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Satya Ke Mere Prayog

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Satya Ke Mere Prayog

Author: Mohandas Karamchand Gandhi

Brand: Rajkamal Prakashan

Edition: First Edition

Binding: hardcover

Number Of Pages: 368

Release Date: 01-01-2011

Part Number: 8126720956

Details: विश्व के स्वप्नदर्शी और युगांतरकारी नेताओं में सर्वाधिक चर्चित और देश-काल की सीमाओं को लांघकर एक प्रतीक बन जानेवाले महात्मा गांधी की यह आत्मकथा न किसी परिचय की मुहताज है और न किसी प्रशंसा की। अनेक भाषाओं और देशों के असंख्य पाठकों के मन में राजनीति, समाज और नैतिकता से जुड़े सवालों को जगाने, विचलित करनेवाली इस पुस्तक का यह मूल गुजराती से अनूदित प्रामाणिक पाठ है। समाज और राजनीति की धारा में गांधी जी ने असहयोग और अहिंसा जैसे व्यावहारिक औज़ारों से एक मानवीय हस्तक्षेप किया, वहीं अपने निजी जीवन को उन्होंने सत्य, संयम और आत्मबल की लगभग एक प्रयोगशाला की तरह जिया। नैतिकता उनके लिए सिर्फ़ समाजोन्मुख, बाहरी मूल्य नहीं, उनके लिए वह अपने अन्त:करण के पारदर्शी आइने में एक ऐसे नग्न प्रश्न के रूप में खड़ी थी, जिसका जवाब व्यक्ति को अपने सामने, अपने को ही देना होता है। अपने स्व की कसौटी ही जिसकी एकमात्र कसौटी होती है। यह पुस्तक गांधी जी के इसी अविराम नैतिक आत्मनिरीक्षण की विवरणिका है। इस चर्चित पुस्तक की पुनर्प्रस्‍तुति यह बात ध्यान में रखते हुए की जा रही है कि महान कृतियों का अनुवाद बार-बार होते रहना चाहिए। इस अनुवाद में प्रयास किया गया है कि गांधी जी की इस सर्वाधिक पढ़ी जानेवाली कृति को आज का पाठक उस भाषा-संवेदना की रोशनी में पढ़ सके जो आज़ादी के बाद हमारी चेतना का हिस्सा बनी है।

EAN: 9788126720958

Package Dimensions: 8.4 x 5.7 x 1.1 inches

Languages: Hindi, English

$2.26

Original: $6.46

-65%
Satya Ke Mere Prayog

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Description

Author: Mohandas Karamchand Gandhi

Brand: Rajkamal Prakashan

Edition: First Edition

Binding: hardcover

Number Of Pages: 368

Release Date: 01-01-2011

Part Number: 8126720956

Details: विश्व के स्वप्नदर्शी और युगांतरकारी नेताओं में सर्वाधिक चर्चित और देश-काल की सीमाओं को लांघकर एक प्रतीक बन जानेवाले महात्मा गांधी की यह आत्मकथा न किसी परिचय की मुहताज है और न किसी प्रशंसा की। अनेक भाषाओं और देशों के असंख्य पाठकों के मन में राजनीति, समाज और नैतिकता से जुड़े सवालों को जगाने, विचलित करनेवाली इस पुस्तक का यह मूल गुजराती से अनूदित प्रामाणिक पाठ है। समाज और राजनीति की धारा में गांधी जी ने असहयोग और अहिंसा जैसे व्यावहारिक औज़ारों से एक मानवीय हस्तक्षेप किया, वहीं अपने निजी जीवन को उन्होंने सत्य, संयम और आत्मबल की लगभग एक प्रयोगशाला की तरह जिया। नैतिकता उनके लिए सिर्फ़ समाजोन्मुख, बाहरी मूल्य नहीं, उनके लिए वह अपने अन्त:करण के पारदर्शी आइने में एक ऐसे नग्न प्रश्न के रूप में खड़ी थी, जिसका जवाब व्यक्ति को अपने सामने, अपने को ही देना होता है। अपने स्व की कसौटी ही जिसकी एकमात्र कसौटी होती है। यह पुस्तक गांधी जी के इसी अविराम नैतिक आत्मनिरीक्षण की विवरणिका है। इस चर्चित पुस्तक की पुनर्प्रस्‍तुति यह बात ध्यान में रखते हुए की जा रही है कि महान कृतियों का अनुवाद बार-बार होते रहना चाहिए। इस अनुवाद में प्रयास किया गया है कि गांधी जी की इस सर्वाधिक पढ़ी जानेवाली कृति को आज का पाठक उस भाषा-संवेदना की रोशनी में पढ़ सके जो आज़ादी के बाद हमारी चेतना का हिस्सा बनी है।

EAN: 9788126720958

Package Dimensions: 8.4 x 5.7 x 1.1 inches

Languages: Hindi, English

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