
Yanosh Bahadur
Author: Sándor Petőfi
Brand: Rajkamal Prakashan
Binding: hardcover
Number Of Pages: 144
Release Date: 03-01-2023
Details: 2023 में शान्दोर पैतोफ़ी की 200वीं जयंती मनाने की विश्वव्यापी तैयारी हो रही है। उनकी 43 कविताओं के संग्रह स्वाधीनता, प्यार की कविताओं पर प्रसिद्ध कवि यानोश हाय और संगीतज्ञ तॉमॉश रोज़ ने संगीतबद्ध प्रस्तुतियाँ दीं और इन कविताओं ने श्रोताओं को ख़ूब प्रभावित किया। जैसा कि मारिया नेज्यैशी लिखती हैं, इस काव्यात्मक कथा यानोश बहादुर का संग-साथ उन्हें तब से प्राप्त है जब वे 5-6 साल की थीं और पढ़ना-लिखना भी नहीं जानती थीं। यानोश हाय लिखते हैं कि यानोश बहादुर के रचनाकार शान्दोर पैतोफ़ी उन आरम्भिक चार-पाँच शब्दों में से एक हैं, जिन्हें उनके देश के बच्चे पहली बार अपनी भाषा सीखते समय ही याद कर लेते हैं। यानोश बहादुर किस विधा की रचना है? 1845 में इसके प्रकाशन के बाद से इसे विभिन्न खाँचों में रखने की कोशिश होती रही है। यह लोकगीत है या महाकाव्य है? कुछ लोगों ने इसे हल्की-फुल्की ‘कहानी’ भी कहा है। लेकिन इसने एक अनाथ लघु मानव के संघर्ष की, उत्कर्ष की, साहसिक यात्रा की, और शायद सबसे अधिक एक अटूट प्रेम की अनोखी कहानी दी है। यहाँ तक कि यह भी कहा जाता है कि इसे पढ़कर हर नौजवान यानोश बहादुर, और युवती इलुश्का बनना चाहती है। यह अद्भुत है कि केवल 26 वर्ष की आयु में शान्दोर पैतोफ़ी हमें अनेक रचनाएँ दे गए। सांस्कृतिक-साहित्यिक तमाम विधाओं में उनकी झलक आज भी देखी जा सकती है। यह भी अविस्मरणीय है कि पैतोफ़ी का युग 1848 की यूरोपीय क्रान्तियों का युग था। निर्भयता, साहस, नैतिकता का आह्वान करने वाला यह कवि ख़ुद ऑस्ट्रियाई साम्राज्य से हंगरी को आज़ाद कराने के लिए रणभूमि में लड़ता हुआ मरा।
EAN: 9789395737210
Package Dimensions: 8.6 x 5.7 x 0.7 inches
Languages: Hindi
Original: $8.17
-65%$8.17
$2.86Product Information
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Description
Author: Sándor Petőfi
Brand: Rajkamal Prakashan
Binding: hardcover
Number Of Pages: 144
Release Date: 03-01-2023
Details: 2023 में शान्दोर पैतोफ़ी की 200वीं जयंती मनाने की विश्वव्यापी तैयारी हो रही है। उनकी 43 कविताओं के संग्रह स्वाधीनता, प्यार की कविताओं पर प्रसिद्ध कवि यानोश हाय और संगीतज्ञ तॉमॉश रोज़ ने संगीतबद्ध प्रस्तुतियाँ दीं और इन कविताओं ने श्रोताओं को ख़ूब प्रभावित किया। जैसा कि मारिया नेज्यैशी लिखती हैं, इस काव्यात्मक कथा यानोश बहादुर का संग-साथ उन्हें तब से प्राप्त है जब वे 5-6 साल की थीं और पढ़ना-लिखना भी नहीं जानती थीं। यानोश हाय लिखते हैं कि यानोश बहादुर के रचनाकार शान्दोर पैतोफ़ी उन आरम्भिक चार-पाँच शब्दों में से एक हैं, जिन्हें उनके देश के बच्चे पहली बार अपनी भाषा सीखते समय ही याद कर लेते हैं। यानोश बहादुर किस विधा की रचना है? 1845 में इसके प्रकाशन के बाद से इसे विभिन्न खाँचों में रखने की कोशिश होती रही है। यह लोकगीत है या महाकाव्य है? कुछ लोगों ने इसे हल्की-फुल्की ‘कहानी’ भी कहा है। लेकिन इसने एक अनाथ लघु मानव के संघर्ष की, उत्कर्ष की, साहसिक यात्रा की, और शायद सबसे अधिक एक अटूट प्रेम की अनोखी कहानी दी है। यहाँ तक कि यह भी कहा जाता है कि इसे पढ़कर हर नौजवान यानोश बहादुर, और युवती इलुश्का बनना चाहती है। यह अद्भुत है कि केवल 26 वर्ष की आयु में शान्दोर पैतोफ़ी हमें अनेक रचनाएँ दे गए। सांस्कृतिक-साहित्यिक तमाम विधाओं में उनकी झलक आज भी देखी जा सकती है। यह भी अविस्मरणीय है कि पैतोफ़ी का युग 1848 की यूरोपीय क्रान्तियों का युग था। निर्भयता, साहस, नैतिकता का आह्वान करने वाला यह कवि ख़ुद ऑस्ट्रियाई साम्राज्य से हंगरी को आज़ाद कराने के लिए रणभूमि में लड़ता हुआ मरा।
EAN: 9789395737210
Package Dimensions: 8.6 x 5.7 x 0.7 inches
Languages: Hindi

















