर अनेक श्रेष्ठतर आधुनिक उपन्यासों की रचना करनेवाले सुप्रसिद्ध गुजराती कथाकार कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी का भारतीय कथा-साहित्य में अपना एक विशिष्ट स्थान है। अपनी कृतियों में उन्होंने सुदूर अतीत का जो विस्तृत जीवन-फलक प्रस्तुत किया है, वह जितना विराट् है उतना ही आकर्षक, साथ ही वह वैज्ञानिकता की कसौटी पर भी खरा उतरता है। मुंशीजी का कृष्णावतार एक वृहत् उपन्यास है- सात खंडों में विभक्त। पाँच पाण्डव तीसरे खंड का हिन्दी रूपान्तर है। अन्य खंडों की ही तरह अगर यह परस्पर संबद्ध है तो अपने-आपमें एक पूरी कथा भी है। पाँचों पाण्डवों के जन्म, विकास और संघर्षों-उपलब्धियों की इस रोचक-रोमांचक गाथा में आर्यावर्त के महान नायक श्रीकृष्ण की विलक्षण ऐतिहासिक भूमिका बड़ी कलात्मकता से रेखांकित हुई है। पुराकालीन आर्यों की संघर्षशील गतिविधियों, नागों की अरण्य-संस्कृति और ‘राक्षस’ नाम से पुकारे जानेवाले प्रस्तरयुगीन मानवों की आदिम जीवनचर्या के जीवन्त चित्र इसमें पूरी तरह से मुखर हैं।.

EAN: 9788171786831

Package Dimensions: 8.7 x 5.7 x 1.3 inches

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