
Osho : Hashiye par MukhprIsth
Author: Saroj Kumar Verma
Brand: Anuugya Books
Features:
- osho adhyatm religious
Binding: paperback
Number Of Pages: 148
Release Date: 01-12-2024
Details: ओशो स्वातंत्र्योत्तर भारतीय दर्शन के ऐसे दार्शनिक हैं, जिन्होंने दर्शन को नयी ताजगी, मोहक भंगिमा, समन्वयवादी सरोकार, सर्वजन सुलभता तथा वैश्विक सुगंध दी है। इसीलिए उनका दर्शन बासी, शुष्क और नीरस नहीं होकर ताजा, नर्म और सरस है तथा जीवन के सभी पहलुओं को अपने में समेटकर आम जन से जुड़ पाने के साथ-साथ दुनिया-भर में अपनी खुशबू बिखेर पाने में सफल हुआ है। इसकी वजह उनकी वैचारिक स्थापना, भाषा-सरणी, तर्क-प्रवीणता, वक्तृत्व-कला तथा रसपूर्ण प्रस्तुति है। अपनी रसपूर्ण प्रस्तुति के कारण वे अपने हर सुनने-पढ़ने वाले को ओस में लिपटे ताजे फूल की तरह आकर्षित करते हैं, तो सम्मोहक वाणी से सराबोर उनकी वक्तृत्व-कला किसी निस्तब्ध रात्रि में दूर कहीं लिए जा रहे अलाप की मद्धम स्वर-लहरी की तरह हृदय के सारे तार झंकृत कर देती है। यह झंकार उनकी भाषा-सरणी से उत्पन्न होती है। उनके शब्दों का चयन और वाक्यों का विन्यास इतना रागात्मक होता है कि पास किसी पहाड़ी नदी के अपने लय में बहने का अहसास होता है। यह लय उनके तर्क से भी लिपटा होता है। इसलिए उनकी युक्ति रेत की तरह आँखों में चुभती नहीं, दूब की तरह त्वचा को सहलाती है। यह उस नाजुक पत्ती की तरह होती है, जिससे कोई भी सख्त हीरा कट जाता है। लिहाजा कोई कितना भी वजनी सवाल लेकर उनके पास जाये, उसका लाजवाब हो जाना लाजिमी होता है। इन्हीं सारी शैलियों-सिद्धियों के साथ ओशो जब अपनी वैचारिक स्थापना प्रस्तुत करते हैं, तो वह अंतर तक उजास भरने वाली सुबह की पहली किरण की तरह तरोताजा होती है। ...इसी पुस्तक से...
EAN: 9788119878192
Package Dimensions: 9.1 x 6.3 x 0.8 inches
Languages: Hindi
Original: $1.93
-65%$1.93
$0.68Product Information
Product Information
Shipping & Returns
Shipping & Returns
Description
Author: Saroj Kumar Verma
Brand: Anuugya Books
Features:
- osho adhyatm religious
Binding: paperback
Number Of Pages: 148
Release Date: 01-12-2024
Details: ओशो स्वातंत्र्योत्तर भारतीय दर्शन के ऐसे दार्शनिक हैं, जिन्होंने दर्शन को नयी ताजगी, मोहक भंगिमा, समन्वयवादी सरोकार, सर्वजन सुलभता तथा वैश्विक सुगंध दी है। इसीलिए उनका दर्शन बासी, शुष्क और नीरस नहीं होकर ताजा, नर्म और सरस है तथा जीवन के सभी पहलुओं को अपने में समेटकर आम जन से जुड़ पाने के साथ-साथ दुनिया-भर में अपनी खुशबू बिखेर पाने में सफल हुआ है। इसकी वजह उनकी वैचारिक स्थापना, भाषा-सरणी, तर्क-प्रवीणता, वक्तृत्व-कला तथा रसपूर्ण प्रस्तुति है। अपनी रसपूर्ण प्रस्तुति के कारण वे अपने हर सुनने-पढ़ने वाले को ओस में लिपटे ताजे फूल की तरह आकर्षित करते हैं, तो सम्मोहक वाणी से सराबोर उनकी वक्तृत्व-कला किसी निस्तब्ध रात्रि में दूर कहीं लिए जा रहे अलाप की मद्धम स्वर-लहरी की तरह हृदय के सारे तार झंकृत कर देती है। यह झंकार उनकी भाषा-सरणी से उत्पन्न होती है। उनके शब्दों का चयन और वाक्यों का विन्यास इतना रागात्मक होता है कि पास किसी पहाड़ी नदी के अपने लय में बहने का अहसास होता है। यह लय उनके तर्क से भी लिपटा होता है। इसलिए उनकी युक्ति रेत की तरह आँखों में चुभती नहीं, दूब की तरह त्वचा को सहलाती है। यह उस नाजुक पत्ती की तरह होती है, जिससे कोई भी सख्त हीरा कट जाता है। लिहाजा कोई कितना भी वजनी सवाल लेकर उनके पास जाये, उसका लाजवाब हो जाना लाजिमी होता है। इन्हीं सारी शैलियों-सिद्धियों के साथ ओशो जब अपनी वैचारिक स्थापना प्रस्तुत करते हैं, तो वह अंतर तक उजास भरने वाली सुबह की पहली किरण की तरह तरोताजा होती है। ...इसी पुस्तक से...
EAN: 9788119878192
Package Dimensions: 9.1 x 6.3 x 0.8 inches
Languages: Hindi

















