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Udai Pratap Singh-Anubhav ka Aakash by Dr Dheeraj Kumar [Hardcover] Dr Dheeraj Kumar [Hardcover] Dr Dheeraj Kumar

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Udai Pratap Singh-Anubhav ka Aakash by Dr Dheeraj Kumar [Hardcover] Dr Dheeraj Kumar [Hardcover] Dr Dheeraj Kumar

Author: Dr Dheeraj Kumar

Brand: ANUUGYA BOOKS

Edition: Ist

Features:


  • Language Published: Hindi

Binding: hardcover

Number Of Pages: 160

Release Date: 01-12-2020

Part Number: B083CXLDRN

Details: आदरणीय उदय प्रताप सिंह की कविता समाज, साहित्य और सियासत के मार्मिक भावों की इन्द्रधनुषी अभिव्यक्ति है। ‘फूल और कली’ के माध्यम से यह ‘जीवन की सार्थकता बीज बन जाने’ में पाते हैं वहीं ‘ऐसे नहीं जागकर बैठो तुम हो पहरेदार चमन के’ में ‘संघर्षों को सुख’ मानने वाले की प्रशंसा है। ‘शारदे’ कविता में माँ सरस्वती से करबद्ध प्रार्थना है कि वे उन्हें उत्तम ‘भावना, ज्ञान और विचार’ दें तथा सपूत कहकर थोड़ा-सा दुलार दें। ‘चाँदनी’ उन्हें बहुत आकर्षित करती है, बचपन से अब तक उन्हें भाती रही है। खेत-खलिहान में बुलाती रही हैै वे चाँदनी को और चाँदनी उन्हें निःस्वार्थ भाती रही है। ‘अयोध्या’ मर्यादा पुरुषोत्तम की जन्मस्थली अवश्य है लेकिन उनकी व्याप्ति कण-कण में है, वे विश्वव्यापी है इसीलिए उन्हें एक परिधि में सीमित कर विवादों में नहीं घसीटा जाना चाहिए। ‘रामजन्मभूमि को तो राम ही सँभाल लेंगे’ हमें अपनी मातृभूमि को सँभालना चाहिए। ‘एक मुट्ठी धान’ के माध्यम से ज्वलंत समस्याओं पर विचार-विमर्श किया गया है कि आज ‘हिन्दुस्तान में हिन्दुस्तान कहाँ है?’ जिसका गौरवशाली अतीत रहा आज उसकी क्या दुर्गति हो गई है कि ‘एक मुट्ठी धान’ के खातिर तन बेचने को विवश है। क्या यही वह हिन्दुस्तान है?

Package Dimensions: 9.1 x 5.9 x 1.2 inches

Languages: Hindi

$1.24

Original: $3.54

-65%
Udai Pratap Singh-Anubhav ka Aakash by Dr Dheeraj Kumar [Hardcover] Dr Dheeraj Kumar [Hardcover] Dr Dheeraj Kumar

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Description

Author: Dr Dheeraj Kumar

Brand: ANUUGYA BOOKS

Edition: Ist

Features:


  • Language Published: Hindi

Binding: hardcover

Number Of Pages: 160

Release Date: 01-12-2020

Part Number: B083CXLDRN

Details: आदरणीय उदय प्रताप सिंह की कविता समाज, साहित्य और सियासत के मार्मिक भावों की इन्द्रधनुषी अभिव्यक्ति है। ‘फूल और कली’ के माध्यम से यह ‘जीवन की सार्थकता बीज बन जाने’ में पाते हैं वहीं ‘ऐसे नहीं जागकर बैठो तुम हो पहरेदार चमन के’ में ‘संघर्षों को सुख’ मानने वाले की प्रशंसा है। ‘शारदे’ कविता में माँ सरस्वती से करबद्ध प्रार्थना है कि वे उन्हें उत्तम ‘भावना, ज्ञान और विचार’ दें तथा सपूत कहकर थोड़ा-सा दुलार दें। ‘चाँदनी’ उन्हें बहुत आकर्षित करती है, बचपन से अब तक उन्हें भाती रही है। खेत-खलिहान में बुलाती रही हैै वे चाँदनी को और चाँदनी उन्हें निःस्वार्थ भाती रही है। ‘अयोध्या’ मर्यादा पुरुषोत्तम की जन्मस्थली अवश्य है लेकिन उनकी व्याप्ति कण-कण में है, वे विश्वव्यापी है इसीलिए उन्हें एक परिधि में सीमित कर विवादों में नहीं घसीटा जाना चाहिए। ‘रामजन्मभूमि को तो राम ही सँभाल लेंगे’ हमें अपनी मातृभूमि को सँभालना चाहिए। ‘एक मुट्ठी धान’ के माध्यम से ज्वलंत समस्याओं पर विचार-विमर्श किया गया है कि आज ‘हिन्दुस्तान में हिन्दुस्तान कहाँ है?’ जिसका गौरवशाली अतीत रहा आज उसकी क्या दुर्गति हो गई है कि ‘एक मुट्ठी धान’ के खातिर तन बेचने को विवश है। क्या यही वह हिन्दुस्तान है?

Package Dimensions: 9.1 x 5.9 x 1.2 inches

Languages: Hindi