स्वाधीनतोत्तर हिन्दी नाटकों में लोकतान्त्रिक मूल्य (Swadhinotar Hindi Natakonmein Loktantrik Mulay)

स्वाधीनतोत्तर हिन्दी नाटकों में लोकतान्त्रिक मूल्य (Swadhinotar Hindi Natakonmein Loktantrik Mulay)
Book Details
- Publisher: Sultan Chand & Sons
- ISBN: 9788196361808
- Edition: 1st Edition
- Language: Hindi
- Weight: 0.00g
About the Book
यह पुस्तक “स्वधीनतोत्तर हिंदी नाटकों में लोकतान्त्रिक मूल्य” डॉ. ब्रह्मदत्त अवस्थी द्वारा रचित एक महत्वपूर्ण शोध-प्रबंध है, जिसमें लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ-साथ भारतीय दर्शन, समाज और सांस्कृतिक जीवन का गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
यह कृति तर्क, विचार, कल्पना और यथार्थ का समन्वय करते हुए साहित्य के माध्यम से लोक-चेतना को उजागर करती है। लेखक ने राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र, दर्शन, अर्थशास्त्र और विधि जैसे विविध विषयों को एकीकृत कर हिंदी साहित्य में एक समृद्ध वैचारिक धारा का निर्माण किया है।
पुस्तक की भाषा अत्यंत सरस, प्रभावशाली और भावपूर्ण है, जिसमें तत्सम और तद्भव शब्दों का सुंदर संतुलन देखने को मिलता है। इसमें भारतीय भूगोल, संस्कृति और समाज की गहराइयों को इस प्रकार प्रस्तुत किया गया है कि पाठक को जीवन और साहित्य के व्यापक आयामों का अनुभव होता है।
यह शोध-ग्रंथ न केवल साहित्यिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और भारतीय समाज की संरचना को समझने के लिए भी अत्यंत उपयोगी है।
Salient Features
- स्वधीनोत्तर हिंदी नाटकों में लोकतांत्रिक मूल्यों का विश्लेषण
- भारतीय दर्शन, समाज और संस्कृति का समन्वित अध्ययन
- तर्क, विचार और यथार्थ का संतुलित प्रस्तुतीकरण
- बहुविषयक दृष्टिकोण (राजनीति, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, विधि)
- सरस, प्रभावशाली एवं साहित्यिक भाषा शैली
Original: $18.85
-65%$18.85
$6.60Product Information
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Description
Book Details
- Publisher: Sultan Chand & Sons
- ISBN: 9788196361808
- Edition: 1st Edition
- Language: Hindi
- Weight: 0.00g
About the Book
यह पुस्तक “स्वधीनतोत्तर हिंदी नाटकों में लोकतान्त्रिक मूल्य” डॉ. ब्रह्मदत्त अवस्थी द्वारा रचित एक महत्वपूर्ण शोध-प्रबंध है, जिसमें लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ-साथ भारतीय दर्शन, समाज और सांस्कृतिक जीवन का गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
यह कृति तर्क, विचार, कल्पना और यथार्थ का समन्वय करते हुए साहित्य के माध्यम से लोक-चेतना को उजागर करती है। लेखक ने राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र, दर्शन, अर्थशास्त्र और विधि जैसे विविध विषयों को एकीकृत कर हिंदी साहित्य में एक समृद्ध वैचारिक धारा का निर्माण किया है।
पुस्तक की भाषा अत्यंत सरस, प्रभावशाली और भावपूर्ण है, जिसमें तत्सम और तद्भव शब्दों का सुंदर संतुलन देखने को मिलता है। इसमें भारतीय भूगोल, संस्कृति और समाज की गहराइयों को इस प्रकार प्रस्तुत किया गया है कि पाठक को जीवन और साहित्य के व्यापक आयामों का अनुभव होता है।
यह शोध-ग्रंथ न केवल साहित्यिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और भारतीय समाज की संरचना को समझने के लिए भी अत्यंत उपयोगी है।
Salient Features
- स्वधीनोत्तर हिंदी नाटकों में लोकतांत्रिक मूल्यों का विश्लेषण
- भारतीय दर्शन, समाज और संस्कृति का समन्वित अध्ययन
- तर्क, विचार और यथार्थ का संतुलित प्रस्तुतीकरण
- बहुविषयक दृष्टिकोण (राजनीति, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, विधि)
- सरस, प्रभावशाली एवं साहित्यिक भाषा शैली
























