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Pathar -- पत्थर

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Pathar -- पत्थर

Author: Neeraj Verma -- नीरज वर्मा

Brand: Anuugya Books

Edition: Ist

Binding: perfect

Number Of Pages: 155

Release Date: 01-12-2022

Details: नयी शताब्दी के दूसरे दशक में जो युवा लेखक मौजूदा दौर की सामाजिक-सांस्कृतिक-राजनीतिक परिस्थितियों की समझ और ताजा अनुभवों के साथ कथालेखन के परिदृश्य में उभरकर सामने आये हैं, नीरज वर्मा उनमें महत्वपूर्ण और प्रतिष्ठा सम्पन्न नाम हैं। इस दौर के कई कथा लेखकों की कहानियों से भिन्न नीरज वर्मा की कहानियाँ भावुकता और भावावेश अतिरेक के दायरों से बाहर निकल यथार्थ बोध से सम्पृक्त होने की जद्दोजहद की कहानियाँ हैं और इस अर्थ में ये प्रेमचंद की यथार्थवादी कथाधारा की अद्यतन कड़ियाँ हैं। इन कहानियों में ब्योरों और विवरणों की जो सघन बुनावट दिखायी पड़ती है, वह इन कहानियों को दृश्यात्मकता की समृद्धि प्रदान करती है। इन कहानियों में जो कुछ मौजूद है, उसे सिर्फ संवेदना के स्तर पर महसूस ही नहीं किया जा सकता है, उसे सामने ‘होते हुए’ या ‘घटते हुए’ भी देखा जा सकता है। ‘पत्थर’, ‘मातमपुर्सी’, ‘धुंध’, ‘गुम होते लोग’, ‘वार्ड न. 24’, ‘आज का दिन यार के नाम’ नीरज वर्मा के इस पहले संग्रह की चिरस्मरणीय कहानियाँ हैं। इनकी पठनीयता रेखांकित करने योग्य है। – शंकर, संपादक ‘परिकथा’

Package Dimensions: 9.0 x 6.0 x 0.5 inches

Languages: Hindi

$1.50
Pathar -- पत्थर
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Description

Author: Neeraj Verma -- नीरज वर्मा

Brand: Anuugya Books

Edition: Ist

Binding: perfect

Number Of Pages: 155

Release Date: 01-12-2022

Details: नयी शताब्दी के दूसरे दशक में जो युवा लेखक मौजूदा दौर की सामाजिक-सांस्कृतिक-राजनीतिक परिस्थितियों की समझ और ताजा अनुभवों के साथ कथालेखन के परिदृश्य में उभरकर सामने आये हैं, नीरज वर्मा उनमें महत्वपूर्ण और प्रतिष्ठा सम्पन्न नाम हैं। इस दौर के कई कथा लेखकों की कहानियों से भिन्न नीरज वर्मा की कहानियाँ भावुकता और भावावेश अतिरेक के दायरों से बाहर निकल यथार्थ बोध से सम्पृक्त होने की जद्दोजहद की कहानियाँ हैं और इस अर्थ में ये प्रेमचंद की यथार्थवादी कथाधारा की अद्यतन कड़ियाँ हैं। इन कहानियों में ब्योरों और विवरणों की जो सघन बुनावट दिखायी पड़ती है, वह इन कहानियों को दृश्यात्मकता की समृद्धि प्रदान करती है। इन कहानियों में जो कुछ मौजूद है, उसे सिर्फ संवेदना के स्तर पर महसूस ही नहीं किया जा सकता है, उसे सामने ‘होते हुए’ या ‘घटते हुए’ भी देखा जा सकता है। ‘पत्थर’, ‘मातमपुर्सी’, ‘धुंध’, ‘गुम होते लोग’, ‘वार्ड न. 24’, ‘आज का दिन यार के नाम’ नीरज वर्मा के इस पहले संग्रह की चिरस्मरणीय कहानियाँ हैं। इनकी पठनीयता रेखांकित करने योग्य है। – शंकर, संपादक ‘परिकथा’

Package Dimensions: 9.0 x 6.0 x 0.5 inches

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