
To Hazirin Hua Yun
Author: Ankit Chaddha
Brand: Rajkamal Prakashan
Edition: First Edition
Binding: paperback
Number Of Pages: 224
Release Date: 01-09-2022
Details: अंकित चड्ढा दास्तानगोई के आसमान का सबसे दरख़्शाँ सितारा था जिसको वक़्त ने बड़ी बेरहमी से हम सब से जुदा कर दिया। अंकित ने छह साल मेरे साथ काम किया मगर उन 6 सालों में उसने 20 सालों का सफ़र तय किया। उसमें बला की ख़ुद-एत्तेमादी, बला की कशिश, बला की संजीदगी और बला की शोख़ी थी। दास्तानगोई शुरू करने के साल भर के अन्दर उसने जान लिया था कि उसे यही काम करना है और उसने नौकरी-वौकरी को ताक पर रखकर कबीर पे अपनी ख़ुद साख़्ता ‘ढाई आखर की दास्तान’ बना कर अपनी आमद का डंका बजा दिया था। फिर वो एक के बाद एक नए तजुर्बे, नए साँचे, नए रंग, नए क़हक़हे बिखेरता चला गया। दास्तान-ए-एलिस में उसने बच्चों को जिस तरह रिझाया वो कोई बहुत ग़ैरमामूली तौर पर सच्चा और बिरला इंसान ही कर सकता था। ये उसका जौहर था की जिसने एक बार उसको देखा वो उसका गिरवीदा हो गया। वो सिर्फ़ दास्तानें नहीं सुनाता था लोगों के दिलों में जाकर बैठ जाता था और वो आज भी उन हज़ारों लोगों के दिलों में बैठा हुआ है जिन्हें उससे दास्तान सुनने का शर्फ़ हासिल हुआ। इस किताब में उसकी लिखी और तदवीन की हुई ढेरों दास्तानें हैं। कहीं शगुफ़्तगी है, कहीं तंज़ है, कहीं हंसी की फुहार है, कहीं दिल-गिरफ़्तगी है, मगर उसके यहाँ हुज़्न में भी हुस्न है, तल्ख़ी में भी प्यार है। कहीं कबीर है, कहीं खुसरो हैं, कहीं गांधी है, कहीं चींटियाँ हैं, कहीं खानाबदोश हैं। ये किताब अंकित की यादगार है। उसका नेमुल-बदल है। दिलफ़रेब, हसीन, ख़ूबसूरत, चुलबुला अंकित आज नहीं है मगर उसकी छोड़ी ये कहानियाँ हमें हमेशा उसकी याद दिलाते रहेंगी अंकित ज़िंदाबाद, पाइँदाबाद। —महमूद फ़ारूक़ी
EAN: 9789393768285
Package Dimensions: 8.4 x 5.5 x 0.6 inches
Languages: Hindi
Original: $3.04
-65%$3.04
$1.06Product Information
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Shipping & Returns
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Description
Author: Ankit Chaddha
Brand: Rajkamal Prakashan
Edition: First Edition
Binding: paperback
Number Of Pages: 224
Release Date: 01-09-2022
Details: अंकित चड्ढा दास्तानगोई के आसमान का सबसे दरख़्शाँ सितारा था जिसको वक़्त ने बड़ी बेरहमी से हम सब से जुदा कर दिया। अंकित ने छह साल मेरे साथ काम किया मगर उन 6 सालों में उसने 20 सालों का सफ़र तय किया। उसमें बला की ख़ुद-एत्तेमादी, बला की कशिश, बला की संजीदगी और बला की शोख़ी थी। दास्तानगोई शुरू करने के साल भर के अन्दर उसने जान लिया था कि उसे यही काम करना है और उसने नौकरी-वौकरी को ताक पर रखकर कबीर पे अपनी ख़ुद साख़्ता ‘ढाई आखर की दास्तान’ बना कर अपनी आमद का डंका बजा दिया था। फिर वो एक के बाद एक नए तजुर्बे, नए साँचे, नए रंग, नए क़हक़हे बिखेरता चला गया। दास्तान-ए-एलिस में उसने बच्चों को जिस तरह रिझाया वो कोई बहुत ग़ैरमामूली तौर पर सच्चा और बिरला इंसान ही कर सकता था। ये उसका जौहर था की जिसने एक बार उसको देखा वो उसका गिरवीदा हो गया। वो सिर्फ़ दास्तानें नहीं सुनाता था लोगों के दिलों में जाकर बैठ जाता था और वो आज भी उन हज़ारों लोगों के दिलों में बैठा हुआ है जिन्हें उससे दास्तान सुनने का शर्फ़ हासिल हुआ। इस किताब में उसकी लिखी और तदवीन की हुई ढेरों दास्तानें हैं। कहीं शगुफ़्तगी है, कहीं तंज़ है, कहीं हंसी की फुहार है, कहीं दिल-गिरफ़्तगी है, मगर उसके यहाँ हुज़्न में भी हुस्न है, तल्ख़ी में भी प्यार है। कहीं कबीर है, कहीं खुसरो हैं, कहीं गांधी है, कहीं चींटियाँ हैं, कहीं खानाबदोश हैं। ये किताब अंकित की यादगार है। उसका नेमुल-बदल है। दिलफ़रेब, हसीन, ख़ूबसूरत, चुलबुला अंकित आज नहीं है मगर उसकी छोड़ी ये कहानियाँ हमें हमेशा उसकी याद दिलाते रहेंगी अंकित ज़िंदाबाद, पाइँदाबाद। —महमूद फ़ारूक़ी
EAN: 9789393768285
Package Dimensions: 8.4 x 5.5 x 0.6 inches
Languages: Hindi

















