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Teen Varsh

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Teen Varsh

Author: Bhagwaticharan Verma

Brand: Rajkamal Prakashan

Edition: Third

Binding: hardcover

Number Of Pages: 163

Release Date: 01-01-2010

Details: हिंदी जगत के जाने माने उपन्यासकार भगवतीचरण वर्मा का प्रस्तुत उपन्यास 'तीन वर्ष' एक ऐसे युवक की कहानी है जो नयी सभ्यता की चकाचौंध से पथभ्रष्ट हो जाता है | समाज की दृष्टि में उदात्त और ऊँची जान पड़ने वाली भावनाओं के पीछे जो प्रेरणाएँ हैं वह स्वार्थपरता और लोभ की अधम मनोवृतियों की ही देन हैं | पहली बार विश्वविद्यालय को केंद्र में रखकर छात्र-छात्राओं के जीवन-प्रसंगों को हिंदी कथा-साहित्य में इतना सहज स्थान प्राप्त हुआ | उनका रहन-सहन, उनके प्रेम-सम्बन्ध और उनकी मनोदशाओं का यथार्थ चित्र प्रस्तुत करना इस उपन्यास का उद्देश्य था | छात्रों के संवेगों के बहुआयामी चित्र समस्त सामाजिक सन्दर्भों से जुड़कर प्रत्यक्ष हुए | इस उपन्यास से यह भी स्पष्ट हुआ कि विश्वविद्यालयीन शिक्षा तब सामान्य युवाजन के लिए उपलब्ध नहीं थी | थोड़े से संपन्न घरों के सौभाग्यवान युवा ही उस जमाने में विश्वविद्यालयों में पढने आया करते थे | कुल मिलकर शिक्षा के विस्तार और प्रसार में आये अन्तर को आंकने और छात्रों की मन स्थितियों के विकास के अध्ययन के लिए भी इस उपन्यास को पढ़ा जाना जरूरी है |

EAN: 9788180315688

Package Dimensions: 8.7 x 5.7 x 0.6 inches

Languages: Hindi

$5.50
Teen Varsh
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Product Information

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Description

Author: Bhagwaticharan Verma

Brand: Rajkamal Prakashan

Edition: Third

Binding: hardcover

Number Of Pages: 163

Release Date: 01-01-2010

Details: हिंदी जगत के जाने माने उपन्यासकार भगवतीचरण वर्मा का प्रस्तुत उपन्यास 'तीन वर्ष' एक ऐसे युवक की कहानी है जो नयी सभ्यता की चकाचौंध से पथभ्रष्ट हो जाता है | समाज की दृष्टि में उदात्त और ऊँची जान पड़ने वाली भावनाओं के पीछे जो प्रेरणाएँ हैं वह स्वार्थपरता और लोभ की अधम मनोवृतियों की ही देन हैं | पहली बार विश्वविद्यालय को केंद्र में रखकर छात्र-छात्राओं के जीवन-प्रसंगों को हिंदी कथा-साहित्य में इतना सहज स्थान प्राप्त हुआ | उनका रहन-सहन, उनके प्रेम-सम्बन्ध और उनकी मनोदशाओं का यथार्थ चित्र प्रस्तुत करना इस उपन्यास का उद्देश्य था | छात्रों के संवेगों के बहुआयामी चित्र समस्त सामाजिक सन्दर्भों से जुड़कर प्रत्यक्ष हुए | इस उपन्यास से यह भी स्पष्ट हुआ कि विश्वविद्यालयीन शिक्षा तब सामान्य युवाजन के लिए उपलब्ध नहीं थी | थोड़े से संपन्न घरों के सौभाग्यवान युवा ही उस जमाने में विश्वविद्यालयों में पढने आया करते थे | कुल मिलकर शिक्षा के विस्तार और प्रसार में आये अन्तर को आंकने और छात्रों की मन स्थितियों के विकास के अध्ययन के लिए भी इस उपन्यास को पढ़ा जाना जरूरी है |

EAN: 9788180315688

Package Dimensions: 8.7 x 5.7 x 0.6 inches

Languages: Hindi