
Stri Lekhan [Paperback] Dr K Vanaja; Dr. K Vanaja and Prof. N Mohnan
Author: Dr K Vanaja
Brand: Anuugya
Edition: 1
Features:
- Language Published: Hindi
Binding: paperback
Number Of Pages: 215
Release Date: 01-12-2017
Details: स्थिति तब भी नियन्त्रण में होती यदि आचार-संहिता बनाने वाले पुरुष नियन्ताओं के संग ईंट पर ईंट की भाँति स्त्री की वैचारिक भागीदारी आमन्त्रित होती। – चित्रा मुद्गल उबाऊ, नीरस और कड़ी मेहनत के काम स्त्रियों के सर आते हैं। खेती के दौरान ही मर्द जब पानी ढोता है, ट्रैक्टर या बैलगाड़ी पर, महिला सर पर तीन मटके रखकर पैदल ही चल पड़ती है। – अनामिका स्त्री लेखन स्त्री की मानवीय अस्मिता के लिए लड़ी जाने वाली वैचारिक लड़ाई है। इसका अभिप्रेत पुरुष को पछाड़कर अपने वर्चस्व का परचम फहराना नहीं... – रोहिणी अग्रवाल हर व्यक्ति को जिन्दगी जीने का अधिकार है, 'स्त्री लेखन की शुरुआत का यही मूल मन्त्र थाÓ इसलिए स्त्री लेखन को समाजशास्त्री दृष्टि से समझना आवश्यक है। – कमल कुमार स्त्री-मुक्ति की अवधारणा का मूल स्वर प्रतिरोध है..... – रमणिका गुप्ता आज के सन्दर्भों में स्त्री सर्जनात्मकता की बात करना शताब्दियों की यात्रा की पड़ताल करना जैसा है। – नमिता सिंह
EAN: 9789383962921
Package Dimensions: 9.0 x 6.0 x 0.5 inches
Languages: Hindi, English
Original: $1.57
-65%$1.57
$0.55Product Information
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Description
Author: Dr K Vanaja
Brand: Anuugya
Edition: 1
Features:
- Language Published: Hindi
Binding: paperback
Number Of Pages: 215
Release Date: 01-12-2017
Details: स्थिति तब भी नियन्त्रण में होती यदि आचार-संहिता बनाने वाले पुरुष नियन्ताओं के संग ईंट पर ईंट की भाँति स्त्री की वैचारिक भागीदारी आमन्त्रित होती। – चित्रा मुद्गल उबाऊ, नीरस और कड़ी मेहनत के काम स्त्रियों के सर आते हैं। खेती के दौरान ही मर्द जब पानी ढोता है, ट्रैक्टर या बैलगाड़ी पर, महिला सर पर तीन मटके रखकर पैदल ही चल पड़ती है। – अनामिका स्त्री लेखन स्त्री की मानवीय अस्मिता के लिए लड़ी जाने वाली वैचारिक लड़ाई है। इसका अभिप्रेत पुरुष को पछाड़कर अपने वर्चस्व का परचम फहराना नहीं... – रोहिणी अग्रवाल हर व्यक्ति को जिन्दगी जीने का अधिकार है, 'स्त्री लेखन की शुरुआत का यही मूल मन्त्र थाÓ इसलिए स्त्री लेखन को समाजशास्त्री दृष्टि से समझना आवश्यक है। – कमल कुमार स्त्री-मुक्ति की अवधारणा का मूल स्वर प्रतिरोध है..... – रमणिका गुप्ता आज के सन्दर्भों में स्त्री सर्जनात्मकता की बात करना शताब्दियों की यात्रा की पड़ताल करना जैसा है। – नमिता सिंह
EAN: 9789383962921
Package Dimensions: 9.0 x 6.0 x 0.5 inches
Languages: Hindi, English














