
TAGORE AUR PREMCHAND KE VYAKTITVA KA TULNATMAK VISHLESHAN
Author: Dr. PRAMOD KUMAR
Brand: Anuugya
Edition: First Edition
Features:
- Ravindra Nath and Tagore
- Personalities of Tagore & Premchand
- Character of Tagore, Literary works of Rabindranath Tagore
- Critical comparison of works of Prem Chand & Tagore
- Novel of Tagore & Premchand
Binding: paperback
Number Of Pages: 64
Release Date: 01-12-2014
Part Number: 9383962259
Details: प्रेमंचद अपने रचनात्मक मानस का टैगोर की तरह विश्लेषण नहीं करते। किसी 'जीवन देवता' की उपस्थिति का कभी जिक्र उनके यहाँ नहीं मिलता। लेकिन उनके जीवनीकार अमृतराय लिखते हैं–बड़े आश्चर्य की और काफी आशय की बात है कि जब तेरह साल का नवाब लिखने बैठा तो उसने तिलिस्म और ऐयारी की राह नहीं पकड़ी, बावजूद उन सैंकड़ों किताबों के जिन्हे वह घोलकर पी चुका था और जो निश्चय ही उसके दिमाग पर छाई रही होगी। कोई ताकत जो खुद उससे भी बड़ी थी उसका हाथ पकड़कर उसे सामाजिकता के उस रास्ते पर ले गयी जिसे भविष्य में उसका अपना खास रास्ता बनाना था। जीवनीकार का यह संकेत कि जिस सामाजिकता को लेखक ने अपना मार्ग बनाया, वह उसके अब तक के बने संस्कार से भिन्न था, स्पष्ट तौर पर यह इंगित करता है कि इस राह तक लाने वाली कोई बड़ी सत्ता रही होगी। वह 'अदृश्य सत्ता' टैगोर के जीवन-देवता जैसी कोई चीज़ हो सकती है।
EAN: 9789383962259
Package Dimensions: 9.0 x 6.0 x 0.2 inches
Languages: Hindi
Original: $0.59
-64%$0.59
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Description
Author: Dr. PRAMOD KUMAR
Brand: Anuugya
Edition: First Edition
Features:
- Ravindra Nath and Tagore
- Personalities of Tagore & Premchand
- Character of Tagore, Literary works of Rabindranath Tagore
- Critical comparison of works of Prem Chand & Tagore
- Novel of Tagore & Premchand
Binding: paperback
Number Of Pages: 64
Release Date: 01-12-2014
Part Number: 9383962259
Details: प्रेमंचद अपने रचनात्मक मानस का टैगोर की तरह विश्लेषण नहीं करते। किसी 'जीवन देवता' की उपस्थिति का कभी जिक्र उनके यहाँ नहीं मिलता। लेकिन उनके जीवनीकार अमृतराय लिखते हैं–बड़े आश्चर्य की और काफी आशय की बात है कि जब तेरह साल का नवाब लिखने बैठा तो उसने तिलिस्म और ऐयारी की राह नहीं पकड़ी, बावजूद उन सैंकड़ों किताबों के जिन्हे वह घोलकर पी चुका था और जो निश्चय ही उसके दिमाग पर छाई रही होगी। कोई ताकत जो खुद उससे भी बड़ी थी उसका हाथ पकड़कर उसे सामाजिकता के उस रास्ते पर ले गयी जिसे भविष्य में उसका अपना खास रास्ता बनाना था। जीवनीकार का यह संकेत कि जिस सामाजिकता को लेखक ने अपना मार्ग बनाया, वह उसके अब तक के बने संस्कार से भिन्न था, स्पष्ट तौर पर यह इंगित करता है कि इस राह तक लाने वाली कोई बड़ी सत्ता रही होगी। वह 'अदृश्य सत्ता' टैगोर के जीवन-देवता जैसी कोई चीज़ हो सकती है।
EAN: 9789383962259
Package Dimensions: 9.0 x 6.0 x 0.2 inches
Languages: Hindi

















