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Shaam ki Subah [Paperback] Walter Bhengra Tarun [Paperback] Walter Bhengra Tarun

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Shaam ki Subah [Paperback] Walter Bhengra Tarun [Paperback] Walter Bhengra Tarun

Author: Walter Bhengra Tarun

Brand: Anuugya Books

Binding: paperback

Number Of Pages: 142

Release Date: 01-12-2021

Details: वाल्टर भेंगरा ‘तरुण’ की कलम से निकला उपन्यास “शाम की सुबह” एक ताजगी का अहसास दिलाता है। एक आदिवासी नर्स के जीवन के उथल-पुथल अन्तर्द्वन्द्व को लेखक ने बहुत ही संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। लेखक द्वारा धाराप्रवाह कथा प्रस्तुति पाठक को बाँधकर रखता है। उपन्यास के पात्रों के साथ पाठक को एकाकार करने में लेखक सफल रहा है। – हिमांशु श्रीवास्तव, वरिष्ठ लेखक, पटना वाल्टर भेंगरा ‘तरुण’ ने अपने इस उपन्यास में नारी के अन्तर्मन को अपनी सशक्त लेखनी से जीवन्त बना दिया है। एक नर्स के जीवन के उतार-चढ़ाव का ‘तरुण’ ने मार्मिक चित्रण किया है, जो अन्यन्त ही सराहनीय है। – डॉ. मंजु दुबे, हिन्दी विभाग, ऑरिएन्टल कॉलेज, पटना सिटी वाल्टर भेंगरा ‘तरुण’ से पाठक ‘लौटती रेखाएँ’ के द्वारा पहले से परिचित हैं। प्रस्तुत उपन्यास ‘शाम की सुबह’ लेखक की तीसरी कृति है। उनकी दूसरी पुस्तक रोजगार के अवसर, उनके पहले कथा-संग्रह ‘लौटती रेखाएँ’ के तुरन्त बाद प्रकाशित हुई। पूर्व दोनों पुस्तकों का पाठकों ने अच्छा स्वागत किया और हमारा पूर्ण विश्‍वास है कि पाठक उनके उपन्यास शाम की सुबह का भी उसी तरह स्वागत करेंगे। – फा. प्रताप टोप्पो, एस.जे., प्रकाशक, सत्य भारती प्रकाशन, राँची ... जीवन की विडम्बनाओं से जूझती और अपने कर्तव्य के लिए संघर्षरत एक आदिवासी नर्स की जीवन्त कहानी है यह उपन्यास। इसमें प्रेम, घृणा, प्रलोभन, क्षमा, त्याग सब कुछ है! ...युवा लेखक वाल्टर भेंगरा ‘तरुण’ की सशक्त लेखनी से निकला एक मार्मिक उपन्यास ...शाम की सुबह! – वर्ष 1981 ई. में प्रकाशित उपन्यास से उद्धृत

Package Dimensions: 8.0 x 5.0 x 0.5 inches

Languages: Hindi

$1.53
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Description

Author: Walter Bhengra Tarun

Brand: Anuugya Books

Binding: paperback

Number Of Pages: 142

Release Date: 01-12-2021

Details: वाल्टर भेंगरा ‘तरुण’ की कलम से निकला उपन्यास “शाम की सुबह” एक ताजगी का अहसास दिलाता है। एक आदिवासी नर्स के जीवन के उथल-पुथल अन्तर्द्वन्द्व को लेखक ने बहुत ही संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। लेखक द्वारा धाराप्रवाह कथा प्रस्तुति पाठक को बाँधकर रखता है। उपन्यास के पात्रों के साथ पाठक को एकाकार करने में लेखक सफल रहा है। – हिमांशु श्रीवास्तव, वरिष्ठ लेखक, पटना वाल्टर भेंगरा ‘तरुण’ ने अपने इस उपन्यास में नारी के अन्तर्मन को अपनी सशक्त लेखनी से जीवन्त बना दिया है। एक नर्स के जीवन के उतार-चढ़ाव का ‘तरुण’ ने मार्मिक चित्रण किया है, जो अन्यन्त ही सराहनीय है। – डॉ. मंजु दुबे, हिन्दी विभाग, ऑरिएन्टल कॉलेज, पटना सिटी वाल्टर भेंगरा ‘तरुण’ से पाठक ‘लौटती रेखाएँ’ के द्वारा पहले से परिचित हैं। प्रस्तुत उपन्यास ‘शाम की सुबह’ लेखक की तीसरी कृति है। उनकी दूसरी पुस्तक रोजगार के अवसर, उनके पहले कथा-संग्रह ‘लौटती रेखाएँ’ के तुरन्त बाद प्रकाशित हुई। पूर्व दोनों पुस्तकों का पाठकों ने अच्छा स्वागत किया और हमारा पूर्ण विश्‍वास है कि पाठक उनके उपन्यास शाम की सुबह का भी उसी तरह स्वागत करेंगे। – फा. प्रताप टोप्पो, एस.जे., प्रकाशक, सत्य भारती प्रकाशन, राँची ... जीवन की विडम्बनाओं से जूझती और अपने कर्तव्य के लिए संघर्षरत एक आदिवासी नर्स की जीवन्त कहानी है यह उपन्यास। इसमें प्रेम, घृणा, प्रलोभन, क्षमा, त्याग सब कुछ है! ...युवा लेखक वाल्टर भेंगरा ‘तरुण’ की सशक्त लेखनी से निकला एक मार्मिक उपन्यास ...शाम की सुबह! – वर्ष 1981 ई. में प्रकाशित उपन्यास से उद्धृत

Package Dimensions: 8.0 x 5.0 x 0.5 inches

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