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Kumbhipak

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Kumbhipak

Author: Nagarjun

Brand: Rajkamal Prakashan

Edition: First Edition

Binding: paperback

Number Of Pages: 140

Release Date: 01-07-2019

Details: कुम्भीपाक नामक नरक की रचना जिन जीवन-स्थितियों से हुई होगी, नागार्जुन का यह उपन्यास उन्हीं के शब्दांकन का परिणाम है । एक ही मन में रहनेवाले छः किरायेदारो की जीवनचर्या पर केन्द्रित यह उपन्यास हमारे 'विकासमान' नागर-जीवन के जिस सामाजिक यथार्थ की परतें खोलता है, प्रकारांतर से वह समूचे भारतीय जीवन का यथार्थ है, क्योंकि स्त्री के प्रति पदार्थवादी नजरिये की कहीं कोई कमी नहीं । आर्थिक अभावों में पिसती अनेकानेक निर्दोष जिवानेच्छाएं किस प्रकार भोगवाद की भट्टी में झोंक दी जाती हैं, उनकी पीड़ा और मुक्तिकामी छटपटाहट को नागार्जुन ने गहरी आत्मीयता से उकेरा है । साथ ही, नागार्जुन यहाँ उस दृष्टि को प्रस्थापित करते हैं जो स्त्री की सामाजिक भूमिका और मानवीय गरिमा के प्रति सचेत है ।.

EAN: 9788126713318

Package Dimensions: 8.3 x 5.4 x 0.4 inches

Languages: Hindi

$0.87

Original: $2.49

-65%
Kumbhipak

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Description

Author: Nagarjun

Brand: Rajkamal Prakashan

Edition: First Edition

Binding: paperback

Number Of Pages: 140

Release Date: 01-07-2019

Details: कुम्भीपाक नामक नरक की रचना जिन जीवन-स्थितियों से हुई होगी, नागार्जुन का यह उपन्यास उन्हीं के शब्दांकन का परिणाम है । एक ही मन में रहनेवाले छः किरायेदारो की जीवनचर्या पर केन्द्रित यह उपन्यास हमारे 'विकासमान' नागर-जीवन के जिस सामाजिक यथार्थ की परतें खोलता है, प्रकारांतर से वह समूचे भारतीय जीवन का यथार्थ है, क्योंकि स्त्री के प्रति पदार्थवादी नजरिये की कहीं कोई कमी नहीं । आर्थिक अभावों में पिसती अनेकानेक निर्दोष जिवानेच्छाएं किस प्रकार भोगवाद की भट्टी में झोंक दी जाती हैं, उनकी पीड़ा और मुक्तिकामी छटपटाहट को नागार्जुन ने गहरी आत्मीयता से उकेरा है । साथ ही, नागार्जुन यहाँ उस दृष्टि को प्रस्थापित करते हैं जो स्त्री की सामाजिक भूमिका और मानवीय गरिमा के प्रति सचेत है ।.

EAN: 9788126713318

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