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Prem ke Paath (प्रेम के पाठ)

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Prem ke Paath (प्रेम के पाठ)

Author: Ramesh Upadhyay (रमेश उपाध्याय)

Brand: Anuugya Books

Features:

  • Language Published: Hindi

Binding: paperback

Number Of Pages: 188

Release Date: 01-12-2020

Details: आजकल लिखी जा रही प्रेम कहानियों में वह प्रेम कहाँ है, जो हम अपने परिवार के लोगों से, सगे-संबंधियों से, पड़ोसियों से, मित्रों से, सहकर्मियों से, देशवासियों से और मनुष्य होने के नाते दुनिया भर के मनुष्यों से करते हैं? उनमें वह प्रेम भी कहाँ है, जो हम मानवेतर प्राणियों से, प्राकृतिक तथा मानव-निर्मित सुंदर वस्तुओं से, साहित्यिक और कलात्मक कृतियों से, मानव-जीवन को बेहतर बनाने के लिए किये जाने वाले कार्यों से तथा उन कार्यों को करने वाले लोगों से करते हैं? उनमें तो वह प्रेम भी नजर नहीं आता, जो हम स्वयं से, अपने जीवन से और एक मानवीय जीवन जीने के लिए किये जाने वाले अपने कार्यों से करते हैं, जिनमें प्रेम करने, विवाह करने, परिवार चलाने, बच्चे पैदा करने और उन्हें अच्छी तरह पाल-पोस तथा पढ़ा-लिखाकर अच्छा इंसान बनाने जैसे बहुत-से कार्य शामिल हैं। आजकल की बहुत-सी प्रेम कहानियों में प्रेम को केवल ‘‘दो व्यक्तियों का निजी मामला’’ और वह भी केवल यौन संबंधों तक सीमित मामला बना दिया जाता है, मानो उन व्यक्तियों का अपने जीवन के आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक यथार्थ से कोई लेना-देना न हो और वे ऐतिहासिक रूप से विकसित मानवीय व्यक्तित्व न होकर केवल आहार, निद्रा, भय और मैथुन में लिप्त पशु हों! प्रेम कहानी केवल प्रेम की कहानी नहीं होती। वह संपूर्ण जीवन और जगत की कहानी होती है। वह जीवन और जगत को प्रेममय बनाकर बेहतर और सुंदर बनाने के उद्देश्य से लिखी जाने वाली कहानी होती है। अतः समाज की वर्तमान व्यवस्था की आलोचना तथा उसकी जगह किसी बेहतर समाज व्यवस्था की माँग प्रेम कहानी अनिवार्यतः करती है। – रमेश उपाध्याय

EAN: 9789389341324

Package Dimensions: 9.8 x 6.3 x 0.8 inches

Languages: Hindi

$0.55

Original: $1.57

-65%
Prem ke Paath (प्रेम के पाठ)

$1.57

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Description

Author: Ramesh Upadhyay (रमेश उपाध्याय)

Brand: Anuugya Books

Features:

  • Language Published: Hindi

Binding: paperback

Number Of Pages: 188

Release Date: 01-12-2020

Details: आजकल लिखी जा रही प्रेम कहानियों में वह प्रेम कहाँ है, जो हम अपने परिवार के लोगों से, सगे-संबंधियों से, पड़ोसियों से, मित्रों से, सहकर्मियों से, देशवासियों से और मनुष्य होने के नाते दुनिया भर के मनुष्यों से करते हैं? उनमें वह प्रेम भी कहाँ है, जो हम मानवेतर प्राणियों से, प्राकृतिक तथा मानव-निर्मित सुंदर वस्तुओं से, साहित्यिक और कलात्मक कृतियों से, मानव-जीवन को बेहतर बनाने के लिए किये जाने वाले कार्यों से तथा उन कार्यों को करने वाले लोगों से करते हैं? उनमें तो वह प्रेम भी नजर नहीं आता, जो हम स्वयं से, अपने जीवन से और एक मानवीय जीवन जीने के लिए किये जाने वाले अपने कार्यों से करते हैं, जिनमें प्रेम करने, विवाह करने, परिवार चलाने, बच्चे पैदा करने और उन्हें अच्छी तरह पाल-पोस तथा पढ़ा-लिखाकर अच्छा इंसान बनाने जैसे बहुत-से कार्य शामिल हैं। आजकल की बहुत-सी प्रेम कहानियों में प्रेम को केवल ‘‘दो व्यक्तियों का निजी मामला’’ और वह भी केवल यौन संबंधों तक सीमित मामला बना दिया जाता है, मानो उन व्यक्तियों का अपने जीवन के आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक यथार्थ से कोई लेना-देना न हो और वे ऐतिहासिक रूप से विकसित मानवीय व्यक्तित्व न होकर केवल आहार, निद्रा, भय और मैथुन में लिप्त पशु हों! प्रेम कहानी केवल प्रेम की कहानी नहीं होती। वह संपूर्ण जीवन और जगत की कहानी होती है। वह जीवन और जगत को प्रेममय बनाकर बेहतर और सुंदर बनाने के उद्देश्य से लिखी जाने वाली कहानी होती है। अतः समाज की वर्तमान व्यवस्था की आलोचना तथा उसकी जगह किसी बेहतर समाज व्यवस्था की माँग प्रेम कहानी अनिवार्यतः करती है। – रमेश उपाध्याय

EAN: 9789389341324

Package Dimensions: 9.8 x 6.3 x 0.8 inches

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