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Naagari Lipi Ka Udbhav Aur Vikaas

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Naagari Lipi Ka Udbhav Aur Vikaas

Author: OmParkash Bhatia ‘Araj’ | ओम्प्रकाश भाटिया ‘अराज’

Edition: 2nd

Features:

  • ‘अराज’ की लिपि-साधना – अशोक भाटिया (डॉ.); लिपि-विज्ञान में प्रस्तुत विषय; विश्व में लेख-िलपि का उद्‍भव और प्रसार; भारतीय लिपियों का मूल स्रोत
  • भारतीय लिपियों का इतिहास; ब्राह्मी-लिपि; ब्राह्मी की शाखाएँ
  • सन्तुलित ब्राह्मी; अलंकृत लिपि; उद्‍भव-काल की अनुसन्धान विधि
  • संक्रान्तिकालीन लिपियाँ और नागरी का उद्‍भव-काल; नागरी लिपि का उद्‍भव : उपलब्धियाँ; स्थैर्यकाल में नागरी का विकास
  • नागरी का यन्त्र-लिपि के रूप में विकास; वर्तमान नागरी का लैपिविज्ञानिक मूल्यांकन

Binding: paperback

Number Of Pages: 344

Release Date: 01-12-2019

Details: लिपि किसी भाषा के लिए ही बनाई जाती है। लिपि विशेष जिस भाषा के लिए बनाई जाए या प्रयुक्त हो, वह उसकी आधार-भाषा होती है। लिपि में उसकी आधार-भाषा की आवश्यकतानुसार संकेत होते हैं। इन संकेतों द्वारा उस भाषा के सभी ध्वनिग्रामों, शब्दांशों, शब्दों या वाक्यों को अंकित करना होता है। ध्वनि से वाक्य तक भाषा के ‘अवयव’ पृथक् किए जा सकते हैं। लिपि के संकेत किसी एक अवयव के आधार पर बनाए जा सकते हैं। किसी अवयव के कई बार प्रयुक्त होने पर उसके लिए निश्चित एक ही लिपि-संकेत बार-बार लिखा जा सकता है, अत: वह ‘आधार-संकेत’ का कार्य करता है। यदि किसी भाषा को ध्वनियों में विभाजित किया गया है, तो ध्वनि उसका ‘आधार-अवयव’ है। ऐसी अवस्था में आधार-भाषा की प्रत्येक ध्वनि के लिए एक निश्चित संकेत होना चाहिए। ऐसी लिपि की आदर्श अवस्था में एक ध्वनि के लिए एक ही आधार-संकेत होना चाहिए; एक ही ध्वनि की अभिव्यक्ति के लिए एकाधिक संकेतों का प्रयोग नहीं होना चाहिए। दूसरी ओर एक आधार-संकेत एक ही निश्चित ध्वनि की अभिव्यक्ति के लिए प्रयुक्त होना चाहिए, एकाधिक ध्वनियों के लिए नहीं। यदि आधार-अवयव शब्द है, तो उस भाषा के प्रत्येक शब्द के लिए आधार-संकेत होना चाहिए। निष्कर्षत:, यदि आदर्श लिपि की कल्पना की जाए, तो उसमें आधार-भाषा में प्रयुक्त ध्वनि-ग्रामों, शब्दांशों, शब्दों अथवा वाक्यों की पूर्ण-सूची के लिए नियत वे सभी आधार-संकेत अवश्य होने चाहिएँ, जिनसे पूरी भाषा के भाषित को अंकित में परिवर्तित किया जा सके। यदि किसी लिपि में आधार-संकेत एक ही रूप में न रहकर एकाधिक रूपों में प्रयुक्त होते हैं, तो उस लिपि की ‘संकेत-सूची’ में संकेतों के सभी रूप सम्मिलित होने चाहिए, तभी वह सूची ‘पूर्ण’ कहलाएगी।

