Veda Kalpataru (Hindi)
Author: Maharishi Sandipani Rashtriya Vedvidya Pratishthan
Brand: NBT INDIA
Edition: First Edition
Features:
- सम्पूर्ण विश्व के प्रत्येक जन-जन को वेदज्ञान से लाभान्वित करने के विश्वव्यापी महान संकल्प के साथ इस ग्रन्थ का सम्पादन किया गया है।
Binding: paperback
Number Of Pages: 278
Release Date: 15-12-2023
Details: वैदिकवाङ्मय भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति का मूल तथा अनन्त ज्ञान राशि का भण्डार है। यह वैदिक ज्ञान ज्योति के रूप में सम्पूर्ण विश्व को दीप्तिमान कर रहा है। वैदिक वाङ्मय का अपना अभूतपूर्व गौरव रहा है जो भारतीय संस्कृति को आज भी अनुप्राणित कर रहा है। इसी संस्कृति तथा गौरव से समाज को अवगत कराने की दृष्टि से वेदों में निहित विभिन्न तत्वों को यहां समेकित करने का प्रयत्न किया गया है। भारत ही नहीं अपितु सम्पूर्ण विश्व के प्रत्येक जन-जन को वेदज्ञान से लाभान्वित करने के विश्वव्यापी महान संकल्प के साथ इस ग्रन्थ का सम्पादन किया गया है। महर्षि सान्दीपनि राष्ट्रीय वेदविद्या प्रतिष्ठान (शिक्षा मन्त्रालय भारत सरकार का स्वायत्तशासी संस्थान) की स्थापना 20 जनवरी 1987 को राष्ट्रीय वेदविद्या प्रतिष्ठान नाम से दिल्ली में हुई तथा महर्षि सान्दीपनि के स्मरण में मई 1993 में उज्जैन स्थानान्तरित होने के पश्चात् महर्षि सान्दीपनि राष्ट्रीय वेदविद्या प्रतिष्ठान के रूप में इसका नाम परिवर्तित किया गया। भारत सरकार के माननीय शिक्षामन्त्री जी इस संस्था के अध्यक्ष रहते हैं। वेदों के संरक्षण हेतु सभी प्रकार की वित्तीय सहायता अनुदान भारत सरकार द्वारा प्रदान की जाती है।
EAN: 9789357432801
Languages: Hindi
Original: $2.85
-65%$2.85
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Description
Author: Maharishi Sandipani Rashtriya Vedvidya Pratishthan
Brand: NBT INDIA
Edition: First Edition
Features:
- सम्पूर्ण विश्व के प्रत्येक जन-जन को वेदज्ञान से लाभान्वित करने के विश्वव्यापी महान संकल्प के साथ इस ग्रन्थ का सम्पादन किया गया है।
Binding: paperback
Number Of Pages: 278
Release Date: 15-12-2023
Details: वैदिकवाङ्मय भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति का मूल तथा अनन्त ज्ञान राशि का भण्डार है। यह वैदिक ज्ञान ज्योति के रूप में सम्पूर्ण विश्व को दीप्तिमान कर रहा है। वैदिक वाङ्मय का अपना अभूतपूर्व गौरव रहा है जो भारतीय संस्कृति को आज भी अनुप्राणित कर रहा है। इसी संस्कृति तथा गौरव से समाज को अवगत कराने की दृष्टि से वेदों में निहित विभिन्न तत्वों को यहां समेकित करने का प्रयत्न किया गया है। भारत ही नहीं अपितु सम्पूर्ण विश्व के प्रत्येक जन-जन को वेदज्ञान से लाभान्वित करने के विश्वव्यापी महान संकल्प के साथ इस ग्रन्थ का सम्पादन किया गया है। महर्षि सान्दीपनि राष्ट्रीय वेदविद्या प्रतिष्ठान (शिक्षा मन्त्रालय भारत सरकार का स्वायत्तशासी संस्थान) की स्थापना 20 जनवरी 1987 को राष्ट्रीय वेदविद्या प्रतिष्ठान नाम से दिल्ली में हुई तथा महर्षि सान्दीपनि के स्मरण में मई 1993 में उज्जैन स्थानान्तरित होने के पश्चात् महर्षि सान्दीपनि राष्ट्रीय वेदविद्या प्रतिष्ठान के रूप में इसका नाम परिवर्तित किया गया। भारत सरकार के माननीय शिक्षामन्त्री जी इस संस्था के अध्यक्ष रहते हैं। वेदों के संरक्षण हेतु सभी प्रकार की वित्तीय सहायता अनुदान भारत सरकार द्वारा प्रदान की जाती है।
EAN: 9789357432801
Languages: Hindi












