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Premchand: Yatharthvadi Pariprekshya (????????? : ?????????? ????????????) [Perfect Paperback] ???????? ?????, ???? ???, ????? ?? ?????? : ??????????? ?????; ???? ????????, ?????????? ??????, ????? ??????,; ?????????? ?????? ????, ???????? ?????, ?????? ?

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Author: रमेश उपाध्याय, चन्द्रभूषण तिवारी, आनन्द प्रकाश,

Color: Pale Green

Edition: Ist

Binding: perfect

Format: print

Number Of Pages: 183

Release Date: 01-12-2021

Details: ‘यथार्थवाद एक जड़ फ़ार्मूला है’, ‘यथार्थवाद महज़ एक साहित्यिक शैली है’, ‘यथार्थवाद व्यक्ति की अस्मिता का उसके अन्तर्मन की जटिल सच्चाइयों का विरोधी है’, आदि-आदि बातें कहकर इन लेखकों ने यथार्थवाद को नकारने और उसके महत्त्व को कम करने के सभी प्रयत्‍न अपनाये। आधुनिकतावाद से यथार्थवाद को काटने की हर चन्द कोशिश की गयी। इस दौरान आलोचकीय चतुराई का एक और बारीक रूप देखने को मिला। वह था–यथार्थवाद द्वारा (या उसके आवरण में) यथार्थ का विरोध। विरोध की इस नयी रणनीति के तहत प्रेमचन्द की महानता को, उन्हीं के महान आदर्शों को लेकर आगे बढ़ने वाली जनवादी कथा-परम्परा से ‘काउंटरपोज़’ करके अद्वितीय साबित करने का दिलचस्प, पर ख़तरनाक प्रयास किया गया। प्रेमचन्द की महान यथार्थवादी परम्परा को आगे बढ़ाने वाले परवर्ती कथाकारों की तरह पीठ करके सिर्फ़ प्रेमचन्द को देखने और गौरव देने की यह कोशिश यथार्थवाद की समूची परम्परा को प्रेमचन्द में ही सीमित देखने का–उन्हीं से शुरू, उन्हीं पर खत्म साबित करने का–चतुराई पूर्ण आग्रह लेकर सामने आयी। प्रेमचन्द की यथार्थवादी परम्परा को काटने के लिए प्रेमचन्द के ही इस्तेमाल की यह कोशिश विरोध की रणनीति का सबसे खतरनाक पहलू है। — राजकुमार शर्मा

Package Dimensions: 9.0 x 6.0 x 0.5 inches

Languages: Hindi

$1.77
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Description

Author: रमेश उपाध्याय, चन्द्रभूषण तिवारी, आनन्द प्रकाश,

Color: Pale Green

Edition: Ist

Binding: perfect

Format: print

Number Of Pages: 183

Release Date: 01-12-2021

Details: ‘यथार्थवाद एक जड़ फ़ार्मूला है’, ‘यथार्थवाद महज़ एक साहित्यिक शैली है’, ‘यथार्थवाद व्यक्ति की अस्मिता का उसके अन्तर्मन की जटिल सच्चाइयों का विरोधी है’, आदि-आदि बातें कहकर इन लेखकों ने यथार्थवाद को नकारने और उसके महत्त्व को कम करने के सभी प्रयत्‍न अपनाये। आधुनिकतावाद से यथार्थवाद को काटने की हर चन्द कोशिश की गयी। इस दौरान आलोचकीय चतुराई का एक और बारीक रूप देखने को मिला। वह था–यथार्थवाद द्वारा (या उसके आवरण में) यथार्थ का विरोध। विरोध की इस नयी रणनीति के तहत प्रेमचन्द की महानता को, उन्हीं के महान आदर्शों को लेकर आगे बढ़ने वाली जनवादी कथा-परम्परा से ‘काउंटरपोज़’ करके अद्वितीय साबित करने का दिलचस्प, पर ख़तरनाक प्रयास किया गया। प्रेमचन्द की महान यथार्थवादी परम्परा को आगे बढ़ाने वाले परवर्ती कथाकारों की तरह पीठ करके सिर्फ़ प्रेमचन्द को देखने और गौरव देने की यह कोशिश यथार्थवाद की समूची परम्परा को प्रेमचन्द में ही सीमित देखने का–उन्हीं से शुरू, उन्हीं पर खत्म साबित करने का–चतुराई पूर्ण आग्रह लेकर सामने आयी। प्रेमचन्द की यथार्थवादी परम्परा को काटने के लिए प्रेमचन्द के ही इस्तेमाल की यह कोशिश विरोध की रणनीति का सबसे खतरनाक पहलू है। — राजकुमार शर्मा

Package Dimensions: 9.0 x 6.0 x 0.5 inches

Languages: Hindi

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