
Tanashahi Se Lokshahi
Author: Gene Sharp
Brand: Rajkamal Prakashan
Features:
- विश्व की तीस से अधिक भाषाओं में अनूदित और चर्चित बेस्टसेलर किताब।
- दुनिया भर में सत्ता से असंतुष्टों को प्रेरित किया तानाशाहों को टक्कर देने वाला एक किताब।” —द न्यू यॉर्क टाइम्स
- जो ऐतिहासिक महत्त्व कार्ल मार्क्स की कम्युनिस्ट मैनिफेस्टो और माओ त्से-तुंग की लिटिल रेड बुक का है वही दर्ज़ा इस पुस्तक ने प्राप्त कर लिया है आन्दोलनकारियों के लिए यह एक टूलबॉक्स है।” —द सन्डे टाइम्स
- जीन शार्प ने शायद ही कभी यह सोचा होगा कि उम्र के नौंवें दशक में, महात्मा गाँधी और मार्टिन लूथर किंग के साथ, एक ही वाक्य में उनका नाम लिखा जायेगा – बीबीसी न्यूज़
- अनुवादक ने किताब का अनुवाद करते हुए भाषा की सहजता का ध्यान रखा है। राजनीति, क्रान्ति और आन्दोलनों से जुड़ी शब्दावलियों को भी आसानी से समझने में मदद मिलती है। यह आम और ख़ास हर तरह के उन पाठकों के लिए एक जरूरी किताब है जो बदलाव और अहिंसा के सम्बन्ध को आज के वैश्विक संदर्भों में समझना चाहते हैं। जिन्हें लोकतंत्र की परवाह है।
Binding: paperback
Number Of Pages: 176
Release Date: 01-10-2020
Details: फ्रॉम डीक्टेटरशिप टू डेमोक्रेसी को मूलरूप से 1993 में अहिंसक संघर्ष के मार्गदर्शन के लिए लिखा गया था| चोरी-चोरी, चुपके-चुपके यह पुस्तक दुनियाभर के तमाम राजनीतिक असंतुष्टों के हाथों में पहुँच गयी| बाद में इसका तीस से अधिक भाषाओँ में अनुवाद किया गया| यह छोटी सी पुस्तिका इक्कीसवीं सदी के अहिंसावादी क्रांतिकारियों के लिए “कैसे-करें” की पथप्रदर्शक बन गयी है| अहिंसक विरोध प्रदर्शन और रक्तहीन क्रान्ति के सुझाव और व्यावहारिक नियम बताने वाली किताब है| क्रान्ति या बदलाव के झूठे सपने या कोई अकल्पनीय रास्ते नहीं बताती बल्कि लोगों को परिवर्तन के वास्तविक पहलू से परिचय कराती है| विश्व की तीस से अधिक भाषाओं में अनूदित और चर्चित बेस्टसेलर किताब। भारत में अहिंसक और असहयोग आन्दोलनों का लंबा इतिहास रहा है। हिन्दी में इस किताब का प्रकाशित होना इस इतिहास को और समृद्ध करेगा। यह आम और ख़ास हर तरह के उन पाठकों के लिए एक जरूरी किताब है जो बदलाव और अहिंसा के सम्बन्ध को आज के वैश्विक संदर्भों में समझना चाहते हैं। जिन्हें लोकतंत्र की परवाह है। अनुवादक ने किताब का अनुवाद करते हुए भाषा की सहजता का ध्यान रखा है। राजनीति, क्रान्ति और आन्दोलनों से जुड़ी शब्दावलियों को भी आसानी से समझने में मदद मिलती है।.
EAN: 9789389598711
Package Dimensions: 7.8 x 5.0 x 0.6 inches
Languages: Hindi
Product Information
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Shipping & Returns
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Description
Author: Gene Sharp
Brand: Rajkamal Prakashan
Features:
- विश्व की तीस से अधिक भाषाओं में अनूदित और चर्चित बेस्टसेलर किताब।
- दुनिया भर में सत्ता से असंतुष्टों को प्रेरित किया तानाशाहों को टक्कर देने वाला एक किताब।” —द न्यू यॉर्क टाइम्स
- जो ऐतिहासिक महत्त्व कार्ल मार्क्स की कम्युनिस्ट मैनिफेस्टो और माओ त्से-तुंग की लिटिल रेड बुक का है वही दर्ज़ा इस पुस्तक ने प्राप्त कर लिया है आन्दोलनकारियों के लिए यह एक टूलबॉक्स है।” —द सन्डे टाइम्स
- जीन शार्प ने शायद ही कभी यह सोचा होगा कि उम्र के नौंवें दशक में, महात्मा गाँधी और मार्टिन लूथर किंग के साथ, एक ही वाक्य में उनका नाम लिखा जायेगा – बीबीसी न्यूज़
- अनुवादक ने किताब का अनुवाद करते हुए भाषा की सहजता का ध्यान रखा है। राजनीति, क्रान्ति और आन्दोलनों से जुड़ी शब्दावलियों को भी आसानी से समझने में मदद मिलती है। यह आम और ख़ास हर तरह के उन पाठकों के लिए एक जरूरी किताब है जो बदलाव और अहिंसा के सम्बन्ध को आज के वैश्विक संदर्भों में समझना चाहते हैं। जिन्हें लोकतंत्र की परवाह है।
Binding: paperback
Number Of Pages: 176
Release Date: 01-10-2020
Details: फ्रॉम डीक्टेटरशिप टू डेमोक्रेसी को मूलरूप से 1993 में अहिंसक संघर्ष के मार्गदर्शन के लिए लिखा गया था| चोरी-चोरी, चुपके-चुपके यह पुस्तक दुनियाभर के तमाम राजनीतिक असंतुष्टों के हाथों में पहुँच गयी| बाद में इसका तीस से अधिक भाषाओँ में अनुवाद किया गया| यह छोटी सी पुस्तिका इक्कीसवीं सदी के अहिंसावादी क्रांतिकारियों के लिए “कैसे-करें” की पथप्रदर्शक बन गयी है| अहिंसक विरोध प्रदर्शन और रक्तहीन क्रान्ति के सुझाव और व्यावहारिक नियम बताने वाली किताब है| क्रान्ति या बदलाव के झूठे सपने या कोई अकल्पनीय रास्ते नहीं बताती बल्कि लोगों को परिवर्तन के वास्तविक पहलू से परिचय कराती है| विश्व की तीस से अधिक भाषाओं में अनूदित और चर्चित बेस्टसेलर किताब। भारत में अहिंसक और असहयोग आन्दोलनों का लंबा इतिहास रहा है। हिन्दी में इस किताब का प्रकाशित होना इस इतिहास को और समृद्ध करेगा। यह आम और ख़ास हर तरह के उन पाठकों के लिए एक जरूरी किताब है जो बदलाव और अहिंसा के सम्बन्ध को आज के वैश्विक संदर्भों में समझना चाहते हैं। जिन्हें लोकतंत्र की परवाह है। अनुवादक ने किताब का अनुवाद करते हुए भाषा की सहजता का ध्यान रखा है। राजनीति, क्रान्ति और आन्दोलनों से जुड़ी शब्दावलियों को भी आसानी से समझने में मदद मिलती है।.
EAN: 9789389598711
Package Dimensions: 7.8 x 5.0 x 0.6 inches
Languages: Hindi

