EAN: 9789386835932

Package Dimensions: 9.0 x 6.0 x 0.5 inches

Languages: Hindi

$1.07

Original: $3.06

-65%
Naagari Lipi Ka Udbhav Aur Vikaas

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Description

Author: OmParkash Bhatia ‘Araj’ | ओम्प्रकाश भाटिया ‘अराज’

Edition: 2nd

Features:

  • ‘अराज’ की लिपि-साधना – अशोक भाटिया (डॉ.); लिपि-विज्ञान में प्रस्तुत विषय; विश्व में लेख-िलपि का उद्‍भव और प्रसार; भारतीय लिपियों का मूल स्रोत
  • भारतीय लिपियों का इतिहास; ब्राह्मी-लिपि; ब्राह्मी की शाखाएँ
  • सन्तुलित ब्राह्मी; अलंकृत लिपि; उद्‍भव-काल की अनुसन्धान विधि
  • संक्रान्तिकालीन लिपियाँ और नागरी का उद्‍भव-काल; नागरी लिपि का उद्‍भव : उपलब्धियाँ; स्थैर्यकाल में नागरी का विकास
  • नागरी का यन्त्र-लिपि के रूप में विकास; वर्तमान नागरी का लैपिविज्ञानिक मूल्यांकन

Binding: paperback

Number Of Pages: 344

Release Date: 01-12-2019

Details: लिपि किसी भाषा के लिए ही बनाई जाती है। लिपि विशेष जिस भाषा के लिए बनाई जाए या प्रयुक्त हो, वह उसकी आधार-भाषा होती है। लिपि में उसकी आधार-भाषा की आवश्यकतानुसार संकेत होते हैं। इन संकेतों द्वारा उस भाषा के सभी ध्वनिग्रामों, शब्दांशों, शब्दों या वाक्यों को अंकित करना होता है। ध्वनि से वाक्य तक भाषा के ‘अवयव’ पृथक् किए जा सकते हैं। लिपि के संकेत किसी एक अवयव के आधार पर बनाए जा सकते हैं। किसी अवयव के कई बार प्रयुक्त होने पर उसके लिए निश्चित एक ही लिपि-संकेत बार-बार लिखा जा सकता है, अत: वह ‘आधार-संकेत’ का कार्य करता है। यदि किसी भाषा को ध्वनियों में विभाजित किया गया है, तो ध्वनि उसका ‘आधार-अवयव’ है। ऐसी अवस्था में आधार-भाषा की प्रत्येक ध्वनि के लिए एक निश्चित संकेत होना चाहिए। ऐसी लिपि की आदर्श अवस्था में एक ध्वनि के लिए एक ही आधार-संकेत होना चाहिए; एक ही ध्वनि की अभिव्यक्ति के लिए एकाधिक संकेतों का प्रयोग नहीं होना चाहिए। दूसरी ओर एक आधार-संकेत एक ही निश्चित ध्वनि की अभिव्यक्ति के लिए प्रयुक्त होना चाहिए, एकाधिक ध्वनियों के लिए नहीं। यदि आधार-अवयव शब्द है, तो उस भाषा के प्रत्येक शब्द के लिए आधार-संकेत होना चाहिए। निष्कर्षत:, यदि आदर्श लिपि की कल्पना की जाए, तो उसमें आधार-भाषा में प्रयुक्त ध्वनि-ग्रामों, शब्दांशों, शब्दों अथवा वाक्यों की पूर्ण-सूची के लिए नियत वे सभी आधार-संकेत अवश्य होने चाहिएँ, जिनसे पूरी भाषा के भाषित को अंकित में परिवर्तित किया जा सके। यदि किसी लिपि में आधार-संकेत एक ही रूप में न रहकर एकाधिक रूपों में प्रयुक्त होते हैं, तो उस लिपि की ‘संकेत-सूची’ में संकेतों के सभी रूप सम्मिलित होने चाहिए, तभी वह सूची ‘पूर्ण’ कहलाएगी।

EAN: 9789386835932

Package Dimensions: 9.0 x 6.0 x 0.5 inches

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