
Ubtan - Collection of Short Stories -- उबटन -कहानी संग्रह
Author: Shyamal Bihari Mahto -- श्यामल बिहारी महतो
Brand: Anuugya Books
Edition: Ist
Binding: paperback
Number Of Pages: 131
Release Date: 01-12-2022
Details: वर्ष 2006 में पहली किताब आयी थी। इधर के वर्षों में लिखी गयी कहानियाँ सामाजिक सन्दर्भो के मानक पर कितनी खरी उतरती हैं यह तो वक्त ही जवाब दे सकता है। कभी-कभी सोचता हूँ कि आखिर मैं लिखता हूँ तो किसके लिए? यूनियन में हूँ कोयिलरी मजदूरों के बीच अपनी एक पहचान है। क्या इतना काफी नहीं था जो मैंने कलम उठा ली! इस भ्रष्ट युग और घोर लूट-खसोट के इस दौर में कहाँ टिकती हैं मेरी ये कहानियाँ और लेखक के रूप में मैं कहाँ टिकता हूँ। माना कि मेरा जीवन खुद एक संघर्ष का जीवन रहा है। गाँव में महाजनी प्रथा के विरूद्ध लड़ते हुए बड़ा हुआ। कोयिलरी में पहुँचा तो यहाँ की लड़ाई का रूप बदल गया। अफसर अजगर की तरह नजर आ रहे थे तो ट्रेड यूनियनों का चरित्र “चालबाजों” में बदला हुआ था और शायद यही कारण है कि मैं अपनी इस पाँचवीं पुस्तक की कहानियों को लेकर कभी भटकाव की स्थिति में नहीं रहा। इस संग्रह “उबटन” में मेरी जो कहानियाँ हैं सभी में कहीं-न-कहीं एक वैचारिक आन्दोलन की पहल करती है, लड़कर बाहर निकलने का रास्ता भी दिखाती हैं। लिखने से ज्यादा मैंने इन कहानियों को जिया और जूझा है सदा।
EAN: 9789391034412
Package Dimensions: 9.0 x 6.0 x 0.5 inches
Languages: Hindi
Product Information
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Description
Author: Shyamal Bihari Mahto -- श्यामल बिहारी महतो
Brand: Anuugya Books
Edition: Ist
Binding: paperback
Number Of Pages: 131
Release Date: 01-12-2022
Details: वर्ष 2006 में पहली किताब आयी थी। इधर के वर्षों में लिखी गयी कहानियाँ सामाजिक सन्दर्भो के मानक पर कितनी खरी उतरती हैं यह तो वक्त ही जवाब दे सकता है। कभी-कभी सोचता हूँ कि आखिर मैं लिखता हूँ तो किसके लिए? यूनियन में हूँ कोयिलरी मजदूरों के बीच अपनी एक पहचान है। क्या इतना काफी नहीं था जो मैंने कलम उठा ली! इस भ्रष्ट युग और घोर लूट-खसोट के इस दौर में कहाँ टिकती हैं मेरी ये कहानियाँ और लेखक के रूप में मैं कहाँ टिकता हूँ। माना कि मेरा जीवन खुद एक संघर्ष का जीवन रहा है। गाँव में महाजनी प्रथा के विरूद्ध लड़ते हुए बड़ा हुआ। कोयिलरी में पहुँचा तो यहाँ की लड़ाई का रूप बदल गया। अफसर अजगर की तरह नजर आ रहे थे तो ट्रेड यूनियनों का चरित्र “चालबाजों” में बदला हुआ था और शायद यही कारण है कि मैं अपनी इस पाँचवीं पुस्तक की कहानियों को लेकर कभी भटकाव की स्थिति में नहीं रहा। इस संग्रह “उबटन” में मेरी जो कहानियाँ हैं सभी में कहीं-न-कहीं एक वैचारिक आन्दोलन की पहल करती है, लड़कर बाहर निकलने का रास्ता भी दिखाती हैं। लिखने से ज्यादा मैंने इन कहानियों को जिया और जूझा है सदा।
EAN: 9789391034412
Package Dimensions: 9.0 x 6.0 x 0.5 inches
Languages: Hindi























