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Vishv Cinema Mein Stree | ????? ?????? ??? ??????????? ????? [Paperback] Vijay Sharma [Paperback] Vijay Sharma

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Vishv Cinema Mein Stree | ????? ?????? ??? ??????????? ????? [Paperback] Vijay Sharma [Paperback] Vijay Sharma

Author: Vijay Sharma

Brand: Anuugya Books

Edition: 1

Features:

  • Paradigms of Women in world Cinema.

Binding: paperback

Number Of Pages: 224

Release Date: 01-12-2018

Details: अगर कहानी ही जाननी है तो कहानी या उपन्यास पढऩा काफी है। उसके लिए फिल्म क्यों देखी जाए? फिल्म एक बहुत ही समृद्ध चाक्षुष विधा है, इसका अपना शिल्प होता है, अपनी तकनीकि होती है। साहित्य से भिन्न फिल्म की अपनी एक अलग खास भाषा होती है, इसके अपने मुहावरें होते हैं। फिल्म की भाषा शब्द, वाक्य, अनुच्छेद नहीं होते हैं, फिल्म की भाषा होती है, इसमें प्रयुक्त प्रकाश-छाया, ध्वनि, अभिनय, पोशाक, लोकेशन, सेट, कैमरे का एंगल, कैमरे से वस्तु अथवा व्यक्ति की दूरी या नजदीकी, गीत-संगीत, संवाद आदि, आदि। जैसे साहित्य की समझ विकसित करनी होती है और उसका आनन्द उठाने के लिए खुद को प्रशिक्षित करना पड़ता है। फिल्म में साउंड अर्थात ध्वनि का बहुत महत्त्वपूर्ण योगदान होता है। ध्वनि, शब्द (संवाद), गीत-संगीत फिल्म का समावेशी अंग होते हैं। ये फिल्म का हिस्सा होते हैं साथ ही फिल्म देखने के अनुभव में बहुत बड़ा योगदान करते हैं। हालांकि प्रारम्भिक दौर में $िफल्में मूक हुआ करती थीं, तब भी जब परदे पर $िफल्म चलती थी हॉल में सामने ऑकेस्ट्रा बैठा होता था, वाद्य यन्त्रों के साथ संगीतज्ञ बैठते थे और बाकायदा फिल्म को गीत-संगीत की संगत देते थे। कभी-कभी दर्शकों की माँग पर दोबारा-तिबारा भी गाने गाये जाते। कैसा मजेदार दृश्य होता होगा! पाश्र्व गायन का प्रचलन बाद में टॉकी के साथ प्रारम्भ हुआ। पहले अभिनेता स्वयं गाया करते थे अत: उनका अभिनय के साथ-साथ गायन में निष्णात होना आवश्यक हुआ करता था। बाद में गायक अभिनेता से अलग व्यक्ति होने लगे। काफी समय तक अभिनेता विशेष के लिए एक खास गायक/गायिका ही आवाज देते थे। श्रोता गायक/गायिका की आवाज से अभिनेता/अभिनेत्री को पहचानते थे। बाद में कोई भी किसी के लिए गाने लगा।

Package Dimensions: 9.0 x 6.0 x 0.6 inches

Languages: Hindi

$0.69

Original: $1.97

-65%
Vishv Cinema Mein Stree | ????? ?????? ??? ??????????? ????? [Paperback] Vijay Sharma [Paperback] Vijay Sharma

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Description

Author: Vijay Sharma

Brand: Anuugya Books

Edition: 1

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  • Paradigms of Women in world Cinema.

Binding: paperback

Number Of Pages: 224

Release Date: 01-12-2018

Details: अगर कहानी ही जाननी है तो कहानी या उपन्यास पढऩा काफी है। उसके लिए फिल्म क्यों देखी जाए? फिल्म एक बहुत ही समृद्ध चाक्षुष विधा है, इसका अपना शिल्प होता है, अपनी तकनीकि होती है। साहित्य से भिन्न फिल्म की अपनी एक अलग खास भाषा होती है, इसके अपने मुहावरें होते हैं। फिल्म की भाषा शब्द, वाक्य, अनुच्छेद नहीं होते हैं, फिल्म की भाषा होती है, इसमें प्रयुक्त प्रकाश-छाया, ध्वनि, अभिनय, पोशाक, लोकेशन, सेट, कैमरे का एंगल, कैमरे से वस्तु अथवा व्यक्ति की दूरी या नजदीकी, गीत-संगीत, संवाद आदि, आदि। जैसे साहित्य की समझ विकसित करनी होती है और उसका आनन्द उठाने के लिए खुद को प्रशिक्षित करना पड़ता है। फिल्म में साउंड अर्थात ध्वनि का बहुत महत्त्वपूर्ण योगदान होता है। ध्वनि, शब्द (संवाद), गीत-संगीत फिल्म का समावेशी अंग होते हैं। ये फिल्म का हिस्सा होते हैं साथ ही फिल्म देखने के अनुभव में बहुत बड़ा योगदान करते हैं। हालांकि प्रारम्भिक दौर में $िफल्में मूक हुआ करती थीं, तब भी जब परदे पर $िफल्म चलती थी हॉल में सामने ऑकेस्ट्रा बैठा होता था, वाद्य यन्त्रों के साथ संगीतज्ञ बैठते थे और बाकायदा फिल्म को गीत-संगीत की संगत देते थे। कभी-कभी दर्शकों की माँग पर दोबारा-तिबारा भी गाने गाये जाते। कैसा मजेदार दृश्य होता होगा! पाश्र्व गायन का प्रचलन बाद में टॉकी के साथ प्रारम्भ हुआ। पहले अभिनेता स्वयं गाया करते थे अत: उनका अभिनय के साथ-साथ गायन में निष्णात होना आवश्यक हुआ करता था। बाद में गायक अभिनेता से अलग व्यक्ति होने लगे। काफी समय तक अभिनेता विशेष के लिए एक खास गायक/गायिका ही आवाज देते थे। श्रोता गायक/गायिका की आवाज से अभिनेता/अभिनेत्री को पहचानते थे। बाद में कोई भी किसी के लिए गाने लगा।

Package Dimensions: 9.0 x 6.0 x 0.6 inches

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